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लखनऊ

मुख्यमंत्री अखिलेश से घूसखोर आईएएस पर कार्यवाही की मांग

लखनऊ स्थित सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से आईएएस वीक में जिक्र किये गए उस घूसखोर आईएएस अफसर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में कार्यवाही किये जाने की मांग की है जिसने उनके कहने के बाद भी काम के लिए पैसा लिया था.

लखनऊ स्थित सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से आईएएस वीक में जिक्र किये गए उस घूसखोर आईएएस अफसर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में कार्यवाही किये जाने की मांग की है जिसने उनके कहने के बाद भी काम के लिए पैसा लिया था.

डॉ ठाकुर ने श्री यादव को पत्र लिख कर कहा है कि जब जांच में यह प्रमाणित हो गया कि उस आईएएस अफसर ने घूस लिया और उसने घूस का पैसा वापस कर दिया तो उसके बाद भी उस अफसर पर कार्यवाही नहीं करना पूर्णतया गैर-कानूनी काम है और यह कार्य स्वयं मुख्यमंत्री की स्थिति को खराब करता है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को यह अधिकार नहीं था कि घूस की बात प्रमाणित होने के बाद अपने स्तर से उसे ट्रांसफर करके माफ़ कर देते. अतः उन्होंने श्री यादव से निवेदन किया है कि वे 15 मार्च तक इस मामले में कार्यवाही करें अन्यथा वे इस प्रकरण को ले कर कोर्ट जायेंगी.

पत्र ये है…

सेवा में,
श्री अखिलेश यादव,
मुख्यमंत्री,
उत्तर प्रदेश,
लखनऊ

विषय- दिनांक 14/02/2014 को आईएएस अफसरों को आईएएस वीक पर दिए गए आपके संभाषण विषयक
महोदय,
कृपया दिनांक 14/02/2014 को आईएएस अफसरों को आईएएस वीक पर उत्तर प्रदेश सचिवालय के तिलक हाल में दिए गए आपके संभाषण  का सन्दर्भ ग्रहण करें जिसमे आपने अन्य बातों के अलावा यह भी कहा कि आपने एक आईएएस अफसर द्वारा आपकी सिफारिश/आदेश के बाद भी घूस लेने की जानकारी प्राप्त होने पर वे पैसे वापस कराये. मैं इस सम्बन्ध में कुछ समाचार पत्रों में आज दिनांक दिनांक 15/02/2014 को प्रकाशित खबरें प्रस्तुत कर रही हूँ. पायोनीयर अख़बार में प्रकाशित “Improve law, order without fear: CM to bureaucracy” के अनुसार-“In a friendly tête-à-tête, Yadav even said that he knew about officials who disobeyed people's representatives. He even spoke about an official who took a bribe despite his warning. "I did not take action against him but shunted him out of the post he held," he said.  पर्दाफ़ाश न्यूज़ पोर्टल में प्रकाशित “जब मुख्यमंत्री अखिलेश ने वापस कराया रिश्वत का पैसा” के अनुसार-“ आईएएस वीक के मौके पर शुक्रवार को विधानभवन के तिलक हॉल में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने नौकरशाही के भ्रष्टाचार को सबके सामने रख दिया। मुख्यमंत्री ने एक संस्मरण सुनाते हुए कहा कि वे एक अधिकारी से रिश्वत का पैसा पीड़ित को वापस दिला चुके हैं।  मुख्यमंत्री ने कहा, एक जानने वाले का काम था। वह अधिकारी के पास गया तो उसने रिश्वत ली। जब काम नहीं हुआ तो फोन पर जानने वाले ने मुझसे शिकायत की। जांच में बात सही निकली तो उस अधिकारी से रिश्वत का पैसा वापस कराया। उसे पद से भी हटा दिया। लेकिन उसके खिलाफ कोई दूसरी सख्त कार्रवाई नहीं की। मुख्यमंत्री के इस रहस्योद्घाटन के बाद हॉल में सन्नाटा छा गया| इसके बाद वहाँ मौजूद अधिकारियों में इस घूसखोर अधिकारी के नाम की चर्चा आरम्भ हो गयी| माहोल काफी गम्भीर हो गया था जिसे बाद में मुख्यमंत्री ने ही हल्का किया|” इंडियन एक्सप्रेस में सुश्री मौलश्री सेठ की खबर “CM pulls up IAS, IPS officers for corruption” के अनुसार-“Sources present in the meeting told The Indian Express that a piqued CM cited an example of how an officer took bribe from a person who was recommended by the CM himself and still did not do the work. “It was most shocking. Though he did not take any name, he said how the officer had the courage to take bribe from the person whom he had recommended. He told us that if this can happen with the Chief Minister, then what about the common man” said an officer.” नव भारत टाइम्स की खबर “आईएएस ऑफिसरों को अखिलेश की खरी-खरी” के अनुसार- “मुख्यमंत्री ने अफसरों के बीच एक किस्सा भी सुनाया। कहा कि मैंने एक अफसर को किसी काम के लिए फोन करके कहा था। उस अफसर ने काम भी नहीं किया और पैसे भी ले लिए। बाद में जो काम कराने के लिए गए थे उन्होंने फिर शिकायत की तब अफसरों को निलंबित तो नहीं किया पर उसका ट्रांसफर कर दिया।“. अमर उजाला की खबर “अखिलेश ने खुद खोल दी करप्‍शन की पोल” के अनुसार-“ सूबे की अफसरशाही में व्याप्त भ्रष्टाचार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शुक्रवार को आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि वे एक ऐसे ही अफसर से घूस की रकम वापस दिला चुके हैं।  बोले, एक जानने वाले का काम था। वह अफसर के पास गया तो उसने रिश्वत ली। काम नहीं हुआ तो फोन पर जानने वाले ने शिकायत की। जांच में बात सही निकली तो उस अफसर से घूस की रकम वापस कराई। पद से भी हटा दिया। पर, भलमनसाहत दिखाई और उसके खिलाफ कोई दूसरी सख्त कार्रवाई नहीं की।“

इन सभी अलग-अलग समाचार पत्रों में लगभग एक ही बात कही गयी है कि एक आईएएस अफसर ने आपके कहने के बाद भी घूस ले लिए और आपने उससे घूस के पैसे वापस दिलाये, लेकिन उसके बदले आपने उस अफसर को कोई क्षति नहीं पहुंचाई. सादर निवेदन करुँगी कि आपका यह कार्य पूरी तरह गैर-कानूनी है क्योंकि यदि आपको यह बात जानकारी में आई कि अफसर ने घूस लिया है और जांच के बाद यह बात सच साबित हुई, जिसके बाद आपके कहने पर उस अफसर ने पैसे भी वापस किये तो इसके बाद यदि आपने मात्र उस अफसर को वहां से हटा कर मामले का पटाक्षेप कर दिया तो विधिक रूप से पूरी तरह गलत कृत्य है. एक जघन्य आपराधिक मामले में, भ्रष्टाचार के प्रकरण में आपको यह अधिकार नहीं था कि आप स्तर को अपने स्तर से समाप्त कर दें. यह ना सिर्फ नियमानुसार गलत है, आपके ना चाहते हुए भी जाने-अनजाने इस पूरे प्रकरण में स्वयं आपकी ही भूमिका संदिग्ध बन जाती है. यह घटना अन्य आईएएस अधिकारियों तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को यह सन्देश भी देता है कि वे कोई भी भ्रष्टाचार या गैर-कानूनी कार्य करके आसानी से बच सकते हैं क्योंकि आप उन पर कोई कार्यवाही नहीं करेंगे, बहुत होगा तो ट्रांसफर कर देंगे.

अतः मैं आपसे निवेदन करुँगी कि आपके स्वयं द्वारा कही गयी इन बातों के परिप्रेक्ष्य में तत्काल उस आईएएस अफसर या वह जो भी अफसर रहा हो, के खिलाफ कठोर विधिक कार्यवाही करने की कृपा करें. साथ ही यह भी निवेदन है कि यदि एक माह में अर्थात दिनांक 15/03/2014 तक इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं हुई तो मुझे बाध्य हो कर इस प्रकरण को मा० न्यायालय में ले जाना पड़ेगा.
पत्र संख्या- NT/CM/IAS
दिनांक- 15/02/2014                                      
भवदीय,
(डॉ नूतन ठाकुर)
5/426, विराम खंड,
गोमती नगर, लखनऊ
# 094155-34526
[email protected]
प्रतिलिपि- श्री जावेद उस्मानी, मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश तथा श्री राकेश गर्ग, प्रमुख सचिव, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश को तत्काल आवश्यक कार्यवाही हेतु

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