वाशिंगटन : विश्व में प्रेस की आजादी के सूचकांक के मामले में भारत को 140वां स्थान मिला है, जबकि इसके पड़ोसी-चीन और पाकिस्तान क्रमश: 175वें तथा 158वें स्थान पर हैं। रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर ने अपनी नवीनतम वाषिर्क रिपोर्ट में कहा, ‘भारत में पत्रकारों के खिलाफ हिंसा की अभूतपूर्व लहर देखी गई और 2013 में 8 पत्रकार मारे गए । उन्हें सरकार से संबंधित और सरकार से इतर दोनों तत्वों द्वारा निशाना बनाया जाता है ।’ इसने कहा, ‘लगभग कोई भी क्षेत्र अछूता नहीं है, लेकिन कश्मीर और छत्तीसगढ़ दो ऐसी जगह हैं जहां हिंसा और सेंसरशिप लगातार जारी रहती है।’
रिपोर्ट में कहा गया, ‘पुलिस और सुरक्षाबलों, आपराधिक समूहों, प्रदर्शनकारियों और राजनीतिक दलों के समर्थकों जैसे लोगों की धमकियों और शारीरिक हिंसा के शिकार होने वाले पत्रकारों को अक्सर न्याय प्रणाली से न्याय नहीं मिल पाता और वे खुद को सेंसर कर लेते हैं।’ सूचकांक में फिनलैंड सबसे शीर्ष पर है। इसके बाद नीदरलैंड और नॉर्वे को स्थान मिला है।
अमेरिका का सूचकांक पिछले साल के 32 अंक से लुढ़क कर इस साल 46वें पायदान पर पहुंच गया है। सूची में चीन को 175वां और पाकिस्तान को 158वां स्थान हासिल हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया कि पत्रकारों के लिए पाकिस्तान विश्व में सर्वाधिक खतरनाक देशों में शामिल है जहां सशस्त्र समूह, देश की खुफिया एजेंसियां, खासकर आईएसआई पत्रकारों के लिए खतरा पैदा करती है।
पेरिस आधारित मीडिया राइट्स वाचडॉग ने कहा कि जो देश खुद के लोकतंत्र होने और कानून का सम्मान करने का गर्व करते हैं, उन्होंने इस मामले में कोई बड़ा उदाहरण स्थापित नहीं किया है। रिपोर्ट में कहा गया कि यह 46वां स्थान पाने वाले अमेरिका के मामले में हुआ है, जो खुलासा करने वालों और खुलासे के स्रोतों की धरपकड़ के प्रयासों के बीच 13 अंक लुढ़क गया, जो एक महत्वपूर्ण गिरावट है। इसमें कहा गया कि श्रीलंका (165वां स्थान) के उत्तर में सेना सर्वोपरि है, जो तमिल पृथकतावादियों के पूर्व गढ़ में समझौता प्रक्रिया के आधिकारिक दृष्टिकोण को कोई चुनौती सहन नहीं करती। सीरिया पिछले साल पत्रकारों के लिए खास तौर पर एक घातक स्थान रहा जहां मार्च 2011 में संघर्ष शुरू होने से लेकर करीब 130 मीडियाकर्मी मारे गए।





