नई दिल्ली. मयूर विहार इलाके में एक वृद्ध महिला पत्रकार की घर में घुस कर हत्या कर दी गई। हत्यारों ने घर में फ्रेंडली एंट्री ली और घर में घुसते ही गला घोंट कर उनकी हत्या करने के बाद घर से लूटपाट कर फरार हो गए। इस वारदात का पता मंगलवार सुबह उस समय चला जब उनके यहां काम करने वाली दो नौकरानियां आईं। वृद्धा घर में अकेली रहती थी और मयूर विहार थाने में सीनियर सिटीजन की लिस्ट में रजिस्टर्ड थीं।
पुलिस आशंका जता रही है कि उनकी हत्या सोमवार रात आठ से नौ बजे के बीच की गई है। फिलहाल दोनों नौकरानियों से पूछताछ की जा रही है। मृतका का बेटा ब्रिटिश हाई कमिशन में राजनीतिक सलाहकार के पद पर तैनात है, जो परिवार के साथ इंदिरापुरम में रहता है। जानकारी के अनुसार सरोजनी भरतवाल (81) मयूर विहार फेज-वन, पॉकेट-4 मकान संख्या बी-88 में अकेली रहती थीं। उनके पुत्र हेमेंद्र सिंह परिवार के साथ इंदिरापुरम में रहते हैं और ब्रिटिश हाई कमिशन में राजनीतिक सलाहकार के पद पर तैनात हैं।
उनकी पत्नी नुपूर नोएडा में जॉब करती हैं। सरोजनी भरतवाल के यहां दो महिलाएं मंजू (27) व सरोज (30) बतौर नौकरानी काम करती हैं और सुबह शाम आती हैं। पुलिस के अनुसार हत्या की सूचना सुबह लगभग 11 बजे मिली, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंच गई। जांच में पता चला कि सुबह लगभग 10 बजे पहले मंजू घर पर आई। उसने वरांडे में पड़े अखबार एकत्र किए और फिर दरवाजा खटखटाया। दरवाजा अंदर से बंद नहीं था। उसने कई बार पुकारा लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया।
झांक कर देखने पर अंदर सामान इधर-उधर बिखरा देख मंजू वापस लौट गई। फिर 11 बजे सरोज आई तो उसने भी सरोजनी भरतवाल को आवाज लगाई। फिर वह घर के अंदर गई तो सामान इधर उधर बिखरा देखने के बाद वह बाहर आ गई और शोर मचा दिया। इसके बाद वह पड़ोसियों के साथ अंदर गई, जहां ड्राइंग रूम के अंदर घुसते ही दरवाजे के पास उनकी चप्पल व ऐनक पड़ी थी। अंदर बेडरूम में पहुंचने पर पाया कि सरोजनी भरतवाल लेटी हुई थीं और उन पर चादर ढकी हुई थी। चादर हटाने पर पाया कि उनकी नाक से खून निकल रहा था। फर्श पर भी खून के कुछ निशान थे। तुरंत मामले की जानकारी पुलिस को दी गई।
तीन माह पहले घर में कराया था व्हाइट वाश
पुलिस ने बताया कि सरोजनी भरतवाल के बेटे हेमेंद्र सिंह से पता चला है कि उन्होंने लगभग तीन माह पहले घर में व्हाइट वाश कराया था। उन्होंने उन्हीं लोगों से अपने इंदिरापुरम वाले घर में भी व्हाइट वाश कराया था। खास बात यह है कि बेड रूम में रखी अलमारी, बक्से व दीवान को ही खोल कर उसमें रखी नकदी व गहने आदि लूटे गए हैं। अन्य दोनों कमरों की अलमारी आदि को खोला भी नहीं गया है। सरोजनी केवल बेड रूम में रखी अलमारी, बक्से व दीवान आदि में ही नकदी व गहने रखती थीं, अन्य दोनों कमरों की अलमारी में किताबें आदि रखती थीं, जिससे प्रतीत होता है कि हत्यारों को इस बात की जानकारी पहले से थी। पुलिस दोनों नौकरानियों से पूछताछ करने के साथ-साथ व्हाइट वाश कर चुके मजदूरों व ठेकेदार का पता लगा रही है।
रात को स्विच ऑफ था मोबाइल
हेमेंद्र सिंह ने बताया कि पिता की मौत के बाद से ही मां (सरोजनी भरतवाल) अकेली रहती थीं। वह रोज रात को सोने से पहले मोबाइल पर मां को फोन करते थे। सोमवार रात को लगभग नौ बजे भी उन्होंने मां के मोबाइल पर फोन मिलाया था, लेकिन उनका फोन स्विच ऑफ था। लगभग साढ़े नौ बजे भी उन्होंने फोन मिलाया, इस बार भी फोन स्विच ऑफ था। उन्होंने चिंता इसलिए नहीं हुई क्योंकि अक्सर उनका फोन बैटरी डिस्चार्ज की वजह से ऑफ हो जाया करता था। मंगलवार सुबह वह अपने ऑफिस में थे, लगभग 11 बजे किसी पड़ोसी ने फोन कर बताया कि उनकी मां बेडरूम में पलंग से नीचे अचेत पड़ी हैं। उन्होंने तुरंत अपनी पत्नी नुपूर को फोन कर मां के पास जाने को कहा क्योंकि नोएडा से मयूर विहार पास है। जब तक नुपूर वहां पहुंची तो पुलिस भी पहुंच चुकी थी। वह शाम होते ही घर के दरवाजे बंद कर लेती थीं और किसी भी अनजान के लिए दरवाजा नहीं खोलती थीं। मौके पर पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त प्रभाकर के अलावा नई दिल्ली रेंज के संयुक्त आयुक्त भी पहुंचे थे।
संगीत विशारद थीं सरोजनी
सरोजनी भरतवाल एम.ए हिस्ट्री व संगीत विशारद थीं। वह एक प्रमुख अखबार में बतौर म्यूजिक क्रिटिक काम कर चुकी थीं तथा अभी भी फ्रीलांस जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रही थीं। इसके अलावा व इंडियन वुमेन प्रेस क्लब से भी जुड़ी थीं। उनके पति वीरेंद्र सिंह भी वरिष्ठ पत्रकार थे और कई प्रमुख समाचार पत्रों के साथ काम कर चुके थे। उनका देहांत वर्ष 2008 में हुआ था, जिसके बाद से सरोजनी भरतवाल अकेले ही रहती थीं।
साभार : दैनिक भास्कर
11 गेट्स, सभी पर गार्ड, कैसे पहुंचे हत्यारे
नई दिल्ली।। मयूर विहार फेज-1 के पॉकेट-4 में रहने वाली सरोजनी बर्तवाल (78) की उन्हीं के घर में हत्या से इस इलाके की सुरक्षा पर सवालिया निशान लग गया है। यहां की रेजिडेंस वेलफेयर असोसिएशन के अध्यक्ष आर. के. सक्सेना के मुताबिक पॉकेट-4 को पूरे मयूर विहार में सबसे सुरक्षित माना जाता है। यहां हत्या की वारदात तो दूर, कभी गाडि़यों से स्टीरियो तक चोरी नहीं होते।
सक्सेना के मुताबिक पूरी पॉकेट-4 में एंट्री और एग्जिट के कुल 11 गेट्स हैं। हालांकि यहां सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं, लेकिन हर गेट पर एक-एक सिक्युरिटी गार्ड तैनात रहता है। वैसे तो सभी गेट रात 11 बजे तक खुले रहते हैं, लेकिन 11 बजे के बाद सिर्फ मदर डेरी के पास वाला ही गेट खुला रहता है और वहां पर भी गार्ड रजिस्टर में एंट्री करने के बाद ही किसी को अंदर जाने देते हैं। सब्जी वाले, दूध वाले, न्यूज पेपर वाले, कूड़ा उठाने वाले भी सुबह सिर्फ 8 से 11 बजे के बीच ही अंदर आ-जा सकते हैं। कबाडि़यों की एंट्री भी रविवार की सुबह सिर्फ दो घंटे के लिए ही होती है। ऐसे में यहां एक बुजुर्ग महिला की घर के अंदर हत्या होना और घर में लूटपाट करके आरोपी का आसानी से निकल जाना, काफी चौंकाने वाला है।
सक्सेना सरोजनी के घर के ठीक सामने ही रहते हैं और सरोजनी से उनकी लगभग हर दिन बातचीत होती रहती थी। उन्होंने बताया कि बीट कॉन्स्टेबल भी हर दिन सरोजनी से मिलने आता था। अगर उन्हें बाहर से कोई चीज मंगानी होती थी, तो वह ज्यादातर बीट कॉन्स्टेबल को ही फोन करती थीं। एसएचओ भी हर हफ्ते उनसे मिलने आते थे, लेकिन इसके बावजूद उनके घर में काम करने वाली दोनों नौकरानियों का पुलिस वेरिफिकेशन नहीं हुआ था। अलबत्ता पुलिस ने कभी इस इलाके में सर्वेंट वेरिफिकेशन ड्राइव चलाई ही नहीं। यही वजह है कि इस इलाके में काम करने वाले 99 फीसदी घरेलू नौकरों का पुलिस वेरिफिकेशन नहीं हुआ है। सक्सेना ने कहा कि इस घटना के बाद हमें इस इलाके की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नए सिरे से सोचना पड़ेगा और यहां की सिक्युरिटी बढ़ाने के लिए कुछ नए कदम उठाने होंगे।
सरोजनी के बेटे हेमेंद्र के मुताबिक मां ने भातखंडे संगीत विश्वविद्यालय से संगीत विशारद की डिग्री हासिल की थी। पंडित दिलीप चंद्र वेदी से संगीत की शिक्षा ली थी। गिरिजा देवी , बेगम अख्तर , पंडित जसराज जैसी संगीत की महान हस्तियों से उनकी काफी अच्छी जान – पहचान थी। इस उम्र में भी वह कभी कभार ऑल इंडिया रेडियो के लिए प्रोग्राम करती थीं और अक्सर म्यूजिक कंसर्ट सुनने भी जाती थीं। महिला प्रेस क्लब में भी उनकी मौजूदगी लगातार बनी रहती थी।
हेमेंद्र ने बताया उनकी मां अपनी सुरक्षा को लेकर काफी सतर्क रहती थीं और शाम होते ही घर का गेट बंद कर लेती थीं। किसी अजनबी के लिए दरवाजा खुलवाकर उनके घर में दाखिल होना लगभग नामुमकिन था। हेमेंद्र के मुताबिक सोमवार की सुबह 10 बजे उनकी पत्नी ने सरोजनी से फोन पर बात की थी , लेकिन रात को 9:30 बजे जब उन्होंने मां से बात करने के लिए फोन लगाया, तो फोन स्विच ऑफ था। उन्हें लगा कि शायद उनकी मां फोन चार्ज करना भूल गई हैं या फिर फोन स्विच ऑफ करके सो गई हैं। इसी वजह से रात को उन्होंने इस बात को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया , लेकिन जब मंगलवार की सुबह उन्होंने दोबारा मां को फोन लगाया, तब भी फोन लगातार स्विच ऑफ ही आता रहा। कई बार कोशिश करने के बाद भी फोन ऑन नहीं हुआ और इसी बीच पड़ोसियों ने फोन करके उन्हें वारदात की सूचना दी। हेमेंद्र ने बताया कि दो तीन महीने पहले मां ने घर में पुताई भी कराई थी। हो सकता है कि इस वारदात में उन लोगों का हाथ हो।
साभार : नवभारत टाइम्स





