आशु जी, आपको मित्र की हैसियत से समझाउं या आम आदमी की, कुछ समझ में नहीं आ रहा है। आपने मित्रता कभी निभाई नहीं और आप आम आदमी कभी रहे नहीं। फिर भी आम आदमी पार्टी ने आपको सिर आंखों पर बिठाया। अब तो आप का फुल फार्म अरविंद, आशुतोष और प्रशांत भूषण नजर आने लगा है। एक टीवी चैनल पर लोग कह रहे थे-आम आदमी पार्टी चाइना मोबाइल फोन की तरह है, जिसमें ट्रिपल सिम, डबल मेमोरी और डबल बैटरी है पर लंबा चलेगा भी, इसमें संदेह होता है।
ठीक उसी तरह से आप एक नए फीचर के रूप में आम आदमी पार्टी से जुड गए हैं। लेकिन वह फीचर किस काम का, जो ऐक्टिीवेट ही न हो। आपने कहा, राजनीति में अभी ट्रेनी हूं, लेकिन पत्रकारिता में तो ट्रेनी नहीं हैं। वहां तो आप शीर्ष पद पर रहे हैं। टॉप टू बॉटम सारी समस्याओं से अवगत हैं। सैकडों लोगों की नौकरी समाप्त होने के साक्षी रहे हैं। आम आदमी पार्टी से जुडने के मौके पर आप यह तो कह ही सकते थे कि आम आदमी न सही, आम पत्रकारों की समस्याओं को उठाएंगे। फिर आपने कहा, एक ईमानदार कोशिश कर रहा हूं। जी नहीं जनाब, आप कोशिश ही नहीं कर रहे हैं। आपको फोन करने से ही आम पत्रकार डरेगा। कहीं आप यह न कह दें, यह भी कोई फोन करने का टाइम है!
श्रीकांत सिंह
मुख्य उपसंपादक
दैनिक जागरण
नोएडा
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आशु जी, कहीं आप मुझे कक्षा मित्र ही न मानने से इनकार कर दें, इसलिए यह फोटो अपलोड कर रहा हूं





