यूपी में राज कर रहे यादव बंधुओं में से एक रामगोपाल यादव ने मीडिया वालों को खुलेआम धमकी दी है कि उन्हें सबक सिखाया जाएगा और जेल भेजा जाएगा. ऐसा इसलिए क्योंकि मीडिया वालों ने खबर छापा व दिखाया कि सपा के एक विधायक के घर से अपहृत किशोरी बरामद हुई. यूपी की पुलिस और खुद रामगोपाल ने विधायक को क्लीनचिट देने के बाद खबर छापने दिखाने वालों को एजेंडे पर ले लिया है.
अपने पुत्र के चुनाव क्षेत्र फिरोजाबाद में प्रचार के वास्ते पहुंचे सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने मीडिया को निशाने पर लिया. सिरसागंज से विधायक हरिओम यादव को क्लीन चिट देते हुए कहा- मीडिया दुष्प्रचार कर रहा है, विधायक का चरित्र हनन किया जा रहा है. धमकाने वाले अंदाज में उन्होंने कहा, मई के दूसरे हफ्ते में अखबारों और चैनलों पर मुकदमा किया जाएगा, जिम्मेदार लोगों की जमानत भी नहीं होने दी जाएगी.
रामगोपाल ने कहा कि 1977 में प्रदेश सरकार में मुलायम सिंह सहकारिता मंत्री बने थे. उस वक्त मुलायम सहित पूरे परिवार पर काली कमाई समेत कई आरोप लगाए. मुंबई और एक लखनऊ के समाचार पत्र ने इन्हें प्रकाशित किया था. इनमें एक मालिक ने छह माह जेल काटी थी और दूसरे को हार्ट अटैक हो गया.
उन्होंने कहा कि विधायक हरिओम के खिलाफ अखबारों और चैनलों में गलत दिखाया जा रहा है, उनके खिलाफ मई के दूसरे सप्ताह में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा. मुकदमे के बाद आरोपी जेल जाएंगे और जमानत भी नहीं होने दी जाएगी. इसके लिए अखबार और चैनलों के मालिक मुल्जिम नंबर एक और बाद वाले दूसरे नंबर पर होंगे. उल्लेखनीय है कि आगरा से अगवा एक किशोरी ने विधायक के शिकोहाबाद स्थित आवास में खुद को रखे जाने की बात कही है. वहीं से खुद के बरामद होने की जानकारी दी है. इसी के बाद से विधायक हरीओम चर्चा में हैं.
उधर, इस खुलेआम धमकी के बाद भी मीडिया वाले चुप्पी साधे हुए हैं. मीडिया के नाम पर बने संगठनों, संपादकों के संगठनों, पत्रकारों के संगठनों, मीडिया मालिकों के संगठनों को अब कतई नहीं लग रहा कि रामगोपाल का बयान अभिव्यक्ति की आजादी पर कुठाराघात है. क्यों? सिर्फ इसलिए कि रामगोपाल एक बड़े प्रदेश के सत्ताधारी सरकार के कुनबे का प्रभावशाली नेता है और इस सरकार से मीडिया मालिकों व मीडिया वालों को काफी कुछ फायदा पहुंचता मिलता है? अगर वाकई दम हो तो पत्रकार संगठनों और मीडिया संगठनों को रामगोपाल की धमकी का मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए.
वैसे, मेरी निजी सलाह रामगोपाल को है कि मीडिया वालों को सबक सिखाने, जेल भेजने, जमानत न होने देने जैसी बातों में दिमाग लगाने की जगह लोकसभा के चुनाव और यूपी में सुशासन पर ध्यान लगाओ. ऐसा न हो कि लोकसभा तो हाथ से जाए ही जाए, अगली दफे यूपी के विधानसभा में तुम लोगों का अता-पता भी न चले.
और हां, रामगोपाल यादव, सुन ले, मैंने भी भड़ास पर खबर छाप रखी है कि सपा के विधायक के घर से अपहृत किशोरी बरामद हुई… मुझे भी गिरफ्तार करा लेना और जमानत न होने देना…
समय बड़ा क्रूर होता है प्रोफेसर. आज सत्ता के मद में पगलाए कुछ भी बोले कहे जा रहे हो, बिना अपने गिरेबां में देखे कि जनता से क्या वादा किया था और यूपी में हो क्या रहा है. बाकी, ये बड़ा आसान काम होता है किसी को पकड़ लेना, जेल में डाल देना, जमानत न होने देना. मुश्किल काम होता है जनता को राहत देना, गुंडों- भ्रष्टों को पकड़ना, अपने पार्टी व शासन के करप्टों को दंडित करना. खैर, विनाश काले विपरीत बुद्धि.
लेखक यशवंत सिंह भड़ास4मीडिया के एडिटर हैं. उनके संपर्क 9999330099 या [email protected] के जरिए किया जा सकता है.
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