कारपोरेट को जनलोकपाल के दायरे में लाने की मांग को लेकर दस दिनी उपवास पर बैठे आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट यानि आईपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक कामरेड अखिलेंद्र प्रताप सिंह को भड़ास4मीडिया के संस्थापक और संपादक यशवंत सिंह ने एक ज्ञापन दिया. इस ज्ञापन में कहा गया है कि कार्पोरेट के साथ ही मीडिया को भी जनलोकपाल के दायरे में लाने की मांग की जाए.
अखिलेंद्र प्रताप सिंह ने यशवंत को भरोसा दिया कि वे इस मांग को भी अपने आंदोलन का हिस्सा बनाएंगे. यशवंत ने उनसे बातचीत के दौरान कहा कि ट्रांसपैरेंसी के लिए बहुत जरूरी है कि मीडिया को भी जनलोकपाल के दायरे में लाया जाए क्योंकि आजकल सारे घटिया काम मीडिया के खोल में किए जा रहे हैं.

आईपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेंद्र को भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत की तरफ से दिया गया ज्ञापन इस प्रकार है…
प्रति,
श्री अखिलेन्द्र प्रताप सिंह
राष्ट्रीय संयोजक
ऑल इंडिया पीपुल फ्रण्ट
प्रवासः धरना स्थल संसद मार्ग, नई दिल्ली।
ज्ञापनः ‘कार्पोरेट घरानों की तरह मीडिया घरानों को भी लोकपाल के दायरे में शामिल करने की मांग को आंदोलन का हिस्सा बनाया जाये’
प्रिय श्री अखिलेन्द्र जी,
कार्पोरेट घरानों को लोकपाल के दायरे में लाने के लिए आपके संघर्ष और दस दिनी उपवास का भड़ास फॉर मीडिया परिवार पूर्ण रूपेण समर्थन करता है। जन सरोकार से जुड़े और जनतंत्र की मजबूती के लिए आपका यह कठोर आंदोलन निश्चित रूप से आम जन के दिल तथा सरकार में बैठे लोगों के दिमाग पर खासा असरकारी होगा। भारतीय जनतंत्र को भ्रष्टाचार ने चारों तरफ से घेर रखा है। सरकारी उपक्रम और कार्पोरेट का भ्रष्टाचार तो अब आये दिन उजागर होने लगा है। कार्पोरेट की तर्ज पर मीडिया में भी बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार फैल चुका है। मगर मीडिया का भ्रष्टाचार अभी काफी हद तक छुपा हुआ है। मीडिया के करप्शन को उजागर करने की दिशा में भड़ास4मीडिया जैसे कुछ पोर्टल कई वर्षों से सक्रिय हैं और कई बड़े मामलों को सामने लाने में सफलता भी पाई है। देखा जाए तो मीडिया का भ्रष्टाचार सरकारी उपक्रमों और कार्पोरेट घरानों के भ्रष्टाचार से भी गंभीर और घातक है। यह चौथा खंभा माना जाता है जिस पर आप भ्रष्ट कार्पोरेट घराने, भ्रष्ट नेता और भ्रष्ट नौकरशाह कब्जा कर भ्रष्टाचार के खिलाफ चलने वाले किसी भी अभियान को नष्ट करने का इंतजाम कर दे रहे हैं। भड़ास के माध्यम से और राडिया टेप प्रकरण आदि के जरिए यदा-कदा बाहर आयीं मीडिया में भ्रष्टाचार की छिटपुट खबरें किसी व्यापक पूंजीवादी षडयंत्र का संकेत दे रही हैं। इसका पर्दाफाश भी मीडिया को लोकपाल के दायरे में लाने से हो सकता है।
यह कहना अनुचित नहीं है कि बाजार और पूंजी के दंश से भारतीय मीडिया का एक बड़ा वर्ग दूषित हो गया है। इसका शिकार मीडिया कर्मियों से लेकर पूरा समाज और देश बन रहा है। देश के हर आम और खास को सीधे तौर प्रभावित करने वाले ‘मीडिया घरानों’ के कारनामे भी हर आम और खास के सामने होने चाहिए। तब ही मीडिया अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभा सकेगा और जनता का विश्वास भी मीडिया में मजबूत होगा। इसलिए सरकारी उपक्रम और कार्पोरेट घरानों की तरह अब मीडिया को भी लोक पाल के दायरे में लाना जरूरी है। मीडिया में फैले भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए भड़ास फॉर मीडिया परिवार की मांग है कि मीडिया को लोकपाल के दायरे में लाने के संघर्ष को आप अपने आंदोलन का हिस्सा ठीक उसी तरह बनायें जैसे आपने कार्पोरेट घरानों को लोकपाल के दायरे में लाने मांग को आपने बनाया है।
आपके आंदोलन और दस दिनी उपवास को एक बार फिर पूर्ण रूपेण समर्थन के साथ,
यशवंत सिंह
संस्थापक और सम्पादक
भड़ास फॉर मीडिया डॉट कॉम
bhadas4media.com
दिल्ली
मोबाइल: 9999330099
मेल: [email protected]
दिनांकः 12-02-2014
उधर, कारपोरेट घरानों को लोकपाल कानून के दायरे में लाने समेत कई महत्वपूर्ण सवालों पर अखिलेन्द्र प्रताप सिंह का दस दिवसीय उपवास पूर्व घोषणा के अनुसार दसवें दिन सीपीआई (एम) के महासचिव का0 प्रकाश करात ने जूस पिलाकर समाप्त कराया. इस अवसर पर का0 करात के अलावा, वयोवृद्ध कम्युनिस्ट नेता और सीपीआई के पूर्व महासचिव का0 ए0 बी0 वर्धन, सोशलिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष न्यायमूर्ति राजेन्द्र सच्चर, सीपीआई (एमएल) के पोलित ब्यूरों सदस्य का0 स्वपन मुखर्जी, प्रभात चैधरी, राष्ट्रीय उलेमा कौसिंल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आमिर रसादी मदनी, भारतीय किसान यूनियन (अम्बावता) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ऋषिपाल अम्बावता, पूर्व सासंद एम एजाज अली, प्रो0 शिवमंगल सिद्धांतकर, अर्थशास्त्री जया मेहता समेत देश की विभिन्न प्रगतिशील लोकतांत्रिक आंदोलनों की ताकतों के नेतागण जुटे.
इस अवसर पर आयोजित सभा में अखिलेन्द्र ने कहा कि इस उपवास को जिस तरह से देश की विभिन्न प्रगतिशील लोकतांत्रिक धाराओं के व्यापक हिस्से का समर्थन हासिल हुआ है और जनता के वास्तविक मुद्दों को राष्ट्रीय राजनीति के पटल पर सामने ले आने में सफलता हासिल हुई है उससे यह विश्वास पुख्ता हुआ है कि इस देश में कारपोरेट राजनीति को शिकस्त मिलेगी और जनता की राजनीति की जीत होगी.
उन्होंने कहा कि इस उपवास के दौरान बार-बार दमन के खिलाफ लोकतांत्रिक अधिकारोंके लिए बारह वर्षो से उपवास पर बैठी इरोम शर्मिला याद आ रही. आज भी देश में महिलाओं के साथ बलात्कार हो रहे है, पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों पर बर्बर हिंसा हो रही है, कश्मीर के लोंगो को राजधानी में पत्रकारवार्ता तक नहीं करने दी जा रही है। इन हालातों को हर हाल में बदलना होगा और हर हिन्दुस्तानी नागरिक कों चाहें वह हिन्दी-ऊर्दू भाषी क्षेत्र का हो, दक्षिण, मध्य भारत, पूर्वोतर या कश्मीर का हों उसे सम्मान के साथ जीने का अधिकार हासिल दिलाने के लिए चैतरफा आंदोलन चलाना होगा.
अखिलेन्द्र ने कहा कि नई आर्थिक-औद्योगिक नीति ने सवालों को हल करने की जगह और जटिल कर दिया है. जिस चालू खाते के संकट को दूर करने के लिए इन्हें लाया गया था वह आज और भी गहरा हो गया है. बेरोजगारी बड़े पैमाने पर बढ़ी है और कृषि विकास गतिरूद्ध ही नहीं ऋणात्मक स्तर पर जा रहा है. ठेका मजदूरों के दोनों रूप चाहे वह शारीरिक श्रम करने वाले राष्ट्रपति भवन से लेकर उद्योगों तक में काम करने वाले हो या बौद्धिक श्रम करने वाले मीडिया, माल, सर्विस सेंटर में कार्यरतकर्मी असुरक्षित जीवन जीने के लिए अभिशप्त है. इनका हर हाल में नियमितिकरण के सवाल को हल करना होगा.
उन्होंने कहा कि नई अर्थनीति के खिलाफ लड़ाई में आज देश में सर्वोपरि किसानों के सवाल है क्योकि कारपोरेट घरानों की निगाहें किसानों की उपजाऊ जमीन पर लगी हुई है और इन हितों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर किसानों की जमीन से बेदखली की जा रही है. इसलिए कृषि योग्य उपजाऊ भूमि की कारपोरेट खरीद पर रोक लगाने, देश में भूमि उपयोग नीति तत्काल बनाने और तत्काल प्रभाव से कृषि लागत मूल्य आयोग को संवैधानिक दर्जा दिलाने की मांग को हमने उपवास के द्वारा बुलन्द किया है. उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की लूट को अंजाम देने और खेती-किसानी को बर्बाद करने के लिए आज देश में मुसलमानों व आदिवासियों को खलनायक बनाया जा रहा है और साम्प्रदायिक उन्माद फैलाया जा रहा है. किसानों को इससे सचेत करना होगा और जिन मुद्दों को उपवास से उठाया गया है उन पर संघर्ष को और तेज किया जायेगा.
अखिलेन्द्र के उपवास का समर्थन करने आए सीपीआई (एम) के महासचिव का0 प्रकाश करात ने कहा कि कांगे्रस की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ पैदा हो रहे आक्रोश के मद्देनजर देश के कारपोरेट धरानों द्वारा मोदी की फासीवादी राजनीति को बढ़ाने की कोशिश हो रही है। इसके खिलाफ वैकल्पिक नीतियों पर जनता के संघर्ष को आगे बढ़ानें में यह उपवास बड़ी भूमिका अदा करेगा. जिन मुद्दों को इस उपवास के माध्यम से उठाया गया है उसे आगे बढ़ाने के लिए सीपीआई (एम) हर तरह योगदान करेगी।
वयोवृद्ध कम्युनिस्ट नेता और सीपीआई के पूर्व महासचिव का0 ए0 बी0 वर्धन ने कहा कि कारपोरेट घरानों की राजनीति और अर्थनीति के खिलाफ जनता की राजनीति को खड़ा करने में अखिलेन्द्र के इस उपवास ने बड़ी भूमिका अदा की है.
सोशलिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष न्यायमूर्ति राजेन्द्र सच्चर ने कहा कि आज संविधान की मूल आत्मा समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक न्याय को ही खत्म करने की कोशिश हो रही है. ऐसे में इस उपवास ने इन्हें पुनः स्थापित करने का काम किया है. सीपीआई (एमएल) के पोलित ब्यूरों सदस्य का0 स्वपन मुखर्जी ने कहा कि कामरेड़ अखिलेन्द्र का उपवास पूरे जनता का रोजगार से लेकर महंगाई तक के सवालों पर देश की वाम जनवादी ताकतों का ध्यान आकर्षित करने में सफल रहा है.
राष्ट्रीय उलेमा कौसिंल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आमिर रशादी मदनी ने उपवास का समर्थन करते हुए कहा कि साम्प्रदायिक हिंसा निरोधक बिल यदि पास हुआ होता तो मुजफ्फरनगर का दंगा न होता. पूर्व सासंद एम0 एजाज अली ने कहा कि मुल्क में पहली बार किसी ने धारा 341 में संशोधन कर दलित मुसलमानों को दलित का दर्जा देने के लिए दस दिन तक उपवास किया है. उम्मीद है कि जो लड़ाई अखिलेन्द्र ने शुरू की है वह अंजाम तक पहुंचेगी. सभा का समापन आइपीएफ के राष्ट्रीय प्रवक्ता एस0 आर0 दारापुरी व संचालन राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य लाल बहादुर सिंह ने किया. पूरे आयोजन में आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) के राष्ट्रीय संयोजन समिति सदस्य कामरेड दिनकर कपूर का महत्वपूर्ण योगदान रहा.
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