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भूखंड के लिए उदयपुर के पत्रकार धरने पर

उदयपुर से खबर है कि नगर विकास प्रन्यास से लंबे समय से भूखंडों की मांग कर रहे पत्रकार आज कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठे. इस संबंध में न्यायालय में चल रहा वाद भी खत्म हो गया है, लेकिन यूआईटी सचिव आरपी शर्मा की हठधर्मिता के कारण पत्रकारों को उनका जायज हक नहीं मिल पा रहा है. इसी कारण पत्रकारों को धरने पर बैठना पड़ा. यह धरना पत्रकार संघर्ष समिति की तरफ से दिया जा रहा है.

उदयपुर से खबर है कि नगर विकास प्रन्यास से लंबे समय से भूखंडों की मांग कर रहे पत्रकार आज कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठे. इस संबंध में न्यायालय में चल रहा वाद भी खत्म हो गया है, लेकिन यूआईटी सचिव आरपी शर्मा की हठधर्मिता के कारण पत्रकारों को उनका जायज हक नहीं मिल पा रहा है. इसी कारण पत्रकारों को धरने पर बैठना पड़ा. यह धरना पत्रकार संघर्ष समिति की तरफ से दिया जा रहा है.

उल्लेखनीय है कि पत्रकारों द्वारा एक साल पहले १४४ भूखंडों के आवेदन किए गए थे. इस पर यूआईटी ने १०२ पत्रकारों को भूखंड आबंटित किए. इसी बीच कुछ पत्रकारों द्वारा न्यायालय से स्टे ले लिया गया, जिससे प्रक्रिया रोकनी पड़ी. इसके बाद एक माह पूर्व पत्रकारों ने स्टे उठा लिया.  इसके बावजूद यूआईटी आबंटन की कार्रवाई शुरू नहीं कर रही है. इस संबंध में जिला कलेक्टर और यूआईटी चेयरमैन आशुतोष पेढणेकर और यूआईटी सचिव डॉ. आरपी शर्मा को कई दफा भूखंड आबंटन करने का निवेदन किया गया, लेकिन कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई. 

इस पर लेकसिटी प्रेस क्लब के अध्यक्ष मनु राव पत्रकारों के प्रतिनिधि मंडल के साथ कलेक्टर से मिले और उनसे पत्रकारों के भूखंड के संबंध में दिए गए जवाब से असंतोष जताते हुए धरने पर बैठने की चेतावनी दी. इस पर आज कलेक्ट्री के सामने मनु राव के नेतृत्व में पत्रकार कपिल श्रीमाली, जयप्रकाश माली, भूपेंद्रसिंह चूंडावत, डॉ. रवि शर्मा, प्रकाश मेघवाल, घनश्यामसिंह, अजय आचार्य, सुनील गोठवाल सहित कई पत्रकार धरने पर बैठे. यह तीन दिवसीय धरना है. उसके बाद कुछ पत्रकार आमरण अनशन पर बैठेंगे. उदयपुर के पत्रकारों को अधिकारियों द्वारा फिर एक बार धोखा दिया जा रहा है.

जिन श्रमजीवी पत्रकारों को लॉटरी द्वारा भूखड आवंटित हुए थे उन भूखंडों पर अब यूआईटी के अधिकारी अब फुटबॉल का खेल खेल रहे है और कोर्ट के आदेशों के बाद भी कोर्ट की अवहेलना करते हुए. पत्रकारों को धोखा दिया जा रहा है, और पत्रकारों को उनका अधिकार "भूखंड" आवंटित नहीं किये जा रहे हैं. यूआईटी सेक्रेटरी अपने निजी अहम् के चलते १४० पत्रकारों से उनकी जीवन भर की पूंजी की अमानत में खयानत कर रहे है.

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