दैनिक जागरण, नोएडा के चीफ सब एडिटर श्रीकांत सिंह ने हिम्मत का काम किया है. उन्होंने अपने शोषण, उत्पीड़न, प्रताड़ना से आजिज आकर आज मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखा है. दैनिक जागरण प्रबंधन के शोषण, उत्पीड़न और अत्याचार के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की शरण लेकर श्रीकांत ने एक मिसाल कायम की है और बहुत से पत्रकारों को रास्ता दिखाया है. पढ़िए वो पत्र जो आयोग को भेजा है…
अध्यक्ष
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
दिल्ली
महोदय,
मैं श्रीकांत सिंह दैनिक जागरण के नोएडा स्थित कार्यालय में 1995 से कार्यरत हूं। इस समय मुख्य उपसंपादक हूं। मुझे तरह-तरह से प्रताड़ित और परेशान किया जा रहा है। प्रताड़ना, वेतनमान में भेदभाव और कार्य का अत्यधिक दबाव बनाए जाने के कारण मुझे एक बार हार्ट अटैक हो चुका है। अब स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं लगातार बढ रही हैं। मधुमेह और अस्थमा से अक्सर परेशान रहता हूं। मेट्रो, कैलाश और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान-एम्स आदि में मेरा इलाज हो चुका है। चिकित्सा सुविधाओं को ध्यान में रखकर नोएडा के सेक्टर-12 में पत्नी और दो बच्चों के साथ किराये के मकान में रह रहा हूं। नौकरी के अलावा मेरी आय का और कोर्इ स्रोत नहीं है। प्रबंधन की भेदभावपूर्ण नीतियों के कारण मेरी आर्थिक सिथति काफी खराब हो चुकी है। कर्ज का बोझ दिनोंदिन बढ रहा है।
प्रताड़ना कुछ ऐसी है कि बिना किसी गलती के किसी न किसी बहाने अनिशिचत काल के लिए फोर्स लीव पर भेज दिया जाता है। अक्सर 15 दिनों की सैलरी काट ली जाती है और परिवार का बजट खराब हो जाता है। कठोर और आपतितजनक भाषा में एसएमएस भेज कर आहत किया जाता है। विरोध करने पर ऐसे स्थान पर तबादला कर दिया जाता है, जहां की जलवायु स्वास्थ्य के प्रतिकूल होती है। हाल ही में मेरा तबादला जम्मू कर दिया गया। इससे पहले भी परेशान करने लिए मुझे पानीपत भेजा गया था, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण नोएडा वापस लाया गया।
एम्स के चिकित्सकों ने काम के अधिक दबाव से बचने का सुझाव दिया था। इसके बावजूद स्थानीय संपादक विष्णु त्रिपाठी ने मुझे लगातार रात्रि पाली में काम करने के लिए बाध्य किया। किशोर झा के जरिये आपत्तिजनक एसएमएस भिजवा कर आहत किया। बिना पर्याप्त कारण के बीमारी की हालत में मेरा तबादला जम्मू करा दिया। अस्थमा, हार्इ ब्लड शुगर और बुखार के कारण मेरे लिए जम्मू में ज्वाइन करना संभव नहीं था। मैंने थोडा समय मांगा, लेकिन कोर्इ सुनवार्इ नहीं की गर्इ। बार-बार जम्मू में ज्वाइन करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इससे पूर्व नौकरी से निकालने की धमकी देकर मजीठिया वेतन बोर्ड से संबंधित कागजात पर हस्ताक्षर करा लिया गया था और दिनोंदिन हमारी आर्थिक हालत को बिगाडने का कुचक्र रचा गया।
इस संबंध में मैंने समय-समय पर प्रधान संपादक संजय गुप्त को अवगत भी कराया, लेकिन उन्होंने इस अत्याचार पर रोक लगाने के लिए कोर्इ कदम नहीं उठाया। जागरण प्रबंधन की ओर से कहा गया कि जम्मू में जान चली जाएगी तो नौकरी छोड दो। इतने दिनों तक समर्पित होकर सेवा करने का सिला अभाव और मुसीबत के रूप में मिला है। मानवाधिकार आयोग से प्रार्थना है कि मेरे जीवन की रक्षा और पुनर्वास के लिए दैनिक जागरण प्रबंधन को उचित निर्देश जारी किया जाए। इस संबंध में हमने महाप्रबंधक नितेंद्र श्रीवास्तव से भी बात की, लेकिन समस्या का कोर्इ समाधान नहीं हुआ। प्रधान संपादक संजय गुप्त को मेल के जरिये समस्या से अवगत कराया, लेकिन उन्होंने कोर्इ कदम नहीं उठाया। समस्या इतनी गंभीर है कि मुझे मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाना पड रहा है।
प्रताड़ित करने वालों के नाम और मोबाइल नंबर इस प्रकार हैं…
1- स्थानीय संपादक विष्णु त्रिपाठी – मोबाइल नंबर-9810109481
2- समाचार संपादक किशोर झा – मोबाइल नंबर-9717096012
This notice has been sent to Editor in chief Dainik Jagran Mr. Sanjay Gupta.
From: [email protected]
CC:[email protected]; [email protected]
Subject: NOTICE
Date: Tue, 7 Jan 2014 05:29:55 +0000
Respected Sir,
I am being mentally tortured continuously by News Editor Mr. Kishor Jha and Resident Editor Mr. Vishnu Tripathi. The promotion, increment and transfer policies of the organisation is against my physical and economic health. If any relief will not be provided by you, then I will be bound to take the help of related organisations like, NATIONAL HUMAN RIGHTS COMMISSION and SUPREME COURT.
Thanking You
Shrikant Singh
Chief Sub Editor
Dainik Jagran, Noida.
Mob. 99111 24356.






