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धीरूभाई अंबानी की दलाली करके धनवान बने ये दो पत्रकार

दिल्ली में बहादुरशाह जफर नामक सड़क पर देश के कुछ बड़े समाचार पत्रों के कार्यालय हैं. इसी सड़क पर दक्षिणपंथी विचारधारा का एक अंग्रेजी समाचार पत्र छपता था जिसका नाम था 'पैट्रीआट'. वह समाचार पत्र आजकल बंद हो गया है. उसी समाचार पत्र में वीएन उनियाल नामक पत्रकार थे. लोगों का कहना है कि उन्होंने अपने मामा की लड़की से शादी कर ली. एक दिन अपनी पत्नी को अपने साथ अपना दफ्तर दिखाने लाए. उन्होंने बाद में अपनी पत्नी को अपने संपादक महोदय एस मिश्रा से मिलवाया. संपादक महोदय दिलफेंक थे. वे उनियाल साहब की पत्नी को घुमाने ले गए.

दिल्ली में बहादुरशाह जफर नामक सड़क पर देश के कुछ बड़े समाचार पत्रों के कार्यालय हैं. इसी सड़क पर दक्षिणपंथी विचारधारा का एक अंग्रेजी समाचार पत्र छपता था जिसका नाम था 'पैट्रीआट'. वह समाचार पत्र आजकल बंद हो गया है. उसी समाचार पत्र में वीएन उनियाल नामक पत्रकार थे. लोगों का कहना है कि उन्होंने अपने मामा की लड़की से शादी कर ली. एक दिन अपनी पत्नी को अपने साथ अपना दफ्तर दिखाने लाए. उन्होंने बाद में अपनी पत्नी को अपने संपादक महोदय एस मिश्रा से मिलवाया. संपादक महोदय दिलफेंक थे. वे उनियाल साहब की पत्नी को घुमाने ले गए.

दफ्तर के लोग बताते हैं कि मिश्रा जी उस महिला के साथ छुट्टी मना कर 15 दिन बाद लौटे. पत्रकार को मन में कोई मलाल नहीं था. वर्ष 1997 में जब जनता पार्टी की सरकार बनी तो उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा पेट्रोलियम और रसायन मंत्री बने. पत्रकार उनियाल पौड़ी जिले में भुगाणी नामक उसी गांव के रहने वाले थे, जिस गांव के बहुगुणा थे. इसलिए दोनों के आपसी संबंध थे. उसी समय एक गुजराती व्यवसायी अपने व्यापार को बढ़ाना शुरू कर रहा था. उसका नाम था धीरू भाई अंबानी. बहुगुणा जी के माध्यम से उनियाल साहब धीरू भाई अंबानी से मिलने लगे. अंबानी साहब को तो ऐसे ही मोहरे की आवश्यकता थी क्योंकि धीरू भाई अंबानी का तो यही काम था. धीरे-धीरे अंबानी ने गुजरात में अपने पैर पसारने शुरू कर दिये.

अंबानी साहब ने भारत सरकार के कुछ अधिकारियों से भी उनियाल पत्रकार के माध्यम से संपर्क साधना शुरू कर दिया. अंबानी साहब को सरकारी तौर पर जो चाहिए था वह सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के माध्यम से उन्हें मिलने लगा. उधर उनियाल के संपादक समाचार पत्रों को जर्मनी से प्रिंटिंग प्रेस इम्पोर्ट कराने में मदद करते थे. उनियाल ने अपने संपादक मिश्राजी को धीरू भाई से मिलवाया. मिश्रा तो संपादक थे और एक्सपोर्ट-इंपोर्ट के अधिकारियों में अच्छी पैठ बनाए हुए थे. अब मिश्रा जी भी धीरू भाई की मदद करने लगे. जब धीरू भाई अंबानी से उनियाल का पक्का रिश्ता बन गया तो उन्होंने बहुगुणा जी के यहां आना जाना बंद कर दिया था.

बाद में धीरू भाई ने दिल्ली से एक समाचार पत्र निकाला जिसका नाम था 'संडे आब्‍जर्वर'. मिश्रा जी उस समाचार पत्र के मुखिया बन गये. उनियाल भी उस समाचार पत्र में काफी दखल रखते थे. मिश्रा जी का तो कहना ही क्या था. फार्म हाउस से लेकर न जाने उनके पास कितनी अपार संपत्ति थी. वह अब नहीं रहे. उनियाल साहब का जो बेटा पैदा हुआ, उसका लंदन पेरिस न जाने कितने पाश्चात्य देशों में कारोबार है. इसी को कहते हैं अवसरवाद, यानि गलत सही जो भी मौका जब जहां मिले, उसे लपक कर आगे बढ़ जाना.

….जारी….

इसके पहले का पार्ट पढ़ने के लिए क्लिक करें- नशे में धुत कैमरामैन चिल्लाया- मुझमें क्या कमी है जो तू इस पीआरओ के साथ घूम रही है

लेखक विजेंदर त्यागी देश के जाने-माने फोटोजर्नलिस्ट हैं और खरी-खरी बोलने-कहने-लिखने के लिए चर्चित हैं. पिछले चालीस साल से बतौर फोटोजर्नलिस्ट विभिन्न मीडिया संगठनों के लिए कार्यरत रहे. कई वर्षों तक फ्रीलांस फोटोजर्नलिस्ट के रूप में काम किया और आजकल ये अपनी कंपनी ब्लैक स्टार के बैनर तले फोटोजर्नलिस्ट के रूप में सक्रिय हैं. ''The legend and the legacy : Jawaharlal Nehru to Rahul Gandhi'' नामक किताब के लेखक भी हैं विजेंदर त्यागी. यूपी के सहारनपुर जिले में पैदा हुए विजेंदर मेरठ विवि से बीए करने के बाद फोटोजर्नलिस्ट के रूप में सक्रिय हुए. विजेंदर त्यागी को यह गौरव हासिल है कि उन्होंने जवाहरलाल नेहरू से लेकर अभी के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तस्वीरें खींची हैं. वे एशिया वीक, इंडिया एब्राड, ट्रिब्यून, पायनियर, डेक्कन हेराल्ड, संडे ब्लिट्ज, करेंट वीकली, अमर उजाला, हिंदू जैसे अखबारों पत्र पत्रिकाओं के लिए काम कर चुके हैं. विजेंदर त्यागी से संपर्क 09810866574 के जरिए किया जा सकता है.

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