नई दिल्ली। सहारा समूह को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली गई है। अदालत ने सिक्योरिटी अपीलेट ट्रिब्यूनल के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें उसने सहारा समूह की दो कंपनियों को 17 हजार 400 करोड़ रुपये निवेशकों को लौटाने के लिए कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह की दो कंपनियों सहारा इंडिया रियल एस्टेट और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन से इस मामले में एफिडेविट जमा कराने के लिए कहा है। एफिडेविट में कंपनियों को ये बताना होगा कि वो कैसे अपने 2 करोड़ से ज्यादा निवेशकों की हितों की रक्षा करेगी।
इसके अलावा कोर्ट ने कंपनियों से वित्त वर्ष 2010-11 की बैलेंस शीट और नवंबर 2011 तक के स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट भी पेश करने के लिए कहा है। वहीं मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी को होगी। उच्चतम न्यायालय द्वारा निवेशकों को 17,400 करोड रूपए लौटाने के प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकारण (सैट) के आदेश के खिलाफ सहारा समूह की याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिए जाने से सहारा प्रबंधन प्रसन्न है। सैट ने समूह की दो कंपनियों को निवेशकों का पैसा लौटाने का आदेश दिया था।
न्यायालय ने न्यायाधिकरण के आदेश पर अपने अंतरिम स्थगन आदेश को अभी और बडा दिया है। सहारा को अभी और बडा दिया है। सहारा की याचिका पर सुनवाई मंजूर करते हुए मुख्य न्यायाधीश एसएच कपाडिया की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 20 जनवरी तय की है। समूह ने अदालत को सूचित किया कि उसने हलफनामा देकर स्पष्ट किया है कि वह सहारा इंडिय रियल एस्टेट कॉरपोरेशन (अब सहारा कमोडिटी सर्विसेज कॉरपोरेशन) और सहरा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन के 2.3 करोड निवेशकों के हितों का संरक्षण करेगा।





