रोहतक : लगता है अमर उजाला के लिए हरियाणा की धरती शुभ नहीं है. यहां यह अखबार जमने से पहले ही उखड़ने को है. अमर उजाला ने हरियाणा में पैर जमाने के उद्देश्य से हरियाणा की राजनीतिक राजधानी कहे जाने वाले रोहतक को चुना, लेकिन यहां बात बनती नहीं दिखती. एक साल से ज्यादा हो चुका है लेकिन अखबार जिस दम खम से शुरू करने का दावा किया गया था, शुरू ही नहीं हो पा रहा है. तारीख पर तारीख दी जा रही है. अब कहा जा रहा है कि नई प्रिंटिंग प्रेस के साथ मार्च के पहले हफ्ते तक मामला जम जाएगा.
यह अखबार कई साल पहले से हरियाणा में मौजूद है, पर नए दम खम से जमने का इरादा जम नहीं पाया. रोहतक में प्रिंटिंग प्रेस भी लग गई लेकिन पता नहीं क्यों बात बनती नहीं दिखती. रोहतक की ही बात की जाए तो यहां मूल रूप से कोई हरियाणवी या फिर कहें कि रोहतकी टिकता ही नहीं दिखता. जो पुराने थे, उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया या वे खुद ब खुद चले गए और जो नए हैं, उनमे दम नहीं दिखता.
वैसे तो हरियाणा में अमर उजाला की शुरुआत वर्ष 1999 में जुलाई माह में हो गई थी. तब यह अखबार नए रंग रूप में हरियाणावासियों के सामने पेश हुआ था. तब हरियाणा में दैनिक ट्रिब्यून का दौर था और दैनिक जागरण भी हरियाणावासियों को अपने रंग में रंगने के प्रयास में कुछ हद तक कामयाब हो गया था. ऐसे समय में अमर उजाला नई सोच और समझ लेकर हरियाणा में आया. तब यह अखबार उलटा पढ़ा जाता था यानि पहले सबसे आखिरी पृष्ठ. दरअसल हरियाणा या यूं कहें जिस क्षेत्र विशेष में यह अखबार जाता था, वहां की खबरें आखिरी पृष्ठ पर होती थी. फिर उसके बाद यह उलटा ही बढ़ता जाता था. पर यह प्रयोग हरियाणावासियों को पसंद नहीं आया.
इस बीच अगले साल ही दैनिक भास्कर ने हरियाणा में दस्तक दे दी और धीरे-धीरे बाजार पर पकड़ बना ली. ऐसे में अमर उजाला दौड़ से ही बाहर हो गया. दस साल से भी ज्यादा के अंतराल के बाद अमर उजाला ने हरियाणा की धरती में फिर से पकड़ने बनाने की सोची और इसके लिए रोहतक को चुना. रोहतक में हुड्डा साहिब मतलब मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के विकास की राह को पकड़ते हुए आईएमटी यानि इंडस्ट्रियल माडल टाउनशिप में प्रिंटिंग प्रेस लगाने के लिए टुकड़ा भी खरीद लिया. अखबार का मकसद हुड्डा को मस्का लगाना था, इसलिए उनके पिता के नाम पर बनी टाउनशिप में प्लाट खरीदा. खरीद कर कंस्ट्रक्शन का काम भी शुरू कर दिया. नई यूनिट के साथ ही तारीख की भी घोषणा कर दी. उस तारीख को एक साल भी हो चुका है, लेकिन पता नहीं बात कहां अटक गई है कि काम शुरू ही नहीं हो पा रहा है.
नई यूनिट के लगने के साथ ही नए लोगों को कमान भी दे दी गई. नया यूनिट हेड और नया संपादकीय प्रमुख. नई ही संपादकीय टीम. ऐसे में जो पुराने लोग उम्मीद लगाए बैठे थे, वे धीरे-धीरे साथ छोड़ते चले गए. उन्हें इस बात का मलाल रहा है कि उन्हें ज्यादा तवज्जो नहीं मिली, बाहर वालों पर मैनेजमेंट ज्यादा मेहरबान रहा. इसलिए कुछ ने तो संस्थान से खुद ही किनारा कर लिया और कुछ को संस्थान ने ही दूर कर लिया. आज हालत यह है कि रोहतक में प्रिंटिंग प्रेस लगने के बाद भी नए जोश-खरोश के साथ संस्करण शुरू करने की योजना मूर्त रूप नहीं ले पा रही है.
हरियाणा के पत्रकार यहां काम करना ही नहीं चाहते या ये भी हो सकता है कि उन्हें तवज्जो नहीं मिल रही और बाहर वालों के सहारे बात नहीं बन रही. अब ये सभी हरियाणावासी पत्रकार प्रबंधन को शिकायतनामा लिखने की तैयारी में हैं. रोहतक में संपादकीय प्रभारी भूपेंद्र ने अपने खासमखास किसी अलीगढ़ के दीपक शर्मा को जिम्मेदारी दे रखी है लेकिन उनसे यहां की टीम के सदस्य खुश नहीं हैं. उन्होंने अपनी यह शिकायत मुझ तक भेजी है ताकि उनकी पीड़ा भड़ास के जरिए बाकी सबको बता सकूं. इस अखबार को रोहतक में कोई फोटोग्राफर तक नहीं मिल पा रहा है जो अपने कैमरे में इस संस्थान के लिए तस्वीर कैद कर सके. इंटरव्यू तो कई के हुए, लेकिन चुनाव किसी का नहीं हो सका. इसमें वे लोग भी शामिल हैं, जो संस्थान छोड़कर जा चुके हैं. चलो, मित्र होने के नाते मेरा काम था उनकी पीड़ा को जग जाहिर करना, बाकी जो उन पर बीतती है या फिर बीतेगी, उसके लिए वे खुद जिम्मेदार होंगे.
रोहतक से दीपक खोखर की रिपोर्ट. संपर्क: 09991680040





