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केजरीवाल में सचमुच एक गांधी या अन्ना होता तो वह सरकारी घर लेने के बारे में सोचते तक नहीं

Yashwant Singh : चलिए, हमारे आपके दबाव में केजरीवाल को अकल आ गई… दोस्तों, सच्चा पत्रकार वही होता है जो अच्छाई की बिना किसी लालसा तारीफ करे और बिना किसी भय बुराई को कोसे… उम्मीद करते हैं कि केजरीवाल कम से कम उन बातों वादों से तो नहीं हटेंगे, खिसकेंगे, बदलेंगे जो उन्होंने जनता के सामने लिखित में कही है… उसी में से सरकारी घर और सरकारी गाड़ी न लेने का वादा था… अगर केजरीवाल में सचमुच एक गांधी होता तो वह यह सोचता ही नहीं कि उसे सरकारी घर चाहिए…

Yashwant Singh : चलिए, हमारे आपके दबाव में केजरीवाल को अकल आ गई… दोस्तों, सच्चा पत्रकार वही होता है जो अच्छाई की बिना किसी लालसा तारीफ करे और बिना किसी भय बुराई को कोसे… उम्मीद करते हैं कि केजरीवाल कम से कम उन बातों वादों से तो नहीं हटेंगे, खिसकेंगे, बदलेंगे जो उन्होंने जनता के सामने लिखित में कही है… उसी में से सरकारी घर और सरकारी गाड़ी न लेने का वादा था… अगर केजरीवाल में सचमुच एक गांधी होता तो वह यह सोचता ही नहीं कि उसे सरकारी घर चाहिए…

इतनी फजीहत कराने के बाद बंगला न लेने या छोटा बंगला लेने का फैसला लेना केजरीवाल को हास्यास्पद बना देता है… भाजपा वालों ने विश्वासमत के दिन ही विधानसभा में बता दिया था कि ये केजरीवाल सरकारी घर लेने को ओके कर चुका है.. पर मुझे तब विश्वास नहीं हुआ… लेकिन कल ज्योंही पता चला कि केजरीवाल भाई साहब सच में सरकारी घर लेने वाले हैं तो झटका सा लगा.. मैं फिर कह रहा हूं कि केजरीवाल को अपने चंदों से एक किराए पर घर ले लेना चाहिए और उसमें रहकर काम करना चाहिए… शुरुआती दो चार दिन अपनी कार, छोटी कार, अपने घर, मेट्रो आदि का ड्रामा करके प्रचार वाह वाह पाने वाले केजरीवाल एंड कंपनी की पोल इतनी जल्दी खुल जाएगी, मुझे अंदाजा नहीं था.. मेरे तो सच में कान खड़े हो गए हैं..

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.


Mansi Manish : केजरीवाल ने सरकारी आवास लेने से मना कर दिया… यह साफ़ है कि अरविंद केजरीवाल ने यह निर्णय दबाव में लिया है… कल से लगातार आम आदमी पार्टी के बडे बड़े चंदा दाता और वोटर उनकी वाल पर दबाव बनाए हुए हैं… अब शायद उन्हें यह समझ में आ जाए कि इतना आसान नहीं है पब्लिक सेंटीमेंट से खेलना, लेकिन जनता समझ चुकी है कि अरविंद केजरीवाल की महात्वाकांक्षाएं भी कम नहीं हैं, अगर पब्लिक का प्रेशर नहीं होता तो वह कभी ऐसा नहीं करते…

हिंदुस्तान, दिल्ली की रिपोर्टर मानसी मिश्रा के फेसबुक वॉल से.

Sanjay Tiwari : नहीं, आप मुझे ये बताइये ये सब बड़बड़ बड़बड़ बोलने की क्या जरूरत है कि मैं ये नहीं लूंगा. मैं वो नहीं लूंगा. और फिर सरकार होने की मजबूरी बताकर सब लेने देने भी लगते हैं. केजरीवाल साहब, आपको जो सुख सुविधा लेनी है, ले लीजिए और काम कीजिए. नेता चिल्लाएं तो चिल्लाएं जनता आपको कभी शिकायत करने नहीं जाएगी. नेताओं की लूट और धोखे से अब उसे कोई धक्का नहीं लगता. लेकिन इस तरह सादगी का सब्जबाग दिखाकर दूसरे दलों की तरह आम आदमी को ज़लील मत कीजिए. उसका भरोसा टूट जाएगा.

विस्फोट डाट काम के एडिटर संजय तिवारी के फेसबुक वॉल से.

Abhinav Shankar : अब अरविन्द केजरीवाल सही मायनों में आम आदमी के नेता, हमारे नेता हो गए है। जब तक कोई सुविधा (सही या गलत) खुद को ना मिले तब तक उसे जी भर कर कोसना, उस सुविधा के औचित्य पर ही सवाल उठा देना और जब वो सुविधा अपने सामर्थ्य के दायरे में आ जाये तो उसे उचित साबित करना – ये एक आम आदमी का चिरातन चरित्र है। यही चरित्र अपना कर अरविन्द केज्रिवाल ने ये साबित कर दिया है की सही मायनों में वो हमारे नेते है। वो अंग्रेजी में कहते है ना- All power to Arvind Kejriwal. जय आम आदमी।

न्यू मीडिया जर्नलिस्ट और सोशल एक्टिविस्ट अभिनव शंकर के फेसबुक वॉल से.

Niloo Ranjan : परिस्थितिजन्य ईमानदारी- इसका मतलब समझने की कोशिश कर रहा हूं। खासकर केजरीवाल के फ्लैट वापस करने की घोषणा के बाद….

दैनिक जागरण, दिल्ली के पत्रकार नीलू रंजन के फेसबुक वॉल से.

कुछ अन्य फेसबुकी टिप्पणियां…

Madan Tiwary इसलिये कोई भी निर्णय बहुत सोच समझ कर लेना चाहिये । कसम तो कम से कम नहीं खाना चाहिये और अगर कुछ गलत वादा कर भी दिया जो निभाना किसी कारणवश संभव नहीं है तो उस गलती को स्वीकार कर लेना चाहिये। गांधी की महानता सच बोलने में नहीं थी बल्कि अपनी गलती को स्वीकारने के कारण ज्यादा थी। अब खुजलीवाल से गुजारिश है कि एक कानून बना दें, चोर पकड़ाये, माल वापस करे तो केस नहीं, घूसखोर पकड़ाये, माल वापस करे तो इनाम।

Sanjay Kumar केजरीवाल अब बड़े सरकारी आलीशान फ्लैट की जगह छोटे फ्लैट लेंगे…ये ऐलान उन्होंने मीडिया के सामने ऐसे किया…मानो देश के लिए कोई शहादत दे रहे हों…और मीडिया वाले भी इस तथाकथित शहादत के गुनगान में पिल पड़े हैं…अरे भाई चोरी पकड़ी गई तो माल वापिस कर रहे हैं…इसमें खास बात क्या है?? जब चोरी पकड़ी जाती है तो पॉकेटमार भी यही कहता है कि अब पॉकेटमारी नहीं करूंगा!!!

Lalit Kuchalia अब अगर केजरीवाल आम आदमी बन चुके है तो उनकी भलाई इसी में है की वो अपने पहले वाले घर से आना जाना करे वरना देश का मीडिया और देश की जनता कब नीचे गिरा दे ये कभी सपने में में नही सोचेंगे केजरीवाल एंड कंपनी …

Haresh Kumar मीडिया का दबाव – केजरीवाल नहीं रहेंगे सरकारी घर में. इससे पहले पत्रकारों पर सचिवालय में रोक का फैसला वापस लेना पड़ा था. जब आप सादगी की बातें करते हैं तो हकीकत में दिखाना भी होगा. सत्ता में आने पर बड़े-बड़े लोगों को पलटते जनता ने देखा है. अब कार का क्या होगा. ये देखने वाली बात है. उन्हें समर्थन करने वाले लोग ठगे महसूस कर रहे हैं.


मूल खबर:

सच में फ्रॉड निकला अरविंद केजरीवाल…

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