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इलाहाबाद

ठेका देने में कौड़िहार ब्लॉक कर्मचारियों ने किया खेल, होगी उच्च स्तरीय जांच

इलाहाबाद। समाजवादी पार्टी की सरकार में लूट और भ्रष्टाचार का खेल कम होने का नाम नहीं ले रहा है। विकास योजनाओं की उपलब्धियों के आंकड़ों की फाइलें सरकारी झूठ का पुलिंदा साबित हो रही हैं। अखिलेश सरकार में भ्रष्टाचार, शिष्टाचार का रूप लेने लगा है। सरकारी योजनाओं के धन में लूट-खसोट इंतिहा की हद पार कर रही हैं। ताजा उदाहरण सूबे के सबसे बड़े ब्लॉक माने जाने वाले कौड़िहार का है। यहां विकास योजनाओं का दस फीसदी हिस्सा भी पात्र ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। इस दावे पर जिसे भरोसा न हो वे ईमानदारी से जांच परख करा सकता है। पर शर्त यह है कि जांच पड़ताल निष्पक्ष हो। ‘घूंस लेते पकड़े जाइए तो घूस देकर छूट भी जाइए’वाला फंडा अपनाने वालों के लिए जांच बेनतीजा ही साबित होगी।

इलाहाबाद। समाजवादी पार्टी की सरकार में लूट और भ्रष्टाचार का खेल कम होने का नाम नहीं ले रहा है। विकास योजनाओं की उपलब्धियों के आंकड़ों की फाइलें सरकारी झूठ का पुलिंदा साबित हो रही हैं। अखिलेश सरकार में भ्रष्टाचार, शिष्टाचार का रूप लेने लगा है। सरकारी योजनाओं के धन में लूट-खसोट इंतिहा की हद पार कर रही हैं। ताजा उदाहरण सूबे के सबसे बड़े ब्लॉक माने जाने वाले कौड़िहार का है। यहां विकास योजनाओं का दस फीसदी हिस्सा भी पात्र ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। इस दावे पर जिसे भरोसा न हो वे ईमानदारी से जांच परख करा सकता है। पर शर्त यह है कि जांच पड़ताल निष्पक्ष हो। ‘घूंस लेते पकड़े जाइए तो घूस देकर छूट भी जाइए’वाला फंडा अपनाने वालों के लिए जांच बेनतीजा ही साबित होगी।

अब आइए मुख्य मुद्दे पर। इलाहाबाद के गंगापार में विकासखंड कौड़िहार में तेरह गांवों के लिए नाले-नालियों, सबमर्सिबल, हैंडपंप और कुएं निर्माण के लिए पड़ने वाले टेंडर में ब्लॉक कर्मचारियों ने अपनों को फायदा पहुंचाने में बड़ा खेल कर दिया। नौ जनवरी को खोले गए टेंडर के दौरान जब गड़बड़ियों का खुलासा हुआ तो ब्लॉक में हंगामा हो गया। बेईमानी के खिलाफ यह हंगामा घंटों चला पर नतीजा कुछ भी नहीं निकला। दरअसल, कौड़िहार ब्लाक की तेरह ग्रामसभाओं में सबमर्सिबल पंप, नाला, कुंए आदि के निर्माण कार्य के लिए कुल सैंतीस लाख रूपए का टेंडर ब्लॉक आफिस में डाला जाना था। इसके लिए 10 से 18 दिसंबर की समय सीमा निर्धारित की गई थी। टेंडर से जुड़े सूत्रों का कहना है कि 20 दिसंबर को टेंडर खुलना था। इसी बीच अपने चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए ब्लॉक के कर्मचारियों ने गड़बड़ी शुरू कर दी। टेंडर बॉक्स में डाले ही नहीं गए। कुछ लोगों ने उसी समय विरोध किया तो टाल-मटोल कर उन्हें शांत करा दिया गया। टेंडर को निर्धारित तिथि 20 दिसंबर को खोला भी नहीं गया। इसी बीच एकाउंटेंट ने ऑफिस आना बंद कर दिया।

लोगों ने इसकी शिकायत ब्लॉक प्रमुख सुनीता यादव से की तो उन्होंने 31 दिसंबर को डीएम राजशेखर से मिलकर उनको मामले से अवगत कराया। डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रभावी कार्रवाई करने का आदेश दिया। डीएम का आदेश मिलते ही बीडीओ तेजभान सिंह ने सीडीओ अटल राय और डीडीओ रमेश चंद्र पांडेय को चिट्ठी लिखकर टेंडर का चार्ज किसी और को देने को कहा। कई दिन बीत जाने के बाद भी एकाउंटेंट जगदीश नारायण तिवारी से टेंडर का चार्ज नहीं लिया गया। इस बीच एकाउंटेंट ने आफिस आना फिर से बंद कर दिया। बीडीओ ने टेंडर खुलने की अगली तिथि नौ जनवरी निर्धारित की। इस दिन टेंडर खुलने पर कई तरह की गड़बडि़यां उजागर हुईं। निर्धारित प्रपत्र तक नहीं थे। इसे देखते ही ब्लॉक परिसर में हंगामा हो गया। काफी देर तक वहां असहज स्थिति बनी रही। ब्लॉक परिसर में मौजूद कई प्रमुख लोगों ने समझा-बुझाकर गुस्साए लोगों को शांत किया। नाराज लोगों का कहना है कि अपने चहेते ठेकेदारों को नाजायज़ फायदा पहुंचाने के लिए जानबूझकर की गईं गड़बड़ियों का यह नतीजा है। इसकी उच्च स्तरीय जांच की जानी चाहिए। जनता-जनार्दन की मांग को शासन और स्थानीय प्रशासन कितनी गंभीरता से लेता है, इसका परिणाम कुछ निकलेगा भी या नहीं यह तो भविष्य बताएगा, पर इतना तो पक्का है कि सरकारी योजनाओं में लूट-खसोट और भ्रष्टाचार का घुन सरकारी विकास योजनाओं को भीतर ही भीतर खोखला कर दे रहा है।

 

इलाहाबाद से शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट
 

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