Arvind K Singh : आशुतोष की राजनीतिक पारी पर कुछ बात… राजनीतिक गर्द-गुबार में बहुत मौकों पर पत्रकार भी राजनेता बनने को उतावले हो जाते हैं… चंदूलाल चंद्राकर से लेकर एमजे अकबर तक तमाम लोग इसके उदाहरण रहे हैं… लेकिन राजनीति में उनका क्या हश्र हुआ है शायद उनको करीब से देखने वाले जानते हैं…
शायद पत्रकारिता में अपनी बातें कहने की जितनी गुंजाइश है वैसी राजनीति में नहीं है…. फिर भी राजनीति का भूत जब सिर पर सवार होता है तो हो ही जाता है…. लेकिन पत्रकारों के भीतर का इगो कभी उनको बेहतर राजनेता नहीं बना पाता….उसके लिए तो जोंक सा चरित्र होना चाहिए.. आशुतोषजी नयी पारी शुरू कर रहे हैं राजनीति की.. ऐसी पार्टी से जिसे अभी पार्टी बनना है.. फिर भी मेरी शुभकामनाएं कि वे पत्रकारिता के अपने अतीत को भुला कर एक अच्छे राजनेता बनें…
Sanjay Tiwari : आंदोलन से उभरी राजनीति के आकर्षण में जब कोई पत्रकार राजनीति में जाता है तो उसका संतोष भारतीयकरण हो जाता है। न राजनीतिज्ञ बन पाता है और न ही पत्रकार रह जाता है।
Zafar Irshad : गरीब पत्रकारो की पूछ सिर्फ "आप पार्टी " में ही हो रही है…मनीष सिसोदिआ–शज़िआ इल्मी–राखी बिड़ला के बाद अब सीनियर पत्रकार आशुतोष…आखिर दूसरी पार्टियां क्यों नहीं सोच रही है, पत्रकारों के बारे में.?.क्या मैं भी इस जमात में शामिल हो जांऊ, 20 साल से पत्रकार हूँ, पढ़ा लिखा हूँ, 4 प्रोफेशनल डिग्री है, नेता जैसा दिखता भी हूँ, और सबसे बढ़ी खासियत दबे कुचले मुस्लिम समाज से हूँ, जिसके 10 नंबर अलग से मिलेंगे हमें…फिर एक ज्योतिषी ने भी कहा था कि तुम्हारे हाथ में राज योग लिखा है ज़फर…बस पास में पैसा नहीं हैं, क्या राय है आपकी सुबह से मन कुलबुला रहा है…
अरविंद कुमार सिंह, संजय तिवारी और जफर इरशाद के फेसबुक वॉल से. भड़ास4मीडिया तक अपनी बात पहुंचाने के लिए इस मेल आईडी पर मेल करें: [email protected]





