सूचना व प्रसारण मंत्रालय शीघ्र ही देश के उन चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखने वाला है जहां पहले चरण में केबल इंडस्ट्री की कायापलट की योजना की शुरुआत होगी। इस पत्र में उनसे कहा जाएगा कि वे मुंबई, कोलकाता, दिल्ली और चेन्नई से शुरू हो रही केबल टीवी की डिजिटलीकरण की इस महत्वपूर्ण योजना को अपनी हर संभव मदद दें। पहले चरण में ही सिर्फ इन मेट्रो शहरों के लिए एक करोड़ सेट टॉप बॉक्स की जरूरत होगी।
सेट टॉप बॉक्स की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए और केबल टीवी के डिजिटलीकरण से जुड़ी इस योजना के लिए लोगों में जागरूकता लाने के लिए केन्द्र सरकार कई महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। केबल अधिनियम में बदलाव के जरिए केबल टीवी को एनॉलॉग मोड से डिजिटल मोड में बदलने के महत्वपूर्ण प्रस्ताव को हाल ही में संसद के दोनों सदनों ने स्वीकृति प्रदान की है। हाल में इस मुद्दे पर सूचना व प्रसारण मंत्रालय द्वारा गठित टास्क फोर्स की दूसरी बैठक में यह तय हुआ कि इस मामले में जागरूकता लाने के लिए प्रिंट और चैनलों के जरिए प्रभावी जागरूकता अभियान जरूरी है।
सरकार केबल इंडस्ट्री को वित्तीय प्रोत्साहन देने के लिए एक प्रस्ताव पर काम कर रही है और इस मुद्दे पर आगामी 13 जनवरी को संबंधित कंपनियों के साथ एक बैठक कर रही है जिसमेंकेबल टीवी दरों, चैनलों के साथ राजस्व बंटवारा, सभी पक्षों (चैनलों, बड़े केबल ऑपरेटर और केबल ऑपरेटर) के बीच समझौते आदि जुड़े हुए मुद्दों पर बात होगी। माना जा रहा है कि केन्द्र सरकार सेट टॉप बॉक्स की बड़ी संख्या में जरूरतों के मद्देनजर इसके आयात के लिए कस्टम ड्यूटी में भी रियायत दे सकती है।
सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने केबल टीवी के डिजिटलीकरण से जुड़े सभी मामलों में तेजी लाने के लिए छह उप समूह का गठन किया है जिसमें समयबद्ध तरीके से इसे पूरा करने, इसके बारे में जागरूकता लाने, सेट टॉप बॉक्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने, केबल इंडस्ट्री को वित्तीय प्रोत्साहन देने, इससे जुड़े लोगों को प्रशिक्षण देने बढ़ाने के लिए गठित उप समूह शामिल हैं। इन विशेषज्ञ समूहों में बड़े केबल ऑपरेटरों इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन के प्रतिनिधियों और केबल ऑपरेटरों की प्रतिनिधि संस्थाओं को शामिल किया गया है।
साभार : दैनिक भास्कर





