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आदिवासियों को ‘नंगा’ नाचते हुए दिखाने वाले चैनलों को नोटिस

 नई दिल्‍ली. अंडमान के आदिवासियों के शोषण का मामला गरमाता जा रहा है। अंडमान द्वीप के आदिवासियों का सनसनीखेज वीडियो सामने आने पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अंडमान प्रशासन से इस मामले में स्‍टेटस रिपोर्ट मांगी है। मंत्रालय ने स्‍थानीय प्रशासन को रिपोर्ट देने के लिए 24 घंटे की मोहलत दी है। हालांकि, अंडमान-निकोबार प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाने की बात कहने की बजाय उन टीवी चैनलों को नोटिस देने का फैसला किया है, जिन्होंने आदिवासी महिलाओं को डांस करते हुए दिखाया। अंडमान-निकोबार प्रशासन ने मंगलवार को कहा कि जरवा समुदाय की आदिवासी महिलाओं को डांस करते हुए दिखाने पर दिल्ली के दो टीवी चैनलों को कानूनी नोटिस दिया जाएगा।

 नई दिल्‍ली. अंडमान के आदिवासियों के शोषण का मामला गरमाता जा रहा है। अंडमान द्वीप के आदिवासियों का सनसनीखेज वीडियो सामने आने पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अंडमान प्रशासन से इस मामले में स्‍टेटस रिपोर्ट मांगी है। मंत्रालय ने स्‍थानीय प्रशासन को रिपोर्ट देने के लिए 24 घंटे की मोहलत दी है। हालांकि, अंडमान-निकोबार प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाने की बात कहने की बजाय उन टीवी चैनलों को नोटिस देने का फैसला किया है, जिन्होंने आदिवासी महिलाओं को डांस करते हुए दिखाया। अंडमान-निकोबार प्रशासन ने मंगलवार को कहा कि जरवा समुदाय की आदिवासी महिलाओं को डांस करते हुए दिखाने पर दिल्ली के दो टीवी चैनलों को कानूनी नोटिस दिया जाएगा।

अंडमान-निकोबार प्रशासन के मुताबिक टीवी चैनलों को यह नोटिस इसलिए दी जाएगी क्योंकि उनकी तरफ से दिखाए गए वीडियो एकतरफा थे और उन्हें दिखाने से पहले प्रशासन का पक्ष नहीं लिया गया था। हालांकि अंडमान के डीजीपी एस बी सिंह देओल ने वीडियो को ‘आधारहीन’ और ‘अविश्‍वसनीय’ बताया है। उन्‍होंने कहा कि वीडियो को शूट किए जाने की तारीख भी नहीं सामने आ रही है और संभव है कि इसे 2002 में शूट किया गया हो। लेकिन वीडियो जारी करने वाले ब्रिटिश पत्रकार ने दावा किया है कि यह वीडियो पुराना नहीं बल्कि नया है। अंडमान-निकोबार पुलिस का कहना है कि वीडियो शूट करने वाले के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। अंडमान-निकोबार प्रशासन ने मीडिया को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि वीडियो में जिस व्यक्ति ने जरवा महिलाओं को डांस करने के लिए कहा है, वह पुलिस वाला नहीं है। उस व्यक्ति को पुलिस वाला बता रही रिपोर्ट गलत हैं। केंद्र शासित राज्य की पुलिस की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, 'यह साफ हो चुका है कि जिस समय यह वीडियो रिकॉर्ड किया गया उस समय जरवा समुदाय के लोग कपड़े नहीं पहनते थे। यहां तक आज भी जंगलों में रहने वाले जरवा बिना कपड़ों के हैं। वीडियो को शूट करने वाला वीडियोग्राफर और महिलाओं को डांस के लिए उकसाने वाले ने कानून तोड़ा है।'
 
यह विवाद ब्रिटिश मीडिया में एक वीडियो जारी होने के बाद सामने आया है। वीडियो में दिखाया गया है कि किस तरह अंडमान के आदिवासियों की मजबूरी का फायदा उठाया जाता है। वीडियो में यहां मौज-मस्‍ती के लिए आने वाले विदेशी सैलानियों के सामने गरीब आदिवासियों को नाचते हुए दिखाया गया है। जरावा समुदाय के ये आदिवासी आमतौर पर नंगे या कम कपड़े पहने होते हैं। 'द ऑब्‍जर्वर' के पत्रकार गेथिन चैम्‍बरलेन ने दावा किया है कि स्‍थानीय पुलिसकर्मियों ने जरावा समुदाय के आदिवासियों को खाने के लिए कुछ बिस्किट और चंद सिक्‍कों का लालच देकर सैलानियों के सामने नाचने को कहा। ब्रिटिश पत्रकार का यहां तक कहना है कि जरावा आदिवासियों तक पहुंचने के लिए स्‍थानीय पुलिसवालों को 15 हजार रुपये की रिश्‍वत देनी पड़ी थी।
 
गौरतलब है कि जरावा आदिवासी भारत में अंडमान द्वीप पर ही पाए जाते हैं। अब इनकी तादाद कुछ सौ तक सिमट कर रह गई है। सुप्रीम कोर्ट ने जरावा आदिवासियों के संरक्षण को लेकर पहले ही कई कदम उठाने के आदेश दे रखे हैं। जरावा आदिवासियों के संरक्षण के लिए अदालत का साफ निर्देश है कि उनके रिहायशी इलाके तक जाने वाली सड़क पर आम लोगों को न जाने दिया जाए। लेकिन स्‍थानीय पुलिसकर्मी सैलानियों से कुछ पैसे लेकर उन्‍हें आदिवासियों के इलाके तक जाने की छूट देते हैं। साभार : दैनिक भास्कर

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