उत्तर प्रदेश में पाठको के बीच अपनी जमीन बनाने की कोशिश करने में जुटा हिंदुस्तान अखबार पाठकों को अपनी न्यूज रिपोर्ट के आधार पर गुमराह करने में जुटा हुआ है। हिंदुस्तान के 9 जनवरी के अंक में पहले पन्ने पर 'कुछ अलग' कालम में एक न्यूज आइटम इटावा के एक उभरते हुये कवि गौरव चौहान की कृति 'धोखाधड़ी' को लेकर प्रकाशित किया गया है। उत्तर प्रदेश के इटावा में आने वाले कानपुर संस्करण की इस न्यूज को लिखा है अखिल सक्सेना ने। बाई लाइन में बाकायदा 'इटावा/अखिल सक्सैना' उल्लेख है।
लेकिन यही खबर लखनऊ संस्करण में पहले पन्ने पर गोपेश्वर से क्रांति भटट नाम से जारी हुई है। इसी तरह से यही न्यूज देहरादून के गोपेश्वर संस्करण में भी क्रांति भटट के नाम से जारी है। न्यूज का एंगल और लिखावट करीब करीब एक जैसी है। फिर एक ही खबर को अलग अलग एडिशनों में अलग अलग रिपोर्टरों के नाम से प्रकाशित करने का तुक क्या है। यह तो पाठकों के साथ धोखाधड़ी है।
ज्ञात हो कि इटावा के कवि गौरव चौहान ने कोलावरी के चुनावी वर्जन धोखाधड़ी को पेश किया है। इसके बारे में भड़ास पर भी खबर प्रकाशित हो चुकी है। इसी धोखाधड़ी हाय गीत के बारे में खबर हिंदुस्तान ने अलग अलग रिपोर्टरों के नाम से अलग अलग एडिशन्स में प्रकाशित की है।
कई सजग पाठक सोच रहे हैं कि हिंदुस्तान में जारी हुई यह न्यूज़ असल में किस रिपोर्टर ने लिखी है, इटावा के अखिल ने या फिर गोपेश्वर के क्रांति भट्ट ने। जिस न्यूज को हिंदुस्तान ने 'कुछ अलग' के नाम से पेश किया है, यही न्यूज भड़ास पर ''चुनाव में इटावा की भेंट कोलावरी की जगह धोखाधड़ी सुनिये'' नामक शीर्षक से 6 जनवरी को आ चुकी है।
इटावा से दिनेश शाक्य का रिपोर्ट





