इस समय उत्तर प्रदेश में चुनाव चल रहे हैं। आदर्श आचार संहिता के नाम पर ग्रामीण पत्रकारों को कुछ पुलिस के अधिकारी और प्रशासन के लोग क्षेत्र में होने वाली घटनाओं के विषय में सही जानकारी नहीं दे रहे हैं। क्षे़त्र में घटने वाली घटनाओं से पल्ला यह कह कर झाड़ लेते हैं कि चुनाव में काफी काम है, समय नही मिल रहा है। ऐसे में क्या जब चुनाव होते हैं तो सारी कानून व्यवस्था मनमानी हो जानी चाहिए। यदि अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से मुकर रहे हों तो आम आदमी की सुनवाई कैसे और कहां होगी?
जब हमेशा की तरह समाचार लेने वालों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार हो रहा है तो सामान्य आदमी की क्या हैसियत होगी कि वह थाने और प्रशासनिक अधिकारी के पास अपनी फरियाद ले कर जाए। फैजाबाद जिले के बीकापुर थाना क्षेत्र में 12 दिन पूर्व एक युवक की हत्या हो गई। उसका शव कुंए में मिला। करीब 12 दिन बाद भी पुलिस हत्यारों को पकड़ नही सकी है जबकि पुलिस ने कई दिनों से एक महिला सहित कुछ लोगों को अपने पास बिठाया है। लेकिन कौन से कारणों से अभी खुलासा नही कर रही है। जानकारी लेने पर चुनाव घोषणा के ठीक दो दिन कार्यभार ग्रहण करने वाले कोतवाल सही जानकारी देने के बजाय अमर्यादित आचरण दिखाते हैं।
वैसे उनकी खीज सही भी है कि उन्हें सिटी कोतवाल से हटा कर देहात भेजा गया है। उनके व्यवहार से पुलिस विभाग भी परेशान है। सवाल यह उठता है कि जब जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी से लोग डरेंगे तो अपनी परेशानी किससे और कहां व्यक्त करेंगे। इसी तरह से प्रशासन में बैठे लोग चुनाव की हनक दिखाकर अपनी मनमानी चला रहे हैं।
अयोध्या-फैजाबाद से कुमार कृष्ण की रिपोर्ट.






