Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

आवाजाही, कानाफूसी...

कार्टून बनाने की ऐसी सजा भी मिल सकती है, मैंने नहीं सोचा था

: कार्टून बनाना भी आपको देशद्रोही घोषित करवा सकता है : 6 जनवरी को मेरे मीडिया के कुछ मित्रों से जब यह बात पता चली कि मेरे खिलाफ महाराष्ट्र की एक अदालत में देशद्रोह का मुकदमा किया गया है तो यकीन मानिये, सचमुच थोड़ी देर के लिये मैं स्तब्ध रह गया. ऐसा लगा मानों पैरों तले से जमीन खिसक गई हो. कार्टून बनाने के ऐसी सजा भी मिल सकती है, मैंने नहीं सोचा था. कनफर्म करने के लिये अपने एक अजीज से बात की तो पता चला कि सामना ने अपने फ्रंट पेज पर ही 'आसीम त्रिवेदीवर देशद्रोहाचा गुन्हा' शीर्षक से एक खबर छापी है और जिला अदालत में यह कार्यवाही एक प्राइवेट कम्प्लेन पर की गई है.

: कार्टून बनाना भी आपको देशद्रोही घोषित करवा सकता है : 6 जनवरी को मेरे मीडिया के कुछ मित्रों से जब यह बात पता चली कि मेरे खिलाफ महाराष्ट्र की एक अदालत में देशद्रोह का मुकदमा किया गया है तो यकीन मानिये, सचमुच थोड़ी देर के लिये मैं स्तब्ध रह गया. ऐसा लगा मानों पैरों तले से जमीन खिसक गई हो. कार्टून बनाने के ऐसी सजा भी मिल सकती है, मैंने नहीं सोचा था. कनफर्म करने के लिये अपने एक अजीज से बात की तो पता चला कि सामना ने अपने फ्रंट पेज पर ही 'आसीम त्रिवेदीवर देशद्रोहाचा गुन्हा' शीर्षक से एक खबर छापी है और जिला अदालत में यह कार्यवाही एक प्राइवेट कम्प्लेन पर की गई है.

साथ ही यह भी पता चला कि यह शिकायत मुम्बई के उन वकील महोदय की नहीं है जिन्होने कम्लेन कर मेरी वेबसाइट को अन्ना अन्दोलन के पहले ही दिन बैन करा दिया था. न ही यह कम्प्लेन आरजेडी सांसद रामकृपाल यादव के राज्यसभा के बयान के बाद हुई थी. मतलब साफ था कि यह स्वघोषित देशभक्त कोई और थे जो कि इस मुद्दे से पापुलैरिटी बटोरने की फिराक में हैं. वैसे इस बीच अन्ना के अरविन्द गौड़ जी ने मुझे फोन करके भरोसा दिलाया है कि वे इस लड़ाई में मेरे साथ खड़े हैं. मीडिया रिपोर्ट के आधार पर यह भी जानकारी हुई कि स्वामी अग्निवेश भी सरकार की इस कार्यवाही को गलत ठहराते हुए मेरे समर्थन में हैं. फेसबुक पर तमाम दोस्त भी बार बार मुझसे यही कह रहे हैं कि वे साथ देंगे और आखिर तक खड़े रहेंगे. गम्भीर आरोपों से हिम्मत डोल जाती है और दोस्तों की मदद से हौसला बढ़ जाता है.

'सामना' की रिपोर्ट को माने तो मुम्बई के बीड जिले के हनुमन्त उपरे ने जिला अदालत में मेरे खिलाफ आरोप लगाए हैं कि मैंने ये कार्टून बना कर देशद्रोह किया है और इनसे जनभावनाएं आहत होती हैं. कुछ ऐसे ही आरोप मु्म्बई के एक वकील राजेन्द्र ने भी लगाए थे और सरकारी नुमाइंदों ने विशेष सतर्कता दिखाते हुए मुझे बिना कोई सूचना दिया वेबसाइट को बैन कर दिया था. मतलब कोर्ट कचहरी का कोई झंझट ही नहीं.

मुम्बई पुलिस क्राइम ब्रान्च खुद ही इतनी बड़ी कोर्ट है कि फौरन जजमेंट दे दिया और साइट बैन हो गई. अन्ना के अनशन का वह पहला दिन ही था और दिन के 12 बजे तक मेरी वेबसाइट बैन हो चुकी थी. बाद में पता लगा कि वकील आर पी पण्डे जिनकी अर्जी पर यह फास्टेस्ट ऐक्शन हुआ था वे पेशे से वकील होने के अलावा मुंबई कांग्रेस के उत्तरी जिला महासचिव भी हैं. मैं तो कहता हूं कि अगर इतनी तेज़ी प्रशासन ने भ्रष्टाचार के मामलों में दिखाई होती तो हमें कभी इस तरह करप्शन के खिलाफ सड़क पर न उतरना पड़ता.

मुझ पर आरोप है कि मैंने संविधान का अपमान किया है. मेरा पूछना है कि जो मुंबई पुलिस ने किया, वो क्या है. मेरे डोमेन प्रोवाईडर बिग रॉक का कहना है कि जब तक पुलिस उन्हें आदेश नहीं देगी, वो साईट नहीं चालू करेंगे. मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि एक आर्टिस्ट का काम क्या एक पुलिस ऑफिसर की सहमति का मोहताज़ है, क्या हमें कोई भी कार्टून बनाकर पहले पुलिस डिपार्टमेंट से पास कराना पड़ेगा.  पुलिस ने खुद ही आरोप बनाया, खुद ही जांच कर ली और खुद ही सज़ा दे दी, वो भी मुझे एक छोटा सा एसएमएस तक किये बिना. मेरी सारी मेहनत उस साईट के साथ दफन हो गयी होती अगर मेरे पास उसका बैकअप न होता. ये ऐसा है कि पुलिस को मैं बता दूँ कि आपने चोरी की है और पुलिस बिना मामला दर्ज किये, बिना आपसे बात किये सीधे आपको गोली मार दे. क्या इसे लोकतंत्र कहते हैं, क्या यही है हमारा संविधान?

वैसे केवल लोकतंत्र में ही नहीं बल्कि राजशाही में भी कलाकारों का महत्व रहा है. चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने भी अपने दरबार में नवरत्न रखे थे. अकबर के समय भी बीरबल बादशाह-सलामत की गलतियों पर अपने व्यंग्य से चोट किया करते थे. और यहाँ तो कोई सम्राट भी नहीं है. आज तो लोकतंत्र है. हम सब राजा हैं, हम सब सम्राट हैं. कबीर कहते थे "निंदक नियरे राखिये, आगन कुटी छबाय." गनीमत है कि कबीर के टाइम में इंटरनेट नहीं था वरना सबसे पहले कबीर की ही वेबसाईट बैन होती फिर उनके मुंह पर भी बैन लग जाता. जैसे-जैसे दूसरे देशों में फ्री स्पीच को समर्थन मिलता गया, हमारे यहाँ उलटा होता गया.

कार्टूनिस्ट के बारे में भारत में बड़ी गलतफहमी फ़ैली हुयी है कि कार्टूनिस्ट का काम बस लोगों को हँसाना है. पर दोस्तों, कार्टूनिस्ट और जोकर में फर्क होता है. कार्टूनिस्ट का काम लोगों को हंसाना नहीं बल्कि बुराइयों पर चोट करना है. कार्टूनिस्ट आज के समय का कबीर है. कबीर कहते थे "सुखिया सब संसार है, खावे और सोवे…दुखिया दास कबीर है, जागे और रोवे." कार्टूनिस्ट जागता है, वो कुछ कर नहीं सकता पर वो सच्ची तस्वीर सामने लाता है, जिससे लोग जागें और बदलाव की कोशिश करें. बचपन में स्कूल में पढ़ा था, "साहित्य समाज का दर्पण है." पढ़ा होगा उन्होंने भी, जिन्होंने साईट बैन की है और मुझ पर देशद्रोह का केस किया है. पर वो भूल गए, उन सारी बातों की तरह जो हमें बचपन में स्कूल में सिखाई गयी थीं, जैसे चोरी न करना, झूठ न बोलना, गालियाँ न बकना. शायद वो बातें हमें इसीलिये पढ़ाई जाती हैं कि बड़े होकर सब भूल जायें.

तो साहित्य और दर्पण का मामला ये है कि आईने में आपको अपना चेहरा वैसा ही तो दिखाई देगा जैसा कि वो वाकई में है. ये तो ऐसा है कि आप शीशे पर ये आरोप लगायें कि भाई तुम बहुत बदसूरत शकल दिखा रहे हो और गुस्से में आकर शीशा तोड़ दें. इससे तो जो शीशा था वो भी गया, जो सुधार की गुन्जाइश थी वो भी गयी. हर आदमी शीशे में देखता है कि कहाँ चेहरा गन्दा है, कहाँ बाल नहीं ठीक हैं. ये वो काम था जो करना चाहिए था और सुधारना चाहिए था देश को, पर ऐसा हुआ नहीं. आइने पर देशद्रोह का मामला लगा दिया गया. आइने को तोड़ने की तैयारी है. इसीलिये हमारी तरफ एक कहावत है, बन्दर को शीशा नहीं दिखाना चाहिए. पर सवाल दूसरे का होता तो छोड़ देते, ये मामला तो हमारे घर का है. शीशा तो दिखाना ही पड़ेगा. और रही बात अंजाम की तो वो भी कबीर बता गया, "जो घर फूंके आपना, साथ हमारे आये."

कहा जा रहा है, मैंने राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान किया है. मेरा ज़वाब है कि जब मैंने कहीं वास्तविक प्रतीकों का इस्तेमाल ही नहीं किया तो भला अपमान कैसे हो गया. मैंने तो बस ये बताया कि अगर हम आज के परिवेश में राष्ट्रीय प्रतीकों का पुनर्निर्धारण करें तो हमारे नए प्रतीक कैसे होने चाहिए. प्रतीकों का निर्धारण वास्तविकता के आधार पर होता है. यदि आप से कहा जाये कि शांति का प्रतीक एके47 रायफल है तो क्या आप मान लेंगे? वही स्थिति है हमारे प्रतीकों की, देश में कही भी सत्य नहीं जीत रहा, जीत रहा है भ्रष्ट. तो क्या हमारे नए प्रतीक में सत्यमेव जयते कि जगह भ्रष्टमेव जयते नहीं हो जाना चाहिए.

आरोप है कि मैंने संसद को नेशनल टायलेट बना दिया है, पर अपने दिल से पूछिए कि संसद को नेशनल टायलेट किसने बनाया है? मैंने या फिर लोकतंत्र का मज़ाक उड़ाने वाले नेताओं ने, रुपये लेकर सवाल पूछने वाले जन प्रतिनिधियों ने, भारी भारी घोटाले करके भी संसद में पहुच जाने वाले लोगों ने और खुद को जनता का सेवक नहीं बल्कि राजा समझने वाले सांसदों ने.

आरजेडी सांसद राम कृपाल यादव राज्यसभा में ये कार्टून लहराकर बताते हैं कि लोकतंत्र का अपमान है. उन्हें लोकतंत्र का अपमान तब नज़र नहीं आता जब उन्हीं की पार्टी के राजनीती यादव उसी सदन में लोकपाल बिल की कापी फाड़ते हैं, जब उन्हीं की पार्टी के अध्यक्ष लालू प्रसाद खुले आम बयान देते हैं कि भारत में चुनाव मुद्दों से नहीं, धर्म और जाति के समीकरणों से जीते जाते हैं. जब पूरी संसद देश के १२५ करोड़ लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करके लोकपाल के नाम पर जोकपाल लेकर आती है और उसे भी पास नहीं होने देती.

मेरे एक और कार्टून पर लोगों को आपत्ति है जिसमे मैंने भारत माँ का गैंग रेप दिखाया है. दोस्तों कभी आपने सोचा है कि भारत माता कौन हैं? भारत माता कोई धार्मिक या पौराणिक देवी नहीं हैं, कि मंदिर बना कर उसमें अगरबत्ती सुलगाएं और प्रसाद चढ़ाएं. डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया में नेहरू जी लिखते है, "कोई और नहीं बल्कि हम आप और भारत के सारे नागरिक ही भारत माता हैं. भारत माता की जय का मतलब है इन्ही देशवासियों की जय..!" और इसलिए इन देशवासियों पर अत्याचार का मतलब है भारत माता पर अत्याचार. मैंने वही तो कार्टून में दिखाया है कि किस तरह राजनेता और प्रशासनिक अधिकारी भारत माँ पर अत्याचार कर रहे हैं. फिर इसमें गलत क्या है. क्या सच दिखाना गलत है. अगर आपको इस तस्वीर से आपत्ति है तो जाइये देश को बदलिए ये तस्वीर अपने आप सुधर जायेगी.

और रही बात मेरी इंटेशन की तो ये कार्टून्स देखकर कोई बच्चा भी बता सकता है कि इनका कारण देशद्रोह नहीं देशप्रेम है और इनका मकसद हकीकत सामने लाकर लोगों को भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट करना है..! दोस्तों, आपसे अपील है कि मेरे ब्लाग cartoonsagainstcorruption.blogspot.com पर जाइये और देखकर बताइये कि क्या मैं देशद्रोही हूं.

आपका

असीम त्रिवेदी

9336505530 

[email protected]

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...