Umesh Kumar : उत्तराखंड में आई भीषण आपदा ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। आपदा आने के बाद यहां कई बड़े बाबा, सेलिब्रिटी और फैशन इंडस्ट्रीज से जुड़े लोग आपदा पीड़ितों की मदद के लिए बढ़-चढ़कर आगे आए लेकिन सच्चाई के धरातल की असल तस्वीर तो ये है कि आपदा पीड़ित जहां कल थे वहीं आज भी हैं। समाज के ठेकेदार बनने वाले बड़े-बड़े संत जैसे बाबा राम रहीम, बाबा रामदेव ने आपदा पीड़ितों के जख्म पर मरहम लगाने के बहाने खूब लोकप्रियता बटोरी।
सेलिब्रिटी और फैशन जगत से जुड़े लोगों ने भी आपदा में मदद के नाम पर बेसहारों को भरोसा दिलाया लेकिन सिर्फ पब्लिसिटी कमाने के लिए। सच्चाई तो यह है कि सिर्फ भरोसे भर से कुछ नहीं होता उसके लिए यथार्थ के धरातल पर उतरकर काम करना पड़ता है। इन माननीयों ने आपदा का दंश झेल रहे गरीबों का सिर्फ मजाक उड़ाया है। कुछ ऐसे लोग भी हैं जिनका मैं नाम खोलना नहीं चाहूंगा। कुछ ऐसे बिल्डर्स जो आपदा पीड़ितों को राहत के नाम पर दिन रात फैशन स्पॉन्सर करते दिखाई देते थे। आज ये सबके सब न जाने कहां लापता हो गए हैं।
मैं पिछले एक महीने से उत्तरकाशी और केदारवैली के दौरे पर हूं लेकिन मुझे इन दिग्गजों में से एक भी न दिखाई दिया न सुनाई पड़ा। यहां मेरे मन में सबसे बड़ा प्रश्न ये खड़ा होता है कि क्या आपदा पीड़ितों के जख्म भर गए हैं या फिर वो दिग्गज जो कुछ दिन पहले तक बड़े-बड़े दावे करते नजर आते थे उनकी आंखों का पानी सूख गया है? क्या इन बेशर्मों का आपदा पीड़ितों के नाम पर पब्लिसिटी बटोरने का स्कोप खत्म हो गया है?
आज भी पहाड़ों पर गरीब खुले आसमान के नीचे ठंड से ठिठुर रहा है। मासूम बच्चे जो अपना दर्द भी बयां नहीं कर सकते तिल-तिल कर मरने पर मजबूर हैं। अभी भी आपदाग्रस्त इलाकों में लोग भोजन के लिए तरस रहे हैं। जबकि जानलेवा सर्दी से बचने के लिए स्थानीय लोगों को गरम कपड़े और कंबलों की बेहद जरूरत है।

वरिष्ठ पत्रकार, उद्यमी और 'समाचार प्लस' न्यूज चैनल के मैनेजिंग डायरेक्टर उमेश कुमार के फेसबुक वॉल से.





