सुल्तानपुर : अब देश में मीडिया साक्षरता की आवश्यकता है। समाचारों को आलोचनात्मक दृष्टि से पढ़ना होगा। सूचना का सच नहीं उसके पीछे के सत्य को समझना होगा। ये कहना है कि भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के प्रोफेसर आनंद प्रधान का। वे बुधवार को स्थानीय कमला नेहरु भौतिक एवं सामाजिक विज्ञान संस्थान में केएन सिंह स्मृति व्याख्यानमाला में 'मीडिया के सरोकार व समकालीन चुनौतियां' विषयक संगोष्ठी में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।
व्याख्यानमाला में हिंदी विभाग के रीडर डॉ.राधेश्याम सिंह ने विषय प्रवर्तन किया। उन्होंने सवाल किया कि आज सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक मूल्य टूट एवं बदल रहे हैं। जिसका दंश सामान्य आदमी भोगने को विवश है, ऐसे में क्या मीडिया ने उस दर्द को साझा किया है? जिस पर बतौर मुख्य वक्ता भारतीय जनसंचार के प्रोफेसर आनंद प्रधान ने अपना मुख्य वक्तव्य दिया। कहाकि मीडिया पर आप चार्जशीट तो दाखिल कर सकते हैं, लेकिन मुहल्ले की सड़क व पानी न मिलने पर लोग यह भी सोचते होंगे कि अखबार में निकल जाता तो लोगों का ध्यान इस पर जाता। आज या तो न्याय पालिका से आशा है या फिर मीडिया से। यह समझ विकसित करनी होगी कि मीडिया या वैकल्पिक मीडिया परिवर्तन के लिए नहीं, बल्कि और संवैधानिक खंभे ढह न जाएं इसे बचाने के लिए है। यह जरूर है कि मीडिया आज कारपोरेट एजेंडे को साधने में लगी हुई है। उन्होंने छात्रों में मीडिया साक्षरता शुरू करने की जरूरत पर बल दिया। कहाकि किसी भी समाचार को आलोचनात्मक दृष्टि से पढ़ना और समझना होगा। यही हमारी उपलब्धि होगी। साहित्यकार कमलनयन पांडेय ने मूलभूत मुद्दे उठाए और कहाकि मीडिया मनोरंजन ज्यादा, लोकशिक्षण पर कम ध्यान दे रही है। व्याख्यानमाला का संयोजन डॉ.सुरेंद्र मणि त्रिपाठी ने किया।





