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हरिवंशजी : मेरे परोक्ष गुरू

हरिवंश जी से मेरी आज तक एक ही मुलाकात है। नौकरी के सिलसिले में मैं उनसे मिला था। प्रभात खबर में जगह नहीं थी। उसके बाद उनसे मुलाकात नहीं है। बनारस में हिंदुस्तान में रहते हुए एक बार उन्होंने मुझे प्रभात खबर ज्वाइन करने के लिए बुलाया था। लेकिन, पैसे कम थे। लिहाजा मैं गया नहीं। लेकिन, ये सब छोड़िए। दरअसल, मेरा भाग्य-नसीब ही कुछ खोटा रहा होगा जो मैं इतने बड़े संपादक के साथ काम नहीं कर सका।

हरिवंश जी से मेरी आज तक एक ही मुलाकात है। नौकरी के सिलसिले में मैं उनसे मिला था। प्रभात खबर में जगह नहीं थी। उसके बाद उनसे मुलाकात नहीं है। बनारस में हिंदुस्तान में रहते हुए एक बार उन्होंने मुझे प्रभात खबर ज्वाइन करने के लिए बुलाया था। लेकिन, पैसे कम थे। लिहाजा मैं गया नहीं। लेकिन, ये सब छोड़िए। दरअसल, मेरा भाग्य-नसीब ही कुछ खोटा रहा होगा जो मैं इतने बड़े संपादक के साथ काम नहीं कर सका।

1984 में प्रभात खबर पटना से शुरू हुआ और 1989 में हरिवंश जी इसमें आए। इस अखबार में किसी भी घटना को जिस तरीके से प्रकाशित किया जाता था, वह लाजवाब था। एक-एक खबरों की प्लानिंग इस कदर होती थी कि पूछो मत। पत्रकारिता के जो छह एलीमेंट हैं-कब, कौन,कहां,कैसे,क्या और कितना….इनकी मीमांसा प्रभात खबर के उन दिनों के हर अंक में होती थी। जबरदस्त क्रेज था उस अखबार का। कोडरमा में हिंदुस्तान भी डाक संस्करण का ही आता था, प्रभात खबर और रांची एक्सप्रेस भी। लेकिन, प्रभात खबर इनमें हर रोज अव्वल रहता था। खास कर क्रिकेट की रिपोर्टिंग में। इस अखबार को पढ़-पढ़ कर ही मैंने पत्रकारिता का ककहरा सीखा। निश्चित तौर पर मुझे सबसे पहली नौकरी एस.एन. विनोद साहेब ने लोकमत समाचार में दी, लेकिन पत्रकारिता को परोक्ष रूप से सखाने का काम तो हरिवंश जी ने ही किया।

दरअसल, हरिवंश जी को मैं पिछले 20 साल से लगातार पढ़ रहा हूं। वह मनीषी हैं। उनके बारे में क्या कहा जाए। हम लोग बहुत छोटे अखबारनवीस हैं। लेकिन, जो कुछ भी हैं वह हरिवंश जी के कारण ही हैं। अब हरिवंश जी इसे मानें या न मानें पर सत्य यही है कि प्रभात खबर की रिपोर्टिंग के कारण मैंने इस अखबार को पढ़ना शुरू किया और जिस दिन महामहिम के आने की तैयारी में सैकड़ों बच्चे चिलचिलाती धूप में खड़े होकर स्कूल जाने का इंतजार कर रहे थे, उस रपट को पढ़ने के बाद मैंने मन ही मन इन मनीषी को अपना सर्वस्व मान लिया।

4यू टाइम्स के कार्यालय में प्रभात खबर का ई-पेपर रोज देखा जाता है। लोग बड़े चाव से इसे देखते हैं। मैं भी उन्हीं में से एक हूं। जब खबर हुई कि हरिवंश जी राज्यसभा जा रहे हैं तो डर लगा। डर इसलिए लगा कि क्या छह साल तक प्रभात खबर से दूर रह कर हरिवंश जी कैसे रह सकेंगे। उससे भी ज्यादा चिंता इस बात की है कि हरिवंश जी की शैली में प्रभात खबर में कौन काम कर सकेगा। ईश्वर करे, मेरी ये चिंताएं व्यर्थ साबित हों।

आनंद सिंह

कार्यकारी संपादक

4यू टाइम्स

गोरखपुर
 

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