: कानाफूसी : प्रत्याशियों से पैकेज लेकर अपने बैनर पर मेला आयोजित करने की तैयारी : पेड न्यूज पर चुनाव आयोग गंभीर है. अखबार-पत्रकार एवं टीवी चैनलों को एडवायजरी भी जारी कर दी गई है. जिलाधिकारियों ने पत्रकारों को समझा भी दिया है. पेड न्यूज पर नजर रखने के लिए कमेटियां भी बन गई हैं, लेकिन जिनके मुंह पिछले चुनावों में पेड न्यूज के बदले पैसा रूपी खून लग गया है, वो भला इतनी आसानी से कैसे मानने वाले हैं? कैसे मौका चूक सकते हैं? भले ही इन अखबारों के सीनियर लोग हाथी के दिखाने वाले दांत की तरह उपर से कहते फिर रहे हों कि पेड न्यूज हो तो बताएं, शिकायत करें, लेकिन अंदर से एडा बनकर पेड़ा खाने की पूरी तैयारी कर चुके हैं.
बताया जा रहा है कि तमाम अखबार पेड न्यूज को अब दूसरे तरीकों से करने की कोशिश में जुटे हुए हैं. खबर है कि हिंदुस्तान भी इसी कवायद में है. भले ही इसके संपादक पेड न्यूज को लेकर अखबारों में तमाम बयान दे रहे हों पर अंदर की सच्चाई दूसरी है. पिछले लोकसभा चुनाव में पत्रकारिता को ताक पर रखकर पहले पन्ने को पेड न्यूज के रूप में बेचने वाला यह अखबार इस बार भी नई योजना के साथ तैयार है. बताया जा रहा है कि इसके लिए तीन पैकेज बनाए गए हैं. दस लाख, पन्द्रह लाख और बीस लाख रुपये, जो प्रत्याशी जितने का पैकेज देगा उसका अखबार उतना भला करेगा.
इस योजना के अनुसार पैसा मिलने के बाद हिंदुस्तान प्रत्याशी के इलाके में किसान मेला, स्वास्थ्य मेला या इसी तरह का कोई मेला आयोजित करेगा और उसमें प्रत्याशी को मुख्य अतिथि बनाया जाएगा. इसमें आने वाले को नाश्ता-पानी, दवा-दारू सब फ्री होगा. पूरा बैनर हिंदुस्तान का होगा, मुख्य अतिथि के रूप में विराजमान प्रत्याशी से दवा या जो कुछ भी सामान होगा, मेले में आए लोगों में फ्री बंटवाया जाएगा. मौखिक रुप से उनसे कहा जाएगा कि यह सब कुछ इन्हीं की तरफ से है, इन्होंने ही पूरा आयोजन किया है.
दूसरी तरफ इस मेला आयोजन की खबर के माध्यम से प्रत्याशी को पूरा कवरेज दिया जाएगा. उसकी कई तस्वीर प्रकाशित की जाएगी तथा खबर में भी उसे पूरा महत्व दिया जाएगा. इसके अलावा पैसा देने वाले प्रत्याशी तथा उससे संबंधित खबरों को बाद में भी प्रमुखता दी जाएगी, जबकि दूसरे प्रत्याशियों की खबर दबाई जाएगी. प्रत्याशी का नाम बदनाम ना हो इसका भी पूरा ख्याल रखा जाएगा तथा आयोग के निर्देशानुसार जनसम्पर्क वगैरह नहीं छापा जाएगा, पर घुमाफिरा कर खबरें दी जाएंगी. इसके अलावा कई बार विज्ञापन भी नियमानुसार प्रकाशित किया जाएगा.
कानाफूसी कैटगरी की खबरें चर्चाओं, गासिप, अपुष्ट सूचनाओं पर आधारित होती हैं. इन पर भरोसा करने से पहले अपने स्तर पर छानबीन और पुष्टि कर लें. अगर आपके पास भी मीडिया से जुड़ी कोई चर्चा है तो हम तक [email protected] के जरिए पहुंचा सकते हैं.





