Madan Tiwary : बैक अप अखिलेश, हम तुम्हारे साथ हैं। सैफ़ई महोत्सव में 300 करोड़ खर्च हुये? अबे जागरण के जुआड़ी संपादक, हिसाब बता, कैसे खर्च हुए? सवर्णवादी मीडिया के मठाधीशों, होश मे आ जाओ, अन्यथा हाशिये पर फ़ेंक दिये जाओगे, लतियाये जाओगे, गरियाये जाओगे और अंत में रोड पर मूंगफ़ली बेचते नजर आओगे।
मुजफ़्फ़रनगर मे दंगा हुआ, राहत शिविर में कपड़े नहीं हैं और ऐसे हालात में सैफ़ई महोत्सव का क्या अर्थ है, यह बात उठा रहा था स्टार न्यूज (अब एबीपी) का पत्रकार लखनउ का पंकज झा। अगर मुजफ़्फ़रनगर दंगा सहायता शिविर के लिये महोत्सव या कोई अन्य प्रोग्राम की आलोचना करनी है तो फ़िर सैफ़ई महोत्सव की आलोचना ही क्यों? क्या इसलिये कि यूपी में एक यादव का शासन है? अन्य राज्य जहां सवर्ण नेता सत्ता में हैं उनके यहां कोई उत्सव मन रहा है कि नहीं? कभी पता लगाया? होश में आ जाओ सवर्णवादी पत्रकारों… तुम लोगों का ईलाज तेल पिआवन लाठी है लेकिन दिक्कत है कि तुम जमूरों के कारण उस लाठी की चोट हमारे उपर भी पड़ जाती है। गब्बर सिंह की तरह चुन चुनकर मारे तब तो कोई बात ही नहीं।
वकील मदन तिवारी के फेसबुक वॉल से.
Dhananjay Singh : अखिलेश यादव जी कह रहे हैं की राज्यसभा के टिकट के लिए पीछे घूमने वाले,जुआ खेलते पकडे जाने पर पुलिस से पिट चुके लोगों के घर वाले,सरकारी हेलीकाप्टर में घूमने वाले पत्रकार अब सरकार के खिलाफ लिख रहे हैं.सरकार की दया के पात्र पत्रकारों के SMS भी सबको दिखा देने की धमकी दी है मुख्यमंत्री जी ने…..बढ़िया से धो दिया लखनौवा पत्रकारों को …. कहीं सफाई के बाद सारे पत्रकार 'आप' न हो जाएँ.
पत्रकार धनंजय सिंह के फेसबुक वॉल से.






