यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने पिछले दिनों एक प्रेस कांफ्रेंस में मीडिया वालों पर दो बड़े गंभीर आरोप लगाए. पहला आरोप दैनिक जागरण पर था. कि इनके मालिकों को राज्यसभा का टिकट नहीं दिया तो ये लोग अब यूपी सरकार के खिलाफ अनाप शनाप छाप रहे हैं.
दूसरा ये कि ये जागरण वाले मालिकान जुआ खेलते हुए पकड़े गए और पुलिस द्वारा पीटे गए. दोनों गंभीर आरोप हैं. अगर ये आरोप सच्चे हैं तो बहुत गंभीर बात है. इसके लिए इन जागरण के मालिकों की थूथू होनी चाहिए. अगर ये आरोप सही नहीं है तो संपादक की हैसियत से जागरण के मालिक संजय गुप्ता को सामने आकर बयान देना चाहिए.
ये वही जागरण के मालिकान हैं जो खुद खरबपति होते हुए भी पत्रकारों को मिलने वाले लखनऊ के सरकारी मकान को अपने नाम पर आवंटित कराए हुए हैं. जागरण के ब्लैकमेलर मालिकों को सबक सिखाने के वास्ते पिछली मायावती सरकार के दौरान इन लोगों को कानपुर में गिरा गिरा कर पुलिस ने पीटा था. अबकी सपा की सरकार ने इन जागरण के ब्लैकमेलर मालिकों का सारा कच्चा चिट्ठा सामने रखकर इनकी पूरे देश में जगहंसाई कराई है. अगर खुद को संपादक कहने वाले संजय गुप्ता में थोड़ी भी नैतिकता व ईमानदारी है तो इस पूरे मामले पर सामने आकर कंपनी, जागरण व खुद का पक्ष रखना चाहिए.
दूसरा आरोप टाइम्स नाऊ के यूपी ब्यूरो चीफ प्रांशु मिश्रा पर है. पहला आरोप है कि ये मुख्यमंत्री के साथ हेलीकाप्टर में घूमते हैं, फिर भी मुख्यमंत्री के खिलाफ खबरें दिखाते हैं. तो क्या माना जाए कि प्रांशु मिश्रा को इसलिए अखिलेश हेलीकाप्टर में घुमाते हैं क्योंकि प्रांशु ने उनसे कहा था कि हेलीकाप्टर में घुमाएंगे तो निगेटिव खबर नहीं दिखाएंगे. सच्चाई क्या है, यह प्रांशु को सामने आकर साफ करना चाहिए.
अखिलेश ने यह भी आरोप लगाया था कि दिल्ली से टाइम्स नाऊ के सीनियर लोगों ने जो मैसेज प्रांशु को भेजा उसे प्रांशु ने मुख्यमंत्री को फारवर्ड कर दिया. इस मैसेज में मार्केटिंग की मजबूरियों के कारण इंटरव्यू न दिखाने की बात कही गई थी. अगर टाइम्स नाऊ के दिल्ली आफिस के लोगों ने ये परसनल मैसेज प्रांशु को भेजा था तो प्रांशु ने इसे किस हैसियत व किन मजबूरियों के कारण मुख्यमंत्री अखिलेश को फारवर्ड किया? क्या यह टाइम्स नाऊ चैनल के साथ विश्वासघात नहीं है?
अखिलेश ने हालांकि प्रांशु का नाम नहीं लिया लेकिन सबको पता है कि यह सब कुछ टाइम्स नाऊ और इसके पत्रकार प्रांशु के लिए था. यही नहीं, एक पत्रकार बताते हैं कि प्रांशु अखिलेश के साथ हेलीकाप्टर में अकेले नहीं बल्कि सपत्नीक उड़े थे.
पत्रकार होने के नाते प्रांशु मिश्रा से लखनऊ से लेकर दिल्ली तक के सभी पत्रकार यह अपेक्षा करते हैं कि अपनी स्थिति वह स्पष्ट करें. क्यों उन्हें मुख्यमंत्री का प्रियपात्र बनने का शौक है और बदले में ऐसा सार्वजनिक अपमान सहना पड़ रहा है और इसके जरिए पूरी पत्रकार बिरादरी बदनाम हो रही है. बताया जाता है कि ये वही प्रांशु मिश्रा हैं जो एनडीटीवी के रिपोर्टर को मुख्यमंत्री द्वारा अपमानित किए जाने के प्रकरण के बाद सबसे कहते फिर रहे थे कि आप लोगों ने विरोध नहीं किया, अगर मैं होता तो विरोध करता. पर जब खुद की बारी आई, जिसमें मुख्यमंत्री ने प्रांशु को लक्षित कर कहा था कि 'काहे डर रहे हो, काहे कांप रहे हो, सवाल पूछो पूछो…', तो प्रांशु की जुबान अटक गई और कोई विरोध नहीं दर्ज करा पाए.
लखनऊ से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.
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