सोनभद्र के चुर्क में पुलिस कप्तान ने एक पत्रकार कम अखबार विक्रेता को महज इस अपराध पर बुरी तरह धुन दिया कि उसने प्रात:भ्रमण से निकले कप्तान को 'चच्चा गोड़ छुईं' कह कर अभिवादन कर दिया था। बाद में रिटायरी पर पैर लटकाये बैठे इस कप्तान ने पत्रकारों के सामने भड़कते हुए जवाब दिया कि इस साले ने मेरे पैर टच करने की हिमाकत की थी, इसीलिए मैंने उसे उसकी औकात बता दिया। बहरहाल, इस घटना को लेकर पूरे जिले में भारी चर्चा छेड़ चुकी है। खबर है कि अब लोग इस कप्तान की बाकी करतूतों का अनावरण करने पर भी आमादा हैं।
वाकया है सोनभद्र जिले के मुख्यालय चुर्क का जहां आजकल पुलिसिया आतंक की नयी-नयी इबारतें दर्ज की जा रही हें। इसी क्रम में शुक्रवार की सुबह पुलिस के उत्पात का एक और नमूना सामने आया। सुबह-सुबह पुलिस कर्मियों ने अखबार बांटने निकले विक्रेता के किसी अंदाज से चिढ़कर उसे पकड़ लिया और मिलकर जमकर धुनाई कर दी। भुक्तभोगी के आरोप के अनुसार उसने पीटने वालों में खुद कप्तान भी शामिल थे।
भुक्तभोगी राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के सहिजन खुर्द निवासी विनय कुमार यादव (25) अखबार विक्रेता है। उसे खबरों को समझने और बयान करने की तमीज है, इसीलिए वह अखबार बांटने के साथ ही पत्रकारिता भी करता है। सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार की अलस्सुबह अखबार का वितरण कर साइकिल से घर लौट रहा था। अभी विनय यादव प्राथमिक विद्यालय रौप के पास पहुंचा, कि पांच कांस्टेबलों की सुरक्षा में टहलने निकले पुलिस कप्तान रामबहादुर यादव मार्निंग करते दिख गये। दरअसल, पुलिस के शोषक और डरपोंक अफसरों की भाषा में यह इलाका नक्सल गतिविधियों की गतिविधियों से प्रभावित माना जाता है। इसीलिए रामबहादुर यादव पूरे फौज-फाटे के साथ घर के बाहर निकलने की हिम्मत जुटा पाते हैं। दीगर बात है कि इसके पहले यहां रह चुके सुभाष दुबे समेत अधिकांश पुलिस अधिकारी ऐसे सुरक्षा घेरों को अनावश्यक मानते रहे हैं, लेकिन रामबहादुर यादव ने इसे अपनी जिन्दगी दांव पर लगाना उचित नहीं समझा।
बताते हैं कि जैसे ही कप्तान साहब के पास विनय यादव गुजरा, उसने कप्तान को 'चच्चा गोड़ छुईं' कह कर उनका अभिवादन कर दिया। बस, इसी पर कप्तान बिगडैल सांड़ की तरह भड़क गये और हांफते हुए खुद विनय की ओर लपके और सुरक्षा में लगे कांस्टेबलों को भी ललकार दिया। इसके पहले कि विनय कुछ समझ पाता, आनन-फानन विनय को रोक लिया गया। कप्तान से सबसे पहले तो विनय के पिछवाड़े पर एक लात मारी, लेकिन बुढापे के असर के चलते वे खुद ही सड़क पर लुढक गये। इससे से बूढ़े कप्तान का गुस्सा सातवें आसमान तक पहुंच गया। सिपाहियों को लाइी लेकर जुटने का हुक्म देकर विनय की ठुकाई करने का आदेश दिया। जितनी भी गालियां दे सकते थे, कप्तान ने विनय को दे दिया। फिर पुलिस चौकी पर लाद कर ले गये। बोले: यह मादर—- बहुत बोलता है, इसकी —–में घुसेड़ दो पूरा का पूरा डंडा। हो।
बाद में पत्रकारों ने इस हादसे पर कैफियत पूछनी चाही तो कप्तान का जवाब था: यह साला अहीरना कर रहा था मुझसे। बोला था गोड़ पकड़ूंगा। अब सुना तो इसकी औकात कि यह मेरा पैर दबोचेगा।
आपको बता दें कि पूरे पूर्वांचल समेत पूरे मध्य उत्तर प्रदेश में अपने से बड़ी हैसियत वाले किसी को सम्मान देने के लिए गोड़ लागूं, गोड़ धरीं, पायं लागू, पायं छुईं जैसे अभिवादन प्रचलित हैं। और खासकर नक्सलप्रभावित और आदिवासी बहुल इलाकों में इन्हीं शब्दों से अभिवादन किया जाता है। अब लगता है कि यादव कप्तान को किसी अहीर पत्रकार-हॉकर का सम्मान लेना अपने सम्मान के खिलाफ लगता है। अरे आप देख-सुन रहे हैं ना अखिलेश यादव जी…
लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर की रिपोर्ट.





