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दिल्ली

अखिलेंद्र के स्वास्थ्य में गिरावट, पाँचवें दिन भी नहीं पहुंचे डाक्टर

नई दिल्ली : दिल्ली सरकार का जनलोकपाल बिल यदि उत्तराखण्ड सरकार के लोकायुक्त बिल की ही कार्बन कापी है तो उसकी प्रति दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के सदस्यों को दिखाने व सार्वजनिक करने से केजरीवाल सरकार क्यों भाग रही है व ऐसे बिल के लिए सरकार की शहादत का कोई औचित्य नहीं है। इस बिल के लिये एक नहीं एक हजार बार सरकार की शहादत देने की बड़ी-बड़ी बात करना दरअसल एनजीओ राजनीति द्वारा शहादत का मजाक बनाना है।

नई दिल्ली : दिल्ली सरकार का जनलोकपाल बिल यदि उत्तराखण्ड सरकार के लोकायुक्त बिल की ही कार्बन कापी है तो उसकी प्रति दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के सदस्यों को दिखाने व सार्वजनिक करने से केजरीवाल सरकार क्यों भाग रही है व ऐसे बिल के लिए सरकार की शहादत का कोई औचित्य नहीं है। इस बिल के लिये एक नहीं एक हजार बार सरकार की शहादत देने की बड़ी-बड़ी बात करना दरअसल एनजीओ राजनीति द्वारा शहादत का मजाक बनाना है।

यदि केजरीवाल सरकार दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने और दिल्ली सरकार के अधिकारों में कटौती करने वाले केन्द्र के कुछ अध्यादेशों को खत्म कराने के सवाल पर लड़ना चाहती है तो हर सवाल पर जनमत संग्रह कराने के पैरोकारों को इस सवाल पर लोकसभा चुनाव में जनता के बीच जाना चाहिए और जनमत संग्रह कराना चाहिए। उक्त वक्तव्य आज जंतर मंतर पर अपने उपवास के पाँचवें दिन आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने दिया।

अखिलेन्द्र ने कहा कि जिस कारपोरेट घरानों ने पूरे राजनीतिक तंत्र को भ्रष्ट कर दिया है। राजनीतिक व नौकरशाही तंत्र से गठजोड़ कायम कर हमारे प्राकृतिक संसाधनों व सरकारी खजाने समेत बहुमूल्य राष्ट्रीय सम्पदा को लूट लिया है और जो देश में भ्रष्टाचार की गंगोत्री है उन्हें लोकपाल कानून के दायरे में लाए बिना भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल अथवा कथित जनलोकपाल कानून कमजोर और अपर्याप्त है, ऐसे कमजोर कानून से देश में हो रहे महाघोटालों पर रोक लगना असम्भव है।

गौरतलब है कि कारपोरेट घरानों व एनजीओं को लोकपाल कानून के दायरे में लाने, रोजगार के अधिकार को नीति निर्देशक तत्व की जगह संविधान के मूल अधिकार में शामिल करने, साम्प्रदायिक हिंसा निरोधक बिल को संसद के इसी सत्र में पारित करने समेत आम नागरिक की जिदंगी के लिए महत्वपूर्ण सवालों पर आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह का दस दिवसीय उपवास आज पाचंवे दिन भी जारी रहा। उपवास पर बैठे अखिलेन्द्र का चिकित्सीय परीक्षण करने किसी भी डाक्टर के न पहुंचने पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए आज आइपीएफ के राष्ट्रीय प्रवक्ता व पूर्व आईजी उ0 प्र0 एस0 आर0 दारापुरी ने गृहमंत्री और आयुक्त दिल्ली पुलिस को पत्र भेजा।

पत्र में कहा गया कि अनशन के सम्बंध में पूर्व में ही बकायदा लिखित सूचना प्रशासनिक अधिकारियों को दी गयी थी और उनके स्वास्थ्य के सम्बंध में भी अवगत कराया जा रहा है। पर अनशन का पाचंवा दिन होने के बावजूद अब तक कोई चिकित्सक उनके स्वास्थ्य की जांच तक करने अनशन स्थल पर नहीं आया। जबकि उनके स्वास्थ्य में निरंतर गिरावट हो रही है और कीटोन आने की आशंका है। जनांदोंलनों के राष्ट्रीय नेता के स्वास्थ्य के प्रति यह रूख भारत सरकार और दिल्ली प्रशासन की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। पत्र में निवेदन किया गया कि अविलम्ब उनका चिकित्सकीय परीक्षण सुनिश्चित कराये वरना सारी जिम्मेदारी भारत सरकार की होगी।

अखिलेन्द्र के उपवास का समर्थन सीपीआई (एम) के महासचिव का0 प्रकाश करात, वयोवृद्ध कम्युनिस्ट नेता और सीपीआई के पूर्व महासचिव का0 ए0 बी0 वर्धन, सोशलिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष न्यायमूर्ति राजेन्द्र सच्चर, पूर्व वित सचिव भारत सरकार एसपी शुक्ला, पूर्व सचिव भारत सरकार के0 बी0 सक्सेना व पी0 एस0 कृष्णनन, आइपीएफ की राष्ट्रीय अध्यक्ष व अर्थशास्त्री डा0 सुलभा ब्रहमे, वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश, सोशलिस्ट पार्टी के महासचिव डा0 प्रेम सिंह, प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रो0 दीपक मलिक, जेएनयू के प्रो कुलदीप कुमार, पीयुसीएल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चितरंजन सिंह, एनएपीएम के डा0 सुनीलम, किसान मंच के विनोद सिंह, समेत तमाम बुद्धिजीवियों, जनांदोलन के नेताओं व कार्यकर्त्ताओं ने किया है।

दिनकर कपूर
सदस्य, राष्ट्रीय संयोजन समिति,
आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) द्वारा जारी

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