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जमानत न होने देने और फंसाने के लिए तरुण तेजपाल पर लगाया गया धमकाने का आरोप!

तरुण तेजपाल ने अपने उपर लगे आरोपों की जांच कर रही महिला अधिकारी को पत्र लिखकर कई बातें कही हैं. ये पत्र उन्होंने तब लिखा जब उन्हें पता चला कि महिला अधिकारी सुशीला सावंत ने उन पर यानि तरुण तेजपाल पर धमकी देने का आरोप लगाया है और इस बारे में कोर्ट को सूचित किया है. तरुण तेजपाल ने पत्र लिखकर कहा है कि ये सब इसलिए किया जा रहा है ताकि उनको जमानत न मिले और पूरी तरह फंसाया जा सके. पत्र अंग्रेजी में है और जेल से लिखा गया है.

तरुण तेजपाल ने अपने उपर लगे आरोपों की जांच कर रही महिला अधिकारी को पत्र लिखकर कई बातें कही हैं. ये पत्र उन्होंने तब लिखा जब उन्हें पता चला कि महिला अधिकारी सुशीला सावंत ने उन पर यानि तरुण तेजपाल पर धमकी देने का आरोप लगाया है और इस बारे में कोर्ट को सूचित किया है. तरुण तेजपाल ने पत्र लिखकर कहा है कि ये सब इसलिए किया जा रहा है ताकि उनको जमानत न मिले और पूरी तरह फंसाया जा सके. पत्र अंग्रेजी में है और जेल से लिखा गया है.

अंग्रेजी में लिखा पत्र पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें:

Tarun Tejpal Letter to Sushila Sawant

उपरोक्त पत्र के शुरुआती पांच पैरों में तरुण तेजपाल ने यह बताया है कि किस तरह उन्होंने हिरासत, रिमांड के दौरान पूछताछ और मेडिकल टेस्ट आदि के दौरान हर स्तर पर लगातार सहयोग किया, सारे सवालों के जवाब दिए. तरुण ने यहां तक लिखा है कि अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ उनका व्यवहार पूरी तरह सम्मानजनक रहा. उन्होंने धमकी या दबाव की बात तो छोड़िए, कभी किसी अधिकारी या कर्मचारी से गलत शब्द कहना तो दूर, ऊंची आवाज में बात तक नहीं की. धमकी के आरोपों के बारे में सफाई देते हुए तरुण ने लिखा है: ''मेरा ये डर पुख्ता होने लगा है कि आपके पूर्वाग्रहयुक्त रवैये के चलते आपसे मुझे इंसाफ मिलने की उम्मीद कम से कम होती नजर आ रही है. ऐसा लग रहा है कि एक तयशुदा रणनीति के तहत चुने हुए तथ्यों और सुबूत पेश किए जा रहे हैं जिनका उद्देश्य किसी भी तरह मुझ पर लगे तथाकथित आरोपों को सिद्ध करना है ना कि सच्चाई तक पहुंचना. ये जाहिर है कि मुझ पर आपको धमकाने और दबाव देने के झूठे आरोप इसलिए लगाए गए हैं ताकि मुझे जमानत मिलने के हर मौके खारिज हो सकें. ये तथ्य कि माननीय सेशन कोर्ट में पेश की मेरी जमानत याचिका पर आपके दिए जवाब में धमकी या दबाव का उल्लेख ना होना और बाद में इसका शामिल किया जाना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. मेरी जमानत याचिका की जिरह के दौरान सरकारी वकील ने कहा कि मैंने अपनी गलती मान ली है. जबकि अब भी मैं कह रहा हूं कि हर बार मैंने हर एक आरोपों को पूरी तरह खारिज किया, और कहा कि ये सही नहीं हैं.''

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