Sachin Kumar Jain : अरविन्द केजरीवाल जानते हैं कि सरकारी आवास और सचिवालय में सत्ता के भूत रहते हैं. वहां रह कर तो वह नहीं किया जा सकता, जो वे वास्तव में करना चाहते हैं. मौजूदा "राजकता" को तो "अराजकता" से ही पलटा जा सकता है. संविधान में कहाँ लिखा है कि कोई मुख्यमंत्री धरने पर नहीं बैठेगा. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने डेढ़ साल पहले केंद्र सरकार के खिलाफ धरने की "धमकी" दी थी. तैयारियां भी दिखाई गयीं थी, पर तब डील हो गयी थी. तब तो कांग्रेस की केंद्र सरकार ने तत्परता दिखाई थी; क्यों? मुझे तो बाते बहुत साफ़-साफ़ दिखाई देती हैं. यदि कोशिशों के बाद भी व्यवस्था न सुधरे तो संघर्ष करना ही पड़ता है. यह संघर्ष सचिवालय से नहीं हो सकता, यह तो लोगों के बीच ही हो सकता है. दिल्ली सरकार का काम करने का यह तरीका लोकतंत्र को लोगों के बीच ले जायेगा. (मध्य प्रदेश के सोशल एक्टिविस्ट सचिन कुमार जैन के फेसबुक वॉल से.)
Anil Singh : भारतीय दंड संहिता / इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) अंग्रेजों ने 1860 में बनाया था। वही कानून अभी तक लागू है। आईपीसी में पुलिस या किसी भी सरकारी अधिकारी (पब्लिक सर्वेंट) को ‘राइट टू ऑफेंस’ है, जबकि आम नागरिक को ‘राइट टू डिफेंस’ नहीं है। (मुंबई के वरिष्ठ पत्रकार अनिल सिंह के फेसबुक वॉल से.)





