स्वघोषित चैम्पियन सम्पादक प्रभात रंजन दीन ने कैनविज टाइम्स से मुक्त होते-होते अपने रास्ते के सबसे बड़े कांटें धर्मेंद्र सक्सेना को आखिरकार जप ही दिया। इसके पहले वह पूरी टीम को तोड़ चुके हैं। प्रभात रंजन ने जब से संस्थान छोड़ने का मन बनाया था, उसके बाद से ही वह धर्मेन्द्र सक्सेना को लगातार प्रताड़ित कर रहे थे। अक्टूबर महीने में तो उन्होंने धर्मेन्द्र सक्सेना को फोन पर एसएमएस कर कार्यालय आने से मना कर दिया था और कारण कार्यों की समीक्षा बताया था।
धर्मेन्द्र के काम में कोई कमी न होने के कारण उन्हें न चाहते हुए भी धर्मेन्द्र को वापस लेना पड़ा। जाने से पहले अपने स्वभाव के अनुसार प्रभात रंजन दीन कैनविज टाइम्स को जहां तक सम्भव हो सके नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। उन्होंने कार्यमुक्त होते ही कैनविज की टीम साफ करने की भी रणनीति बना ली है।
लखनऊ से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.






