Ravish Kumar : अख़बार में कांग्रेस का विज्ञापन छपा है। मोदी के 'मैं' पर निशाना करते हुए स्लोगन है- 'मैं नहीं हम'। मगर तस्वीर 'हम' की भावना के उलट है। राहुल 'हम' से 'मैं' बन रहे हैं। 'हम' में विलीन नहीं हो रहे हैं। 'हम' के 'मैं' लगते हैं। कई लोग मोदी के सीने वाली बात पर लोट पोट हो रहे हैं। उनके लिए 'तात्कालिक कवि' रवीश कुमार की तरफ़ से ये पेश है-
जिसे देखो वही अपना कुर्ता नपवा रहा है,
कोई छप्पन तो कोई चौंतीस बता रहा है।
वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार के फेसबुक वॉल से.
Mukesh Kumar : काँग्रेस और बीजेपी को एक दूसरे पर चोरी का इल्ज़ाम नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि दोनों एक दूसरे की चीज़ें चुराते रहे है्। बीजेपी ने काँग्रेस की आर्थिक नीतियों की नकल की तो काँग्रेस ने उसका नारा चुरा लिया। एक ही थैली के चट्टे-बट्टे होने से भेद मिट जाते हैं। उस पाँच सौ करोड़ लेने वाली विदेशी विज्ञापन एजेंसी के बारे में क्या कहा जाए, जिसने इतना माल लेकर एक घिसा-पिटा नारा पकड़ा दिया। तरस आता है इन बड़ी पार्टियों और उनके दिग्गज नेताओं के सयानेपन पर जो फिर भी इन विदेशी प्रचार एजंसियों पर इस कदर फिदा हैं। ध्यान रहे इसमें भी मोदी और राहुल दोनों हैं।
वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार के फेसबुक वॉल से.





