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दिल्ली

अरविंद केजरीवाल का अंबानियों पर हमला बोलना क़ाबिल ए तारीफ़ है

Mayank Saxena : हां, दरअसल ये मुद्दा तो कम्युनिस्ट पार्टियों का ही था, इस पर बोलने की ज़रूरत भी वरिष्ठ कामरेडों को थी…लेकिन न जाने क्यों बजाय देश के लुटेरे कारपोरेट्स के खिलाफ़ बोलने के, कामरेड सिंगूर में टाटा और नंदीग्राम में सलीम ग्रुप की सेवा पर सफाई देते रह गए…ज़ाहिर है सिंगूर से टाटा को गुजरात ही जाना था, लेकिन ज़रा सोचिए जो आपकी सेवा खत्म होने के बाद मोदी जी की सेवा में लग जाए, वो आपको बता देता है कि उसके लिए आप में और उन में कोई अंतर नहीं…लेकिन क्या ख़ुद आप वो अंतर बचा पाए हैं?

Mayank Saxena : हां, दरअसल ये मुद्दा तो कम्युनिस्ट पार्टियों का ही था, इस पर बोलने की ज़रूरत भी वरिष्ठ कामरेडों को थी…लेकिन न जाने क्यों बजाय देश के लुटेरे कारपोरेट्स के खिलाफ़ बोलने के, कामरेड सिंगूर में टाटा और नंदीग्राम में सलीम ग्रुप की सेवा पर सफाई देते रह गए…ज़ाहिर है सिंगूर से टाटा को गुजरात ही जाना था, लेकिन ज़रा सोचिए जो आपकी सेवा खत्म होने के बाद मोदी जी की सेवा में लग जाए, वो आपको बता देता है कि उसके लिए आप में और उन में कोई अंतर नहीं…लेकिन क्या ख़ुद आप वो अंतर बचा पाए हैं?

फिलहाल करात से येचुरी तक आप चुप रहे और आप की चुप्पी के लम्बे अंतराल पर एक शख्स बोल रहा है…वो सीधे देश के सबसे ताक़तवर शख्स पर हमला बोल रहा है, अरविंद केजरीवाल ने जिस तरह लगातार और बार बार मुकेश और अनिल अम्बानी पर हमला बोला है…आप भले ही उसमें चालाकी देखें, वो है तो क़ाबिल ए तारीफ़ ही…

ख़ैर हम सुनना चाहेंगे कि कभी अरविंद केजरीवाल अम्बानी-अदानी-टाटा और मोदी के रिश्तों पर भी बोलें क्योंकि दरअसल कांग्रेस और बीजेपी एक ही झंडे के दो रंग हैं…एक ही सिक्के के दो पहलू और एक ही कारपोरेट की दो दुकानें…

फिलहाल अरविंद केजरीवाल ने लीड ले ली है…अब इंतज़ार है कि सीपीएम से कोई प्रवक्ता या नेता बेशर्म हो कर ये कहे कि ये मुद्दा तो हम बरसों से उठा रहे थे…चलिए कोई बात नहीं…अब आप मानें या न मानें आप इस लड़ाई में पिछड़े और परिणाम बंगाल से बाकी देश तक भुगत रहे हैं…

मैं आज भी सीपीएम मे मोहब्बत करता हूं…सीपीआई से भी…और माले से भी…लेकिन क्या माले को छोड़ कर कोई भी लड़ाई लड़ने में रुचि ले रहा है…अब प्लीज़ ये मत बताइएगा कि आप व्यक्तिगत तौर पर क्या कर रहे हैं कामरेड…ये बताइएगा कि पार्टी क्या कर रही है…ज़ाहिर है कि तीसरा मोर्चा चुनाव बाद ही बनेगा, क्योंकि मुलायम ही नहीं…माया…ममता…जयललिता…और कामरेड भी देखना चाहते हैं कि आम आदमी पार्टी का क्या हश्र होता है…साथ ही ख़ुद का भी…

आम आदमी पार्टी का समर्थक न होते हुए भी, मुकेश अम्बानी के विरोध में खड़े हो जाइए….मुकेश से शुरुआत हो जाए…फिर अनिल, रतन सबके कॉलर पकड़ लेंगे बाद में…

पत्रकार मयंक सक्सेना के फेसबुक वॉल से.

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