: मुलायम की हुंकार के बाद बेनी का पैतरा, बसपा हुई पटरा : बाराबंकी। आखिरकार सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की हुंकार के बाद जागे इस्पात मंत्री बेनी वर्मा ने चौकाने वाला पैतरा भांज वरिष्ठ बसपा नेता गयासुद्दीन किदवाई को कांग्रेस में शामिल कर बसपा को पटरा कर डाला जबकि पूर्व एमएलसी ने भी बसपा की सत्ता में पांच साल मलाई खायी। अब जग हंसाई कराकर उन्हें कांग्रेस (आई) भा गयी।
विधानसभा चुनाव की रणभेरी बजने के बाद अवसरवादी राजनीति का भयावह चेहरा जिले में और भी कुरूप होता जा रहा है। ताजा मामले में बसपा एमएलसी रहे व पूर्व में अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष रहे गयासुद्दीन किदवाई ने केन्द्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा को अपने घर पर ही पार्टी देकर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। बसपा के इस कद्दावर नेता के ऐन चुनाव के मौके पर पार्टी को छोड़ना व कांग्रेस में जाने को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोग विश्वास नहीं कर पा रहे हैं कि जिस बसपा ने किदवाई को अपनी सत्ता में सब कुछ दिया वही आज जब दल को जितवाकर सम्मान देने का मौका आया तो ये महोदय मैदान छोड़ कांग्रेस सेना में जाकर खड़े हो गये।
गयास भाई चीख-चीख कर कैबिनेट मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं। उन्हें बाराबंकी का जमीदार बता रहे हैं। लेकिन शायद इस बात का जवाब उनके पास नहीं होगा कि वह बसपाई सत्ता के दौरान अब तक क्यों चुप रहे। पांच सालों तक बसपा सरकार के कई मंत्री भ्रष्टाचार दर भ्रष्टाचार करते रहे और इनमें से कई मंत्री गयासुद्दीन किदवाई के मंच की शोभा बने रहे।
अवसरवादिता का कुरूप चेहरा कल बाराबंकी में आयोजित की गयी सियासी पार्टी में बार-बार झलक रहा था। गयास भाई जितना जोर-जोर से नसीमुद्दीन व बसपा पर आरोप लगा रहे थे उतनी ही जोर से नैतिकता दहाड़े मारकर रो रही थी। केन्द्रीय इस्पात मंत्री बेनी वर्मा के लिए यह मंजर राहत देने वाला था लेकिन बेचारे बसपाई अपनी ही पार्टी के एक नेता के बेवफा हो जाने के बाद भौचक थे।
जाहिर था कि सत्ता की मलाई खाने वाला उसका वरिष्ठ नेता आज बसपा की जग हंसाई कराने पर उतर आया था। उन्हें वह दल याद नहीं रहा जिसने उन्हें एमएलसी का पद दिया और अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष बनाकर उन्हें लाल बत्ती से नवाजा। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक फिलहाल मुस्लिम राजनीति में चुके हुए नेता माने जाने वाले गयासुद्दीन ने सत्ता की मलाई खाकर बसपा की जगहंसाई कराकर अब कांग्रेस आई अपनाया है। कई विरोधियों और खीझे बसपाइयों ने गयासुद्दीन को दगा कारतूस करार देते हुए कहा कि उन्हें कांग्रेस मुबारक लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर इस वरिष्ठ नेता को ऐसा कदम तो नहीं ही उठाना चाहिए था।
जाहिर था कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव व आजम खां की हुंकार के बाद गयास ने जो कदम उठाया वह उनकी सेटिंग-गेटिंग वह फारमूला है जिसमें उन्हें घाघ बेनी वर्मा ने कोई सियासी सपना जरूर दिखाया होगा? 15 वर्षों तक बसपाई होने का दावा करने वाले गयास जिले में वह नेता थे जिन्हें बसपा सुप्रीमो मायावती से सीधे बातचीत करने में किसी की सिफारिश की जरूरत नहीं थी। उनका यह कदम बसपा के लिए कितना घातक होगा अथवा निष्प्रभावी होगा, यह तो आने वाला समय ही बतायेगा। लेकिन एक चीज तय है कि जिले की आयाराम-गयाराम सियासत में यह एक बुजुर्ग अवसरवादी कदम है।
कांग्रेसी खुश हैं। सपाई हलकान। भाजपाई कुशवाहा में व्यस्त हैं तो बसपाई इस नई सियासी घटना से भौचक हैं। दल के नेताओं के पार्टी से किनारा करने के बाद बसपा इस स्थिति से कैसे निपटेगी यह तो आने वाला समय ही बतायेगा। फिलहाल सत्ता की मलाई व बसपा की जगहंसाई कराने के बाद अब गयास को कांग्रेस आई जैसे भायी… इस पर तो सियासी चर्चा होनी ही है।
बाराबंकी से रिजवान मुस्तफा की रिपोर्ट.





