बीते रविवार 5 जनवरी को तापमान करीब 5.5 डिग्री था. कड़ाके की इस ठंड में एक खबर ने अजमेर के पीआरओ साब माफ कीजिएगा असिस्टेंट डायरेक्टर, पब्लिक रिलेशन ऑफिसर के पसीने छुड़ा दिए. फोन पर फोन आए जा रहे थे और पीआरओ साहब सबको सफाई दिए चले जा रहे थे.
गफलत हुई एक लोकल केबल चैनल से. उसने एक खबर चला दी जिसका स्क्रोल रोल था, ‘पीआरओ ने दी जान’, हैडिंग के बाद किसी को समझाने की जरूरत नहीं थी कि पता नहीं कैसे क्या हालात हो गए कि बेचारे पीआरओ को आत्म हत्या करनी पड़ गई. इसी शहर में पला-बड़ा, पढ़ा-पत्रकार बना, एपीआरओ बना और उसी कुर्सी पर एपीआरओ बना रहा, पीआरओ बना और उसी कुर्सी पर पीआरओ बना रहा, डिप्टी डायरेक्टर बना और उसी कुर्सी पर डिप्टी डायरेक्टर बना रहा, असिस्टेंट डायरेक्टर बना और उसी कुर्सी पर असिस्टेंट डायरेक्टर बना रहा.
मोहनलाल सुखाडिया, हरिदेव जोशी, माथुर, अशोक गहलोत, वसुंधरा राजे जैसे कई मुख्यमंत्री, उनके जनसंपर्क मंत्री, अजमेर के कलेक्टर, सांसद, विधायक आए और गए. पीआरओ उसी कुर्सी पर जमे रहे फिर ऐसा क्या हो गया कि जान दे दी. जिंदगी में जो ले सकते थे लिया, जो पा सकते थे पाया, जो मिल सकता था मिला. फिर ऐसा क्या हुआ कि जान दे दी. किसी के समझ में नहीं आया. मोबाइल की घंटियां घनघना उठीं. इधर एक और नई मुसीबत. जिला कलेक्टर ने बुलाकर ठंड के कारण स्कूलों में छुट्टी की खबर थमा दी.
साथ ही हिदायत दी कि सब अखबारों में छपनी चाहिए वरना कल सुबह बच्चे और उनके मां-बाप परेशान होंगे. रविवार का दिन था. छुट्टी के दिन प्रेस नोट निकालते नहीं हैं. सो बेचारे खुद लगे पत्रकारों को फोन पर खबर बताने. पत्रकार लोग खबर लें बाद में हाल-चाल पूछें पहले. चलो पत्रकारों को तो बात समझ में आ गई. रिशतेदारों और सरकारी अफसरों को समझाना भारी पड़ गया. एक-एक को केबल न्यूज चैनल की तकनीक समझाई. बताया कि चैनल को लिखना था, ‘पीआरओ ने दी जानकारी’ और चैनल सिर्फ इतना ही लिखकर रह गया कि, ‘पीआरओ ने दी जान’.
लेखक राजेंद्र हाड़ा राजस्थान के मीडिया विश्लेषक हैं. उनसे संपर्क 09549155160 या 09829270160 के जरिए किया जा सकता है.





