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रिश्वतखोर दिल्ली पुलिस पर स्टिंग करने के लिए ‘आजतक’ को बधाई

Yashwant Singh : दिल्ली पुलिस का या यूपी पुलिस का स्टिंग करने में ज्यादातर चैनलों और ज्यादातर पत्रकारों की फटती है क्योंकि मीडिया मालिकों और इनके पालतू पत्रकारों को डर होता है कि कहीं किसी मामले में पुलिस वाले डंडा न कर दें… सो, ये लोग उतनी ही पत्रकारिता करते हैं जितने में सब पीआर-लायजनिंग-दुआ-सलाम सब कायम रह सके… ऐसे में आजतक वालों को बधाई. खासकर Deepak Sharma को. दिल्ली पुलिस रिश्वतखोरी पर शानदार स्टिंग को लेकर मुंबई वाले वरिष्ठ पत्रकार Pankaj Shukla अपने फेसबुक वॉल पर लिखते हैं:

Yashwant Singh : दिल्ली पुलिस का या यूपी पुलिस का स्टिंग करने में ज्यादातर चैनलों और ज्यादातर पत्रकारों की फटती है क्योंकि मीडिया मालिकों और इनके पालतू पत्रकारों को डर होता है कि कहीं किसी मामले में पुलिस वाले डंडा न कर दें… सो, ये लोग उतनी ही पत्रकारिता करते हैं जितने में सब पीआर-लायजनिंग-दुआ-सलाम सब कायम रह सके… ऐसे में आजतक वालों को बधाई. खासकर Deepak Sharma को. दिल्ली पुलिस रिश्वतखोरी पर शानदार स्टिंग को लेकर मुंबई वाले वरिष्ठ पत्रकार Pankaj Shukla अपने फेसबुक वॉल पर लिखते हैं:

''Punya Prasun Bajpai दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर शायद कन्फ्यूज़ हैं। दिल्ली पुलिस का एंटी करप्शन ब्यूरो दिल्ली सरकार को रिपोर्ट करता है। ये बात Deepak Sharma ने साफ करके अच्छा किया। और, भ्रष्टाचार को लेकर उनका Manish Sisodia से सीधा सवाल निशाने पर है।''

पंकज के इस स्टेटस पर आसिफ खान का एक जोरदार कमेंट आया है जिसे पढ़कर मैं अपनी हंसी न रोक सका…

Asif Khan : बाजपेई जी अक्सर कंफ्यूज ही से नज़र आते हैं। अजीब अजीब शब्दों को अजीबोगरीब अंदाज़ से पेश करने के चक्कर में बात को बेबात कर देते हैं…. 'दरसल' बात 'मुद्दे' की करना चाहते हैं मगर मुद्दा 'हाशिये' पर चला जाता है और आम आदमी की रोजमर्रा की 'जद्दोजहद' को 'राजनीति' की बिसात पर परखते-परखते इतना लम्बा कर देते हैं कि अगर उनकी सुनने के लिए किसी लघु शंका को रोक हुआ हो तो टेलिविज़न के सामने ही त्यागने को मजबूर हो जाये। इस क्रम बात बदल जाती है। बहार हाल। गुस्ताखी माफ़।

तो ये रही पंकज भाई और आसिफ भाई की क्रिया-प्रतिक्रिया. आपकी क्या राय है. आजतक जैसा साहस इंडिया टीवी या एबीपी न्यूज या इंडिया न्यूज या एनडीटीवी वाले क्यों नहीं दिखाते… लगता है पत्रकारिता का जो थोड़ा बहुत स्पार्क बचा है, वह आजतक में ही है, वरना तो बाकी सब सैकड़ों करोड़ के स्याह सफेद में मशगूल हैं और अपने चेलों-चपाटों-मोहरों को दिन भर चिल्लाने बकने बहसियाने के लिए छोड़े हुए हैं… है ना!

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से. भड़ास तक अपनी बात [email protected] के जरिए पहुंचा सकते हैं.

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