Anil Kumar Yadav : "आप" के यूपी संयोजक, पुरातन परिचित सुल्तापुर के एक्टिविस्ट संजय सिंह से बड़े दिनों बाद कल मुलाकात हुई. रैशनल लगे जब कहा कि जाति और धर्म के मुद्दे नकली हैं हम असली मुद्दे उठाएंगे. नखलऊ का कॉफी हाउस देर तक तालियों से गूंजता रहा जब उदाहरणों के साथ उन्होंने बताया कि मेनस्ट्रीम की पार्टियां जब सत्ता का केक खाना हो बेहिचक भाजपा के साथ चली जाती है और जब जरूरत हो तो सांप्रदायिकता विरोध का नाटक करने लगती हैं.

लेकिन तालियों की गूंज अभी हवा में ही ठहरी थी कि संजय शिया धर्मगुरू मौलाना कल्बे जवाद से मिलने उनके घर पहुंच गए. क्या यह वैसी ही रस्म थी जो मेनस्ट्रीम पार्टियों के नेता मुसलमानों की ओर देखते हुए चुनाव के वक्त निभाते हैं या कुछ और? आशा है संजय बताएंगे।
नवभारत टाइम्स, लखनऊ में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार अनिल यादव के फेसबुक वॉल से.





