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अमर उजाला में खबर छपी, दैनिक जागरण व राष्ट्रीय सहारा के पत्रकारों ने मैनेज की खबर

: एनआरएचएम घोटाला में बरहज के बसपा विधायक राम प्रसाद जायसवाल से पूछताछ : गोरखपुर । एनआरएचएम घोटाले की जांच में प्रचार-प्रसार में बड़े पैमाने पर धांधली करने वाली फर्मों से गठजोड़ निकलने पर सीबीआई ने बरहज के बसपा विधायक रामप्रसाद जायसवाल से पूछताछ शुरू कर दी है। मंगलवार को दिन भर पूछताछ की गई और उनके देवरिया के ठिकानों पर दस्तावेजों की तलाश की गई। सीबीआई को विधायक की इन फर्मों से संलिप्तता के कुछ साक्ष्य मिले।

: एनआरएचएम घोटाला में बरहज के बसपा विधायक राम प्रसाद जायसवाल से पूछताछ : गोरखपुर । एनआरएचएम घोटाले की जांच में प्रचार-प्रसार में बड़े पैमाने पर धांधली करने वाली फर्मों से गठजोड़ निकलने पर सीबीआई ने बरहज के बसपा विधायक रामप्रसाद जायसवाल से पूछताछ शुरू कर दी है। मंगलवार को दिन भर पूछताछ की गई और उनके देवरिया के ठिकानों पर दस्तावेजों की तलाश की गई। सीबीआई को विधायक की इन फर्मों से संलिप्तता के कुछ साक्ष्य मिले।

साक्ष्यों के सही साबित होने पर विधायक की गिरफ्तारी की भी संभावना है। इस खबर की चर्चा पूरे दिन बरहज व देवरिया में गूंजती रही। खबर मिलने के बाद अमर उजाला के पत्रकारों ने तो खबर अपने अखबार के दफ्तर भेज दिया, लेकिन दैनिक जागरण व राष्ट्रीय सहारा के पत्रकारों ने खबर मैनेज करने का खेल शुरू किया। खबर दबाने के नाम पर बरहज व देवरिया में क्या हुआ,  यह बताने की जरूरत नहीं है। उत्तर प्रदेश की राजनीती के चर्चित एनआरएचएम घोटाला में फंसे बरहज के बसपा विधायक रामप्रसाद जायसवाल के करीबियों से इन दोनों सम्मानित अखबारों के पत्रकारों ने कैसे सौदा किया? अभी इसका खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन अमर उजाला ने पत्रकारीय धर्म का निर्वहन करते हुए पूरे मामले पर पहले पन्ने पर खबर छाप कर सनसनी फैला दी है।

अब बरहज के बसपा विधायक रामप्रसाद जायसवाल के नजदीकी लोग यह कह रहे हैं कि उजालावालों को पैसा नहीं दोगे तो क्या होगा। उधर उजाला के पत्रकार कह रहे हैं कि हम खबर दबाने के पैसे नहीं लेते। बुधवार को सुबह ही अमर उजाला की प्रतियां कम पड़ गईं। रामप्रसाद जायसवाल के विरोधियों ने १०-१० रुपये में हाकरों से अमर उजाला खरीदा। ऐसे समय में जब गोरखपुर में जनसंदेश टाइम्स का हौआ खड़ा हो, खबर दबाने की बात समझ से परे लगती है।

यह है अमर उजाला में प्रकाशित खबर….

प्रचार-प्रसार के ठेकों में हुई जमकर धांधली

एनआरएचएम : राम प्रसाद जायसवाल से पूछताछ शुरू

लखनऊ। सीबीआई को प्रचार-प्रसार के ठेकों में जमकर धांधली के सुबूत मिले हैं। मुरादाबाद की एक कंपनी के साथ देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर के ठेकेदारों की कई कंपनियों ने यह ठेका लिया था। इसमें काफी पैसा कंपनियों को एडवांस में दियागया। उन्होंने अनाप-शनाप दाम लेकर सरकार को आठ करोड़ का चूना लगाया। सीबीआई की जांच में पता चला है कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के प्रचार-प्रसारके ठेकों में सबसे ज्यादा खर्च वर्ष 2010-11 में किया गया। इस साल आरसीएच और एनआरएचएम मद में अलग-अलग 226 और 312 करोड़ रुपए मिले। इसमें से अस्सी फीसदी और साठ फीसदी खर्च किया गया।

वर्ष 2010-11 में आरसीएच मद में प्रचार-प्रसार के लिए मिले 226 करोड़ में 181 करोड़ खर्च किए गये। वहीं एनआरएचएम मद में मिले 312 करोड़ में 184 करोड़ खर्च किया गया। यह सारा काम भी यूपीस्माल स्केल इंडस्ट्री कारपोरेशन (यूपीएसआईसी) के जरिए कराया गया। जननी सुरक्षा योजना, परिवार नियोजन, पीएनडीटीएक्ट और टीकाकरण के बारे में प्रचार किया जाना था। यह प्रचार फ्लैक्स, बैनर और वाल पेन्टिंग के जरिए किया जाना था। प्रचार-प्रसार का यह ठेका मुरादाबाद के व्यवसायी के अलावा एक विधायक के करीबियों को भी दिया गया।

प्रचार-प्रसार का पहला ठेका बाजार के दाम से कई गुना अधिक दामों पर होर्डिंग, फ्लेक्स, बैनर, साइनेजेस आदि बनाने के लिए मुरादाबाद की फर्म को दिया गया। 13.7 करोड़ रुपए के इस ठेके को 18 अगस्त, 2010 को यूपीएसआईसी के जरिए दिया गया था। इसमें प्रचार फर्म को 134 जिला और महिला अस्पतालों में जननी सुरक्षा योजना, परिवार नियोजन, टीकाकरण के प्रचार के होर्डिंग, बैनर, फ्लैक्स बैन, साइनेज लगाने थे। जांच में पाया गया कि कई स्थानों पर यह लगाए ही नहीं गए। इसमें आठ करोड़ से अधिक की रकम का चूना लगाया गया।

वर्ष 2010-11 में जहां प्रचार-प्रसार के नाम पर अस्सी फीसदी तक खर्च किया गया। इससे पूर्व पैसा खर्च ही नहीं किया गया। वर्ष 2009-10 में आरसीएच प्रचार मद में 213 करोड़ मिले पर 164 करोड़ ही खर्च हो चुके। यह कुल बजट का केवल सात फीसदी ही था। वहीं एनआरएचएम मद में मिले 55 लाख तो खर्च ही नहीं किए गये। वर्ष 2008-09 में प्रचार-प्रसार मद में 184 करोड़ मिले। इसमें भी 42 लाख यानी तीन फीसदी ही खर्च हो सका। इससे जांच एजेंसी अंदाजा लगा रही है कि सबसे ज्यादा खर्च केवल वर्ष 2010-11 के दौरान किया गया, जब बाबू सिंह कुशवाहा परिवार कल्याण मंत्री रहे।

इलाहाबाद बैंक के नौ खातों पर निगाह, कुशवाहा के ट्रस्ट के खाते में मौजूद हैं सवा करोड़

अमर उजाला ब्यूरो

गोरखपुर/। एनआरएचएम घोटाले की जांच में प्रचार-प्रसार में बड़े पैमाने पर धांधली करने वाली फर्मों से गठजोड़ निकलने पर सीबीआई ने बसपा विधायक रामप्रसाद जायसवाल से पूछताछ शुरू कर दी है। विधायक से मंगलवार को दिन भर पूछताछ की गई और उनके लखनऊ व देवरिया के ठिकानों पर दस्तावेजों की तलाश की गई। सीबीआई को विधायक की इन फर्मों से संलिप्तता के कुछ साक्ष्य मिले हैं। साक्ष्यों के सही साबित होने पर विधायक की गिरफ्तारी की भी संभावना है।

देवरिया से बसपा विधायक राम प्रसाद जायसवाल से पूछताछ का सिलसिला दो दिनों से चल रहा है। मंगलवार देर रात तक एनआरएचएम घोटाले की जांच कर रही टीम के साथ ही सीएमओ मर्डर केस की जांच करने वाली टीम ने भी उनसे पूछताछ की। सीबीआई के सूत्र बताते हैं कि परिवार कल्याण मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के खासे नजदीकी इस एमएलए का परिवार कल्याण विभाग में लंबा दखल था और वह विभाग की समीक्षा बैठकों तक में भाग लेता था। इसे लेकर अगर किसी अधिकारी द्वारा आपत्ति की जाती थी तो उसे मंत्री की झाड़ सुननी पड़ती थी।

अमर उजाला के पास इलाहाबाद बैंक में अलग-अलग कंपनियों के नाम पर खोले गए नौ खातों की डिटेल है, जिस पर एजेंसियों की पूरी निगाह है। सीबीआई ने पाया है कि शिक्षा और प्रचार प्रसार के काम से जुड़ी छह फर्मों को 2010-2011 में कुल 31 करोड़ 27 लाख का ठेका हासिल हुआ था। इसमें से 18 करोड़ 50 लाख रुपए का काम भी कराया गया। पर जो काम हुआ और जो भुगतान लिया गया उसमें सरकार को आठ करोड़ रुपए की चपत लगाई गई। इन सभी फर्मों के संचालकों, उनके नजदीकियों व राजनेता के बैंक खातों की जांच कर चुकी सीबीआई को घोटाले की रकम के बारे में कुछ साक्ष्य मिले हैं। सीबीआई के सूत्र बताते हैं कि इन साक्ष्यों के आधार पर सीबीआई देवरिया के इस राजनेता के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।

अमर उजाला के पास मौजूद जानकारी के अनुसार लखनऊ गोमतीनगर में इलाहाबाद बैंक की शाखा में बाबू सिंह कुशवाहा ने भागवत प्रसाद एजुकेशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट नाम से 6 जून 2009 को एक खाता खोला। इस खाता संख्या 50014717838 में 30 जुलाई की तिथि में तीन करोड़ 54 लाख रुपये था। पांच सितंबर को 98 लाख रुपया एक मुश्त निकाला गया। अभी इस खाते में एक करोड़ 27 लाख रुपये पड़े हैं।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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