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बाबर मियां विधायक बनने लायक हैं या नहीं?

बदायूं। मीर हादे अली उर्फ बाबर मियां। यह नाम आज कल जनपद की राजनीति में चर्चा में है, क्योंकि इस युवा को बहुजन समाज पार्टी ने सहसवान विधान सभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया है। जातिगत आंकड़ों को देखते हुए राजनीति के जानकारों को कहना है कि सहसवान से विधायक बनने के सशक्त दावेदार भी हैं। दावेदारी कितनी सशक्त है?, इसका फैसला चुनाव बाद हो ही जायेगा, पर फिलहाल बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि ऐसे व्यक्ति जनप्रतिनिधि होने चाहिए या नहीं। हालांकि यह फैसला जनता को ही करना है, लेकिन सवाल बाबर मियां के गुजरे कल को देखते हुए उठाया जा रहा है।

बदायूं। मीर हादे अली उर्फ बाबर मियां। यह नाम आज कल जनपद की राजनीति में चर्चा में है, क्योंकि इस युवा को बहुजन समाज पार्टी ने सहसवान विधान सभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया है। जातिगत आंकड़ों को देखते हुए राजनीति के जानकारों को कहना है कि सहसवान से विधायक बनने के सशक्त दावेदार भी हैं। दावेदारी कितनी सशक्त है?, इसका फैसला चुनाव बाद हो ही जायेगा, पर फिलहाल बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि ऐसे व्यक्ति जनप्रतिनिधि होने चाहिए या नहीं। हालांकि यह फैसला जनता को ही करना है, लेकिन सवाल बाबर मियां के गुजरे कल को देखते हुए उठाया जा रहा है।

बाबर मियां के बारे में सभी को पता है कि वह शिकार के बेहद शौकीन हैं और इस शौक के कारण वह फंस भी चुके हैं। घटना 23 अक्टूबर 2010 की है। उघैती थाना क्षेत्र में स्थित जरारा के जंगल में वह अपने कई साथियों के साथ शान से शिकार कर रहे थे। आरोप था कि उन्होंने अपने स्वाद और शौक के लिए एक नीलगाय को दौड़ा-दौड़ा कर मारा और मारने के बाद सिर अलग कर फेंक दिया।

बाकी मृत शरीर अपनी गाड़ी में रख कर चलने ही वाले थे कि तब तक दर्जनों ग्रामीणों ने उन्हें और उनके साथियों को घेर लिया। बताया जाता है कि ग्रामीणों द्वारा विरोध करने पर वह और उनके साथी ग्रामीणों को ही हडक़ाने लगे, तो ग्रामीण का सब्र भी जवाब दे गया। मौके पर भारी संख्या में आ चुके ग्रामीणों ने उन पर हमला बोल दिया। भीड़ का आक्रोश भांपते हुए सभी लोग गाडिय़ां छोड़ कर भागने लगे तो ग्रामीणों ने दौड़ा कर पीटे। असलाह भी छीन लिये और बाद में उघैती थाना पुलिस के हवाले कर दिये गये। पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर नीलगाय के शव का पोस्टमार्टम कराया।

अब बताया जा रहा है कि सैकड़ों लोगों के सामने हुई घटना में पुलिस ने एफआर लगा दी है। खैर, एफआर पर भी न्यायालय निर्णय लेगा और जो कार्रवाई होगी, वह सामने आयेगी। अब सवाल यह है कि बाबर मियां विधायक बन गये तो जनता का भला करेंगे या बुरा, साथ ही सत्ता भी आ गयी, तब क्या करेंगे? सवाल बेवजह नहीं उठ रहा है, पर जवाब जनता को देना है और उसी पर छोड़ते हैं, क्योंकि लोकतंत्र में जनता का निर्णय सबसे बड़ा होता है और वह सर्वमान्य ही होना चाहिए।

ये बीपी गौतम के विचार हैं.

राजनीति और राजनेताओं को आप हर वक्त गरियाते हैं लेकिन चुनाव के वक्त क्यों चुप्पी साध जाते हैं? खुलकर कहिए न कि आपकी नजर में कौन विधायक होने लायक नहीं है और क्यों नहीं है. आप अपनी भड़ास, अपने विचार [email protected] पर मेल कर सकते हैं.

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