जोधपुर। अपनी अय्याशी के लिए हिरणों की हत्या करना सिने स्टार सलमान खान को काफी महंगा पड़ रहा है। मुंबई में फिल्मों की शूटिंग और भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के साथ पतंग उड़ाने के अपने व्यस्त कार्यक्रम में से समय निकाल कर उसे जोधपुर की अदालत में एक आम मुजरिम की तरह पेश होना पड़ रहा है। आज सलमान खान चार्टेड विमान से जोधपुर आए और जोधपुर की चीफ ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट चन्द्रकला जैन की अदालत में पेश हुए।
सलमान खान ने अदालत से गुहार की कि उनके खिलाफ चल रहे सभी केस एक साथ जोड़ दिए जाएं। काबिलेगौर है कि पन्द्रह साल पहले फिल्म ''हम साथ साथ हैं'' की शूटिंग के दौरान सलमान खान और उनकी टीम के अन्य कलाकारों के खिलाफ हिरण का शिकार करने और अवैध हथियार रखने के आरोप में चार मुकदमे जोधपुर की अदालत में दर्ज हुए थे। अब सलमान खान ठहरे व्यस्त अभिनेता और अब नेता भी। अभिनेतागिरी के साथ-साथ अब तो वे नेतागिरी भी करने लगे हैं। जनाब इन दिनों नरेंद्र मोदी के साथ पतंग उड़ाकर उन्हें प्रधानमंत्री बनवाने में जुटे हैं। इसलिए उनके पास अदालत में अने का समय नहीं है फिर अलग-अलग केस में अलग-अलग दिन पेशी, लेकिन अदालत तो भई अदालत है। यह तो भगवान का न्याय का मंदिर है, जहां सबको सिर झुकाना ही पड़ेगा।
सलमान खान ने अदालत से गुहार लगाई कि उनके खिलाफ चल रहे सभी मुकदमे एक साथ जोधपुर उनकी सुनवाई की जाए। हिरण मारने के आरेाप में चल रहे मुकदमों की बिश्नोई समाज की तरफ से पैरवी कर रहे वकील महीपाल बिश्नोई ने बताया कि सलमान खान ने उक्त आग्रह सीआरपीसी की धारा 313 के तहत किया है ताकि उन्हें बार-बार अदालत में नहीं आना पड़े।
अदालत के बाहर मीडिया और पुलिस का भारी जमावड़ा था। दोनों अपनी-अपनी डयूटी कर रहे थे। जहां पुलिस सलमान खान को भीड़ से बचाने के लिए थे वहीं मीडिया उनकी बाइट लेने के लिए खड़ा था। सलमान खान ने इस संवाददाता को बताया कि उन्हें अदालत पर पूरा विश्वास है। इधर अखिल भारतीय विश्नोई महासभा मांग कर रहा है कि चूंकि उन्होंने निर्दोष प्राणियों की हत्या की है, इसलिए उन्हें कानून के मुताबिक कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
पेशी के दौरान जोधपुर के डिप्टी कमिश्नर आफ पुलिस हरियाणा के रहने वाले राहुल जैन अपनी पूरी फौज के साथ मुस्तैदी से डटे रहे। सलमान खान के साथ उनका निजी कमांडो शेरा भी आया था। काबिलेगौर है कि बिश्नोई हिरणों और वृक्षों को अपने बच्चे की तरह पालते हैं। यहां महिला हिरण के बच्चों को अपना दूध पिलाती हैं। अखिल भारतीय बिश्नोई समाज के मीडिया सलाहाकार अरूण जोहर बताते हैं कि जोधपुर के पास खेडदजदली गांवों में सन 1730 में जोधपुर के महाराजा अभय सिंह के निवास के लिए वृक्षों की जरूरत पड़ी तो उनके सिपाही पेड़ काटने गए। जब उन्होंने पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलानी शुरू की तो एक बिश्नोई महिला अमृता देवी के नेतृत्व में 363 बिश्नोई महिला, पुरुष और बच्चों व नवविवाहिता दुल्हनों ने भी पेड़ों की रक्षा के लिए वृक्षों से चिपक कर अपना बलिदान दे दिया लेकिन पेड़ नहीं कटने दिए। बाद में महाराज ने वहां जाकर माफी मांगी और आदेश दिया कि आगे से उनकी रियासत में वृक्ष नहीं कटेंगे। बिश्नोई समाज के लोगों ने खुद कट कर हरे भरे वृक्षों को कटने से बचाकर इतिहास में अमर हो गए।
लेखक पवन कुमार बंसल हरियाणा के वरिष्ठ पत्रकार हैं.





