उत्तराखंड की त्रासदी पर पत्रकार वेद विलास उनियाल की किताब प्रकाशित होकर आई है। नाम है- 'देखी पीर पहाड़ की'। उत्तराखंड की त्रासदी पर वह एक महीने गंगोत्री, मंदाकिनी घाटी और पिंडर घाटी के गांव- गांव गए। करीब 130 किमी पैदल चले। उस समय की व्यथा, लोगों का दर्द, पहाड़ों का जीवन, बदलती जीवन शैली, देश भर के लोगों का सहयोग, उजड़ता उत्तरकाशी और टूटता श्रीनगर, गौरा देवी का गांव, भारतीय सेना का पराक्रम, हर चीज को महसूस करते अपनी डायरी लिखते गए।
रास्ते में बछेंद्रीपालजी से भी मिलना हुआ। किताब में त्रासदी की कई तस्वीर भी है। पद्मश्री चंडी प्रसाद भट्टजी और गोविंद ने इस किताब पर प्रीफेक्स लिखा है। किताब घर (विकास पेपर बैक्स) से प्रकाशित इस किताब का विमोचन मुंबई में छह दिन चलने वाले कौथिक में ब्लिट्ज के पूर्व संपादक नंद किशोर नौटियाल के हाथों किया गया। इस त्रासदी में जिन्होंने अपनी जान गंवाई, यह किताब उनको समर्पित की गई है।






