: नाराज पत्रकारों ने किया मंत्री से वार्ता का बहिष्कार : बैतूल जिले के पालक मंत्री की पत्रकारवार्ता का न केवल बहिष्कार हुआ बल्कि पालक मंत्री के उदासीन और गैरजिम्मेदाराना रवैये के कारण स्थानीय भाजपा को भी अब पत्रकारों के विरोध का खुला सामना करना पड़ेगा। यह बैतूल जिले के इतिहास का पहला मौका है जब पत्रकारों ने इतने तीखे और आक्रोशित अंदाज में न केवल प्रशासन और पालक मंत्री के मुर्दाबाद के नारे लगाए बल्कि एक बैठक लेकर प्रशासन और भाजपा के प्रेस नोट का हर स्तर पर बहिष्कार करने का निर्णय भी लिया है।
इस पूरे मामले में आश्चर्यजन और शर्मनाक पहलू यह है कि जिले के जिम्मेदार कलेक्टर बी. चंद्रशेखर, सीसीएफ आरबी सिन्हा ने भी पालक मंत्री सरताज सिंह को सही सलाह देने की जगह उन्हें भी पत्रकारों की उपेक्षा करने के लिए प्रोत्साहित किया। यह पूरा घटनाक्रम रविवार दोपहर तीन बजे सर्किट हाउस से शुरू हुआ। जहां पर पालक मंत्री कांग्रेस के आंदोलन को लेकर पत्रकारों से चर्चा करने वाले थे। पीआरओ द्वारा दोपहर दो बजे का समय दिया गया लेकिन पौने तीन बजे तक मंत्री नहीं पहुंचे। सर्किट हाउस में मंत्री की पत्रकारवार्ता को लेकर प्रशासनिक अधिकारी, फॉरेस्ट के कर्मचारी आदि मौजूद थे। इन सबके बीच एक फॉरेस्ट कर्मचारी नेता शराब के नशे में चूर होकर सर्किट हाउस के सेंट्रल हॉल में बैठक गालीगलौच कर रहा था। जब पत्रकार वार्ता के लिए वहां पहुंचे तो उसने उन्हें भी गालियां बकना शुरू कर दिया। यहां तक की कई वरिष्ठ पत्रकारों पर चप्पल निकालने के लिए मारने दौड़ा।
जब यह सारा कृत्य हो रहा था उस समय पीआरओ सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे और उन्होंने भी उसे रोकने की कोई कोशिश नहीं की। जिस स्थान पर प्रभारी मंत्री को आना है वहां ऐसी सुरक्षा की व्यवस्था प्रशासन की घोर लापरवाही को उजागर कर रही है और पत्रकारों के प्रति प्रशासन के रवैये को भी जाहिर कर रही है। इस घटना के बाद पत्रकारों ने विरोध किया सभी लोग सर्किट हाउस में मौजूद थे। पालक मंत्री, कलेक्टर सहित सीसीएफ आदि अन्य अधिकारी पहुंचे लेकिन उन्होंने भी घटना पर किसी तरह का कोई खेद जताना उचित नहीं समझा और वे पत्रकारों के विरोध की अनदेखी कर मुस्कुराते हुए अंदर चले गए। इस पूरे मामले में पत्रकारों ने साफ शब्दों में एक राय होकर कहा कि जिले में इस तरह का पालक मंत्री है, जो अपनी ही पार्टी की लुटिया डूबोने का काम कर रहा है। इस पालक मंत्री ने भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण दे रखा है इसलिए यह पत्रकारों से मुंह चुराता है और उनसे दूरियां बनाकर रखता है। भाजपा के स्थानीय जनप्रतिनिधि और नेताओं की कमजोरी का ही नतीजा है कि पहले नौकरशाही उनकी अवेहलना कर उन्हें अपमानित करती है और अब पत्रकारों के साथ भी ऐसा रवैया अपना रही है लेकिन पत्रकार इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। यदि स्थानीय भाजपा के जनप्रतिनिधियों ने ऐसे घटनाक्रम के विरोध में अपना पक्ष स्पष्ट नहीं किया और जिले के पालक मंत्री तथा नौकरशाही को काबू में करने का काम नहीं किया तो भाजपा को भी इसके बाद पत्रकारों के सीधे विरोध का सामना करना पड़ेगा।
घटनाक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों और पालक मंत्री का यह रवैया देखकर पत्रकारों में आक्रोश फूट पड़ा और सभी ने पत्रकारवार्ता का बहिष्कार कर दिया। इस बहिष्कार के बाद भी जिले के कलेक्टर या पालक मंत्री ने पत्रकारों से चर्चा करना उचित नहीं समझा। नतीजन पत्रकारों ने अपना विरोध जताने के लिए प्रशासन और पालक मंत्री के विरोध में नारे लगाते हुए मार्च निकाला। जब पत्रकार शिवाजी चौक पर नारे लगाते हुए अपना विरोध दर्ज करा रहे थे उस समय पालक मंत्री और अधिकारी अनदेखी करते हुए रेलवे स्टेशन के लिए रवाना हो गए। इस घटना के बाद सभी पत्रकारों ने एक बैठक ली और सामूहिक रूप से निर्णय लिया गया था सरकारी प्रेस नोट और भाजपा के प्रेस नोट का बहिष्कार किया जाएगा। साथ ही जिले के जनप्रतिनिधियों का भी खुला विरोध किया जाएगा क्योंकि जनप्रतिनिधियों के लचर रवैये के कारण ही अधिकारियों और मंत्रियों द्वारा इस तरह का गैर जिम्मेदाराना रवैया अपना जाता है।
पत्रकारों के इस विरोध में वरिष्ठ पत्रकार इंदरचंद जैन, राधेश्याम वर्मा, बलवंत धोटे, मयंक भार्गव, नवनीत गर्ग, सुनील द्विवेदी, अनिल सिंह ठाकुर, मयूर भार्गव, इरशाद हिंदुस्तानी, राजेश भाटिया, आनंद सोनी, मुश्ताक हुसैन रिजवी, प्रवीण गुगनानी, सतीश पटने, राजेंद्र मिश्रा, धनराज नगदे, सत्येंद्र परिहार, सुनील पलेरिया, ऋषिराज माथनकर, संजय पाल, मक्कू खान, कृष्णकांत आर्य, अनुरूप तोमर, जंकी शाह, सतीश साहू, सुनील अतुलकर, ज्ञानदेव लोखंडे, नंदकिशोर पंवार, अरुण यादव, राज मालवी, दीपक महरणवार आदि सभी अखबारों और चैनलों के प्रतिनिधि प्रमुख रूप से उपस्थित थे। वरिष्ठ पत्रकार इंदरचंद जैन ने पूरे मामले को दुर्भाग्यपूर्ण और उपेक्षित राजनीति का परिणाम बताया। उन्होंने अफसोस जाहिर किया कि हमारे जिले के जनप्रतिनिधि भी बेलगाम नौकरशाही पर अंकुश नहीं लगा रहे हैं और उसका नतीजा इस तरह से सामने आ रहा है। वहीं वरिष्ठ पत्रकार वामन पोटे का कहना था कि सत्तारूढ़ पार्टी के पालक मंत्री जिले में अपनी ही पार्टी की लुटिया डूबोने के लिए ऐसे कृत कर रहे हैं। पत्रकार सुनील द्विवेदी का कहना था कि यह पत्रकारों के सम्मान पर करारी चोट है जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।






