Arvind Tripathi : कानपुर प्रेस क्लब चुनावों की आग अभी ठंडी नहीं पड़ी कि आज इसमें एक नया मोड़ आ गया… नव चयनित कानपुर प्रेस क्लब की कार्यकारिणी ने एक बैठक बुलाई, जिसमें कानपुर के कानपुर के डी. आई. जी. श्री चतुर्वेदी और समाजवादी पार्टी के नगर अध्यक्ष चंद्रेश सिंह मुख्य अतिथि थे. दोनों में से चंद्रेश सिंह ने अपने भाषण में पत्रकारों को नसीहत का राशन दिया, कहा की आजकल पत्रकारिता पूर्णतः बिकाऊ हो गयी है…… तमामों कमियाँ गिनाते हुए उन्होंने कहा की कैसे लिखें, कैसे समझें…..और कैसे जनता के समक्ष ख़बरों को प्रस्तुत करें…. आज अचानक पूरे मीडिया गुरु हो गए चंद्रेश!
दैनिक जागरण के महेंद्र मोहन को राज्यसभा में दोबारा नहीं भेजने के बाद से समाजवादी पार्टी और दैनिक जागरण के बीच बढी खटास इस दौर में हो जायेगी की गणेश शंकर विद्यार्थी के शहर के पत्रकारों को चंद्रेश सिंह से सबक लेने की जरूरत पड़े? वो तो भला हो वरिष्ठ पत्रकार सुरेन्द्र त्रिवेदी का, जो उन्होंने अपने उद्बोधन में चंद्रेश सिंह सहित चतुर्वेदी जी और पत्रकारों के एक ऐसे समूह को आइना दिखाया जो पत्रकारिता के बीच कमजोर कड़ी हैं..
उन्होंने कानपुर की पत्रकारिता में आयी गिरावट की बड़ी वजह रहे स्व. नरेन्द्र मोहन की गलतियों को स्वीकारते हुए चंद्रेश और पुलिस वाले चौबे जी को खुला चैलेन्ज किया की हम पत्रकार उपने बीच के भ्रष्टाचार को सुधारने का संकल्प लेते हैं, क्या आप दोनों भी पुलिस और राजनीति में भ्रष्टाचार ख़तम करने का संकल्प लेंगे? इसके बाद तो दोस्तों, जैसा होना तय था, कार्यक्रम समाप्त हो गया. पुलिस वाले चौबे जी मंच छोड़कर गायब हो गए और चंद्रेश ने कोने में त्रिवेदी जी से माफी मांगनी शुरू कर दी…..
मैं पत्रकारों को नियम-क़ानून से चलने की नसीहत देने वाले कानपुर समाजवादी पार्टी के नगर अध्यक्ष श्री चंद्रेश सिंह, कानपुर प्रशासन, शहर के क़ानून और पत्रकारिता के विशेषज्ञों से जानना चाहूंगा… चंद्रेश सिंह किस नियम-कानून के तहत कानपुर के सर्किट हाउस में कमरा नंबर-3 पर काबिज हैं? क्या दैनिक जागरण सहित किसी अखबार का कोई पत्रकार इस सवाल को चंद्रेश सिंह या फिर कानपुर के जिलाधिकारी से पूछ पायेगा?
कानपुर के पत्रकार अरविंद त्रिपाठी के फेसबुक वॉल से.





