आई नेक्स्ट के 13 एडीशन में से पटना ही एक ऐसा किला था जो पिछले पांच साल तक सुरक्षित था, लेकिन वह भी पिछले साल ध्वस्त हो गया. यहां एक के बाद एक 11 लोगों ने आई नेक्स्ट को अलविदा कह दिया.
इसकी शुरूआत सब एडीटर पारुल प्रसून से हुई. लांचिंग के बाद से रवि प्रकाश के इंचार्ज रहने तक आई नेक्स्ट में टीम बनी रही, लेकिन उसके बाद के अधिकारी टीम को टूटने से नहीं रोक पाएं.
रिपोर्टर से सब एडीटर बने पवन प्रकाश ने दैनिक भास्कर ज्वाइन किया. रिपोर्टिंग में सबसे मजबूत पीलर थे सुधीर. उन्होंने भी हिन्दुस्तान ज्वाइन कर लिया है. सुधीर की स्पोर्टस और आर्थिक बीट में मजबूत पकड़ है. बीते दिनों उन्हें रेल की जिम्मेवारी दी गई थी. तब उन्होंने कई खबरें ब्रेक की थी.
जब आई नेक्स्ट में कोई मामला फंसता तो सुधीर को ही पूरा करने के लिए दिया जाता था और वे उसे बखूबी पूरा करते थे. पवन और सुधीर के झटके से आई नेक्स्ट उबरा नहीं था कि रिंकू झा ने प्रभात खबर का दामन थाम लिया. रिंकू लोअर एजुकेशन में मजबूत मानी जाती थी. इंचार्ज से उनके मतभेद की बातें हमेशा सामने आती थी. तीनों के जाने के बाद रिपोर्टिंग में एक मात्र पुराने आदमी शशी रमण बच गए हैं.
वे भी हिन्दुस्तान, दैनिक भास्कर में चक्कर काटने के बाद प्रभात खबर में जुगाड़ लगाने की कोशिश कर रहे हैं. इससे पूर्व आई नेक्स्ट के सभी एडीशन में टीम बहुत पहले ही टूट चुकी थी. आई नेक्स्ट पटना से अबतक सब एडीटर पारुल प्रसून, फोटोग्राफर मनीष सिन्हा, शैलेंद्र कुमार, सब एडीटर पवन प्रकाश, रिपोर्टर सुधीर कुमार, रिंकू झा और ले आउट आर्टिस्ट मनोज जा चुके हैं.
नए लोग उनकी कमी पूरी कर पाने में अभी तक सफल नहीं हो पा रहे हैं. टीम टूटने की पीछे आई नेक्स्ट के नंबर दो अधिकारी के रूखे व्यवहार और पक्षपात करने की बातें सामने आ रही हैं.