रुद्रपुर (उत्तराखंड)। वर्तमान में समाज की सोच में जबरदस्त बदलाव आया है। पेशे की नैतिकता की बातें बेमानी हो गई हैं और हर कोई अधिक से अधिक धन, संपत्ति और आनंद लूट लेना चाहता है। अधिकांश पत्रकार भी बहती गंगा में हाथ धोने की तर्ज पर नैतिकताओं को धता बताते हुए खूब खा-कमा रहे हैं। उत्तराखंड में ऊधम सिंह नगर जिला मुख्यालय ‘रुद्रपुर’ में भी अधिकतर पत्रकार भूमि कब्जाकर मकान बनाने, बड़े लोगों/कंपनियों के गलत कामों की खबरों को दबाकर नोट पीटने में लगे हैं।
कुछ स्थानीय और कुछ बाहर से पिछले कुछ सालों में आये पत्रकारों की निरंतर बढ़ती संपत्ति इसका प्रमाण है। कुछ पत्रकार खबरें तो बहुत कम लिखते हैं उनका मुख्य काम सौदेबाजी करने, उपहार एकत्र करने और सुविधाएं जुटाने का है। यहां सबसे ज्यादा लूट जमीन की मची है। अधिकांश क्षेत्रीय नेता या उनके लगुए-भगुए जमीनें कब्जाने, बिकवाने, खरीदवाने आदि में लगे हैं। प्रशासन के लोग भी इस लूट का फायदा उठा रहे हैं। मीडिया के अधिकतर लोग इन्हीं के साथ हैं ऐसे में जमीनों से संबंधित नियम-कानून अपने फायदे और नुकसान के हिसाब से तोड़े-मरोड़े जा रहे हैं। यह केवल स्थानीय स्तर का ही मामला नहीं है, इसमें देहरादून तक शासन और प्रशासन में शामिल लोगों की भूमिका कहीं न कहीं है, क्योंकि तमाम शिकायतों के बावजूद विभिन्न प्रकार की सरकारी जमीनों को भारी पैमाने पर खुर्द-बुर्द किया जाना जारी है और कहीं से कोई कार्यवाही नहीं हो रही।
विगत दिनों रामपुर रोड स्थित होटल सोनिया के निकट एक सरकारी जमीन पर भूमाफियाओं ने प्लाटिंग करने के क्रम में तमाम पेड़ काट डाले गये। मामला उछला तो मीडिया को मैनेज करने के लिए बताया जाता है कि एक प्रमुख हिंदी दैनिक के ब्यूरो चीफ को लाखों रुपये दिए गये, जो प्रिंट मीडिया को मैनेज करने के लिए थे। चैनलों को मैनेज करने की व्यवस्था अलग से की गई। पेड़ काटने, जमीन की प्लॉटिंग और नदी पर पुल के मामले में भूमाफिया, पत्रकार और प्रशासन एकमत हैं यह इस बात से पता चलता है कि पुल अपनी जगह पूर्ववत् सही सलामत है लेकिन मीडिया में बड़े प्रमुखता से बताया गया कि पुल ध्वस्त कर दिया गया है और कि मामले में एडीएम ने सख्त रुख अपनाया है। जबकि जमीन पर प्लॉटिंग और विक्रय जारी है, माफियाओं के कारिंदे जमीन पर कुर्सी-मेज डाले दिन भर बैठे रहते हैं।
पत्रकारों की कार्यशैली पर उठते सवालों के बीच यह भी बात अक्सर होती है कि यहां माल काट रहे पत्रकार अपने बॉसों (संपादक और प्रबंधक) को भी नजराना पेश कर खुश किए रहते हैं, इसलिए प्रबंधन इनके खिलाफ आई शिकायतों पर ध्यान नहीं देता। अमर उजाला के ब्यूरो चीफ की कारगुजारियों के संबंध में एक शिकायत पत्रकार केपी गंगवार ने अमर उजाला के मालिक राजुल माहेश्वरी सहित कई जगह भेजी है लेकिन कहीं से कोई कार्यवाही नहीं हुई, उनका पत्र नीचे संलग्न है। सर्वाधिक दिक्कत उन पत्रकारों को होती है जो किसी के लेने-देने में नहीं हैं लेकिन सबको हिस्सा देने के नाम पर चंद लोग पूंजीपतियों से मोटा पैसा ले लेते हैं। इससे सीधे-साधे पत्रकार मुफ्त में बदनाम होते हैं। चर्चा तो कई बार यह भी होती है कि यह सौदेबाज पत्रकार दूसरों को क्या छोड़ेंगे जब अपने स्टाफ के लिए आये उपहार तक यह गायब कर देते हैं। पूरे जिले में ही पत्रकारों ने नेताओं, माफियाओं, प्रशासनिक अफसरों/कर्मचारियों, कारोबारियों, उद्योगपतियों आदि से मधुर संबंध बना रखें हैं और सब एक दूसरे को फायदा पहुंचाने में लगे हैं। नियम-कानून प्रायः कागजों तक सीमित रह जाते हैं। लिखित शिकायतें जांच के नाम पर यहां-वहां धक्के खाती रहती हैं।
प्रेषक- अयोध्या प्रसाद ‘भारती’ रुद्रपुर (उत्तराखंड)।
सेवा में,
श्रीमान राजुल माहेश्वरी जी,
प्रबन्ध निदेशक,
अमर उजाला, नोएडा।
विषयः- जनपद ऊधमसिंह नगर (उत्तराखण्ड) के अमर उजाला प्रभारी श्री अनुपम सिंह के कार्यकलापो के सम्बन्ध में।
महोदय,
अमर उजाला की छवि को धूमिल करते हुए पूर्व में श्री फणीन्द्र नाथ गुप्ता ने अमर उजाला के नाम पर लाखों रूपये अवैध रूप से लिये जिसकी पुष्टि होने के बाद अमर उजाला ने उनके खिलाफ कार्यवाही की और बाद में श्री अनुपम सिंह को अमर उजाला का प्रभारी बनाया, लेकिन आज भी श्री फणीन्द्र नाथ गुप्ता और श्री अनुपम सिंह मिलकर अमर उजाला के नाम पर लाखों रूपये के बारे न्यारे कर रहे हैं जिसकी जव चाहें दोनो की मोबाइल फोन की काल डिटेल निकाल कर की जा सकती है। अमर उजाला प्रभारी की कुछ कारगुजारियां के बारे में आपको पूर्व में भी शिकायत के रूप मे भेजी गई है लेकिन कोई कार्यवाही नही हुई। एक बार पुनः आपको क्रमवार शिकायत की जा रही है जिसकी आप पुष्टि कर सकते हैं।
1. अमर उजाला के एक हॉकर श्री शम्भू नाथ द्वारा नगर निगम रूद्रपुर की कल्याणी नदी के किनारे सरकारी नजूल की भूमि पर कब्जा कर उसे बेचा जाता है जिसकी रकम का बटवारा अमर उजाला के कार्यालय मे होता है, उसमें कई लोग हिस्सेदार हैं। ‘मानव कल्याण समिति की जगह पर कब्जा’ सम्बन्धित शिकायती पत्र जिलाधिकारी, ऊधमसिंह नगर को भेजा गया है, जिसकी पुष्टि की जा सकती है।
2. अमर उजाला के प्रभारी श्री अनुपम सिंह द्वारा शहर के उन लोगो को धमकाया जाता है जो विरोध करते है तथा अधिकारियों पर दबाव बनाकर शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्यवाही कराई जाती है, जिसकी पुष्टि महामहिम राज्यपाल महोदय को शहर के आधा दर्जन से अधिक मान्यता प्राप्त पत्रकारों द्वारा भेजे गये शिकायती पत्र से की जा सकती है।
3. अमर उजाला के कार्यालय बनाने के लिए दबाव बनाकर भूमाफियाओं से रजिस्ट्री का एक भूखण्ड लिया गया जिसकी रजिस्ट्री अमर उजाला के प्रभारी अनुपम सिंह की पत्नी के नाम की गयी है। जिसकी पुष्टी किच्छा तहसील से की जा सकती है।
4. यह कि अमर उजाला से प्रभारी द्वारा सोनिया होटल के निकट कुछ भूमाफियाओं के साथ हिस्सेदारी करते हुए एक सीलिंग की जमीन पर अवैध प्लाटिंग शुरू कर दी, इतना ही नहीं अधिकारियों व कर्मचारियों को अमर उजाला के दबाव में लेकर अवैध पुलिया का निर्माण कर दिया गया। इसके अलावा सिलिंग की जमीन में खड़े आम के पेड़ों को काट दिया गया। जब मामला खुला तो शहर के सारे समाचार पत्रों व टीवी चैनलों ने इस खबर को प्राथमिकता से छापा व दिखाया लेकिन सिर्फ उमर उजाला व दैनिक जागरण ने यह खबर भूमाफियों के पक्ष में छापी जिसकी पुश्टि पिछले एक माह स्थानिए समाचार पत्र व समाचार एवं अमर उजाला के समाचार से की जा सकती है।
जब इस मामले में जांच के आदेश हुए तो कई भूमाफियों पर कई मुकदमें दर्ज हुए आम की लकड़ी कब्जे में ली गयी। अवैध कालोनी का गेट तोड़कर कब्जे में लिया गया। अवैध पुलिया को तोड़ा गया तथा मुकद्मा दर्ज किया गया। जिसका समाचार सभी समाचार पत्रों व चैनलों में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया। लेकिन अमर उजाला व दैनिक जागरण ने छोटा सा समाचार भूमफियों के पक्ष में ही लगाया जिसकी पुष्टि 20 दिसंबर से लेकर 29 दिसंबर तक के सभी समाचार व अमर उजाला की तुलना करके की जा सकती है। सभी समाचार पत्रों में लगातार प्रमुखता से यह खबर छपी है और अमर उजाला में सिर्फ एक दिन छोटा सा समाचार भूमाफियों के पक्ष में छपा है। पूरे मामले की जानकारी के लिए आप अपर जिलाधिकारी निधि यादव, तहसीलदार किच्छा, रजिस्टार किच्छा, वन क्षेत्राधिकारी रूद्रपुर एवं (शहर अमर उजाला व जागरण को छोड़कर कर बाकी) सभी समाचार पत्रों के मान्यता प्राप्त पत्रकारों से ले सकते हैं।
महोदय इतना ही नहीं अनुपम सिंह के खिलाफ माननीय मंत्री इन्दिरा इदयेश को एक पत्र दिया गया था जिसकी जांच जिलाधिकारी से करायी जा रही है और उसमें अनुपम सिंह पर दोश भी सिद्व है, लेकिन अमर उजाला के दबाव में प्रशासन चुप बैठा है, अनुपम सिंह के खिलाफ महामहिम राज्यपाल, मुख्य सचिव उत्तराखण्ड शासन सहित दर्जनों शियकते जिला प्रशासन से की गयी है जिसे अनुपम सिंह अमर उजाला की धौंस दिखाकर निबटाने का प्रयास कर रहे हैं। आप चाहे तो आपकों पूर्व मंे भेजे गये शिकायत पत्रों की फोटो प्रति देख सकते हैं या जिला प्रशासन से सम्पर्क कर सकते हैं।
अतः महोदय जी से अनुरोध है कि अमर उजाला की छवि को बचाये रखने के लिए समाचार पत्र के कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार को दूर कर उचित निर्णय ले।
आपकी अति कृपा होगी।
प्रेषक
केपी गंगवार
अध्यक्ष, मानव कल्याण समिति ,
रूद्रपुर, जिला-उधमसिंह नगर।
रुद्रपुर से अयोध्या प्रसाद ‘भारती’ की रिपोर्ट.





