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अखिलेंद्र के उपवास का पांचवां दिन : कई संगठनों, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों ने दिया समर्थन

नई दिल्ली : कारपोरेट घरानों और एनजीओ को लोकपाल कानून के दायरे में लाने समेत कई महत्वपूर्ण सवालों पर आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह का दस दिवसीय उपवास आज पांचवें दिन भी जारी रहा। अखिलेन्द्र का चिकित्सीय परीक्षण करने आज भी डाक्टर नहीं पहुंचे जिस पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया।

नई दिल्ली : कारपोरेट घरानों और एनजीओ को लोकपाल कानून के दायरे में लाने समेत कई महत्वपूर्ण सवालों पर आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह का दस दिवसीय उपवास आज पांचवें दिन भी जारी रहा। अखिलेन्द्र का चिकित्सीय परीक्षण करने आज भी डाक्टर नहीं पहुंचे जिस पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया।

अखिलेन्द्र के उपवास का समर्थन सीपीआई (एम) के महासचिव का0 प्रकाश करात, वयोवृद्ध कम्युनिस्ट नेता और सीपीआई के पूर्व महासचिव का0 ए0 बी0 वर्धन, सोशलिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष न्यायमूर्ति राजेन्द्र सच्चर, पूर्व वित सचिव एसपी शुक्ला, अर्थशास्त्री सुलभा ब्रहमे, सोशलिस्ट पार्टी के महासचिव डा0 प्रेम सिंह, प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रो0 दीपक मलिक ने किया है।

उपवास पर आज लिए राजनीतिक प्रस्ताव में कहा गया कि सामाजिक न्याय की यात्रा अभी भी अधूरी है अति पिछड़े, पिछड़े दलित मुसलमान और आदिवासियों को आज तक सामाजिक न्याय का अधिकार नहीं मिला है। कारापेरेट घराने और उनके हितों के लिए काम करने वाले दल आज लम्बे संघर्षों के बाद हासिल सामाजिक न्याय के अधिकारों को ही खत्म करने की कोशिश में लगें है। इसके खिलाफ चौतरफा आंदोलन वक्त की जरूरत है। प्रस्ताव में अति पिछड़े और पिछड़े मुसलमानों को अन्य पिछड़ा वर्ग में से अलग आरक्षण कोटा देने, दलित मुसलमानों व ईसाइयों को अनुसूचित जाति में शामिल करने, कोल को आदिवासी का दर्जा देने की मांग सरकार से की गयी।

आयोजित सभा को सम्बोधित करते हुए अखिलेन्द्र ने कहा कि कारपोरेट घरानों ने पूरे राजनीतिक तंत्र को भ्रष्ट कर दिया है। राजनीतिक व नौकरशाही तंत्र से गठजोड़ कायम कर वह हमारे प्राकृतिक संसाधनों व सरकारी खजाने समेत बहुमूल्य राष्ट्रीय सम्पदा की लूट में लिप्त है। इसी तरह फोर्ड फांउडेशन जैसी साम्राज्यवादी एजेंसियों के फंड से संचालित एनजीओ हमारे राष्ट्रीय जीवन में भ्रष्टाचार के खतरनाक स्रोत हैं। उनकी बढ़ती घुसपैठ के हमारे स्वंतत्र नीति निर्णयों तथा सुरक्षा के लिए गम्भीर निहितार्थ हैं। लेकिन एनजीओ कारोबार भी लोकपाल के दायरे के बाहर है। इसलिए उन्होंने कारपोरेट और एनजीओं को लोकपाल के दायरे में लाने की मांग उठायी। उन्होंने कहा कि बगैर जनपक्षिय नीतियों को लागू किए और लोकतंत्रिक अधिकारों व सामाजिक न्याय की गारंटी के सुशासन की बात महज दिखावा है।

अखिलेन्द्र के उपवास को आज पीयूसीएल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चितरंजन सिंह, एनएपीएम के डा0 सुनीलम, किसान मंच के विनोद सिंह समेत वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश, आनंद स्वरूप वर्मा, अनिल चमाडिया, आनंद प्रधान, राजेश जोशी, अरूण पाण्डेय, चंद्र भूषण, रामशिरोमणि शुक्ला, जेएनयू प्रो0 कुलदीप कुमार, गांधीवादी रामधीरज समेत तमाम पत्रकारों और बुद्धिजीवियों ने भी जंतर-मंतर पर पहुंचकर उपवास का समर्थन किया।
                                                                           
दिनकर कपूर
सदस्य, राष्ट्रीय संयोजन समिति,
आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) द्वारा जारी

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