उत्तराखंड ही देश का शायद ऐसा राज्य होगा, जहां का सूचना महानिदेशक अपनी तैनाती से लेकर आज तक किसी भी पत्रकार को नहीं मिला होगा और न ही उसने किसी पत्रकार का फोन उठाया होगा. उत्तराखंड में सूचना महानिदेशक आर. मिनाक्षी सुंदरम एक ऐसे सूचना महानिदेशक है, जिनके पास मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण में वीसी के पद सहित सिडकुल जैसे महत्वपूर्ण विभाग हैं. वहीं दूसरी तरफ इसी विभाग के सचिव बंसीधर तिवारी को भी सूचना विभाग का ओएसडी बना दिया गया है.
ये दोनों ही अधिकारी राज्य के पत्रकारों से इस तरह पेश आते हैं, जैसे की वे एमडीडीए के ठेकेदार हों. अपनी तैनाती से लेकर आज तक वे सूचना निदेशालय में बैठने के बजाय सूचना निदेशालय को मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण के कार्यालय से चला रहे हैं. जिससे राज्य के पत्रकारों में रोष है. कुछ चुनिंदा तथाकथित पत्रकार जो एमडीडीए की दलाली करते हैं, वे जरूर इनके आस-पास मंडराते नजर आते हैं, लेकिन एक कर्तव्य निष्ठ पत्रकार इनसे बात करना भी पसंद नहीं करता.
सूचना निदेशालय के कुछ अधिकारियों की अंगुली पर नाचने वाले ये दोनों अधिकारी पत्रकारों को दोयम दर्जे का नागरिक समझते हैं. खबरों के अनुसार महानिदेशक आर. मिनाक्षी सुंदरम बीते कुछ दिन पूर्व मुख्यमंत्री के पास इसलिए गए कि वे सूचना महानिदेशक का पद छोड़ना चाहते थे, लेकिन मुख्यमंत्री ने उन्हें यह लताड़ कर भगा दिया कि मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण और सिडकुल जैसे विभाग के साथ आपको सूचना निदेशालय इसलिए दिया गया है, ताकि आप मीडिया पर काबू रख सको, लेकिन आप तो मैदान छोड़कर भाग रहे हो.
लेखक राजेन्द्र जोशी उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकार हैं. उनसे संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है.





