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दिल्ली

प्रियंका के सहारे कांग्रेस की नैय्या!

महंगाई, भ्रष्टाचार, घोटालों की धड़ल्ले से दुकान चलाने के बाद अब शटर गिरने के डर से कांग्रेसी महकमे में खलबली मची हुई है। मोदी बनाम राहुल के चल रहे शीत  युद्ध में मोदी भारी पड़ रहे हैं। इससे घबराई कांग्रेस मोदी से लोहा लेने में राहुल की मदद के लिए उनकी बहन को पिछले दरवाजे से प्रवेश कराने में लगी हुई है। यह तो तय है कि आने वाले लोकसभा चुनाव में प्रियका के बलबूते कॉंग्रेसी चुनावी नैय्या पार करने की जुगत में लगे हुए हैं जिसकी बानगी के रूप प्रियंका दवारा ली गई मीटिंग को देखा जा रहा है।

महंगाई, भ्रष्टाचार, घोटालों की धड़ल्ले से दुकान चलाने के बाद अब शटर गिरने के डर से कांग्रेसी महकमे में खलबली मची हुई है। मोदी बनाम राहुल के चल रहे शीत  युद्ध में मोदी भारी पड़ रहे हैं। इससे घबराई कांग्रेस मोदी से लोहा लेने में राहुल की मदद के लिए उनकी बहन को पिछले दरवाजे से प्रवेश कराने में लगी हुई है। यह तो तय है कि आने वाले लोकसभा चुनाव में प्रियका के बलबूते कॉंग्रेसी चुनावी नैय्या पार करने की जुगत में लगे हुए हैं जिसकी बानगी के रूप प्रियंका दवारा ली गई मीटिंग को देखा जा रहा है।

कांग्रेस की चुनावी रणनीति को धार देने के लिए अब प्रियंका गांधी भी मैदान में कूद पड़ी हैं। उन्होंने आज कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के साथ पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी के घर पर बैठक की। बैठक में क्या बातें हुईं, इस पर कांग्रेस ने कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं दिया है। लेकिन सूत्रों की मानें तो इस बैठक की अध्यक्षता प्रियंका गांधी ने ही की। सूत्रों के मुताबिक बैठक में कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर चर्चा हुई।

12 तुगलक लेन पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का घर है। घर के बाहर मंगलवार को अचानक गहमागहमी दिखी। मीडिया का जमावड़ा बढ़ गया। खबर आई कि प्रियंका गांधी एक अहम बैठक कर रही हैं। ये बैठक कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की गैरमौजूदगी में हो रही थी। सबसे पहले सवाल उठा प्रियंका ने कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की बैठक क्यों बुलाई? आखिर इस बैठक में राहुल गांधी क्यों नहीं हैं? जल्द ही इस सवाल का जवाब भी मिल गया। सूत्रों की मानें तो इस बैठक की अध्यक्षता प्रियंका ने ही की। मीडिया की दिलचस्पी उस वक्त और बढ़ गई जब बैठक में शामिल होने वाले नेताओं की लिस्ट सामने आई।

प्रियंका की बैठक के लिए 12 तुगलक लेन पहुंचने वालों में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल, कांग्रेस के महासचिव जनार्दन द्विवेदी, ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश, गुजरात के बड़े कांग्रेसी नेता और उत्तर प्रदेश के प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री, कांग्रेस के मीडिया प्रभारी अजय माकन और राहुल गांधी की कोर टीम के सदस्य मोहन गोपाल शामिल थे।

इस बैठक में प्रियंका सबसे पहले पहुंचीं, बैठक डेढ़ से दो घंटे तक चली, लेकिन सवाल सबसे बड़ा था कि आखिर इस बैठक का एजेंडा क्या था? सवाल ये भी उठ रहा था कि क्या ये बैठक इस बात की ओर संकेत है कि प्रियंका सक्रिय राजनीति में आ रही हैं? क्या कांग्रेस में अब प्रियंका भी अहम रणनीतिकार होंगी? वैसे, इस बैठक के बारे में कोई भी कांग्रेसी नेता खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं हुआ।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रियंका ने कांग्रेस नेताओं से 2014 के लोकसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा की। हालांकि एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता का ये भी कहना था कि प्रियंका ने अपनी बात और रणनीति अमेठी और रायबरेली तक ही सीमित रखी। सूत्रों के मुताबिक प्रियंका की बातचीत इस बात पर केंद्रित थी कि राहुल गांधी की चुनावों में किस तरह से मदद की जाए। कांग्रेसी सूत्रों के मुताबिक प्रियंका ने अभी भी रायबरेली, अमेठी या कहीं और से चुनाव लड़ने का मन नहीं बनाया है। वो फिलहाल सिर्फ अमेठी और रायबरेली में चुनाव प्रचार और प्रबंध की जिम्मेदारियां संभालेंगी।

सवाल ये है कि आखिर इस बैठक को लेकर इतनी गोपनीयता क्यों बरती गई? ये सवाल तब ज्यादा गंभीर हो गया जब बैठक के बाद प्रियंका चुपचाप 12 तुगलक रोड के इस घर के पिछले गेट से निकल गईं। घर के बाहर खड़ा मीडिया उनका इंतजार करता रह गया। ना सिर्फ प्रियंका, बल्कि बैठक में शामिल किसी कांग्रेसी दिग्गज ने मीडिया के कैमरों का सामना नहीं किया।

कांग्रेस कार्यकर्ता या नेता अक्सर पोस्टर लगाकर, नारे लगाकर ये मांग करते रहते हैं कि प्रियंका सक्रिय राजनीति में आएं। लेकिन प्रियंका लगातार खुद इससे इनकार करती रहती हैं। लेकिन मंगलवार को जिस तरह से उन्होंने कांग्रेसी नेताओं के साथ बैठक की उससे एक बार फिर इस मांग को बल मिलने की उम्मीद है। हालांकि अभी भी कांग्रेस सूत्र यही कहते रहे कि वो सिर्फ राहुल के पीछे ही खड़ी रहेंगी। उनकी इच्छा सक्रिय राजनीति से दूर रहकर सिर्फ अपने भैया राहुल की मदद करने की है।

वैसे, प्रियंका की रायबरेली से चुनाव लड़ने की खबरें भी हैं। खासतौर पर सोनिया गांधी की बीमारी के बाद ये चर्चा तेज है। बाहरहाल, प्रियंका चुनाव भले ना लड़ें, लेकिन इसमें शक नहीं कि वे इस बार के लोकसभा चुनाव में कहीं ज्यादा सक्रिय रहेंगी। पार्टी अपनी रणनीति बनाने में उनकी राय को खास तवज्जो देगी। राहुल के घर दिग्गज कांग्रेसी नेताओं के साथ हुई बैठक इसी शुरुआत का संकेत हो सकती है।

संजय चौहान का विश्लेषण.

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