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‘संडे नई दुनिया’ के सभी एडिशन बंद होंगे, सैकड़ों पत्रकार सड़क पर

हिंदी के बड़े अखबार समूह 'नईदुनिया' से एक बहुत बुरी खबर है. यह समूह बड़े क़र्ज़ के कारण खतरे में है. यही कारण है कि समूह ने दिल्ली समेत देश के कई शहरों से निकलने वाले अपने 'संडे नईदुनिया' साप्ताहिक अखबार को बंद करने का फैसला किया है. १५ जनवरी के बाद इसका अंक नहीं आयेगा. इसी तरह इंदौर से निकलने वाले युवा सुप्प्लीमेंट को भी बंद कर दिया. महिलाओं की वीकली पत्रिका 'नायिका' को पहले मैग्ज़ीन जैसा निकाल रहे थे, उसे फिर टैबलाइड पर ले आए हैं.

हिंदी के बड़े अखबार समूह 'नईदुनिया' से एक बहुत बुरी खबर है. यह समूह बड़े क़र्ज़ के कारण खतरे में है. यही कारण है कि समूह ने दिल्ली समेत देश के कई शहरों से निकलने वाले अपने 'संडे नईदुनिया' साप्ताहिक अखबार को बंद करने का फैसला किया है. १५ जनवरी के बाद इसका अंक नहीं आयेगा. इसी तरह इंदौर से निकलने वाले युवा सुप्प्लीमेंट को भी बंद कर दिया. महिलाओं की वीकली पत्रिका 'नायिका' को पहले मैग्ज़ीन जैसा निकाल रहे थे, उसे फिर टैबलाइड पर ले आए हैं.

देश के बड़े शहरों के ब्यूरो भी बंद किए जा रहे हैं. दिल्ली ऑफिस से भी कई की छुट्टी होने की खबर है. सबसे ज्यादा खतरा मोटे वेतन वालों को है. सभी संस्करण से स्टाफ निकालने की तैयारी है. ये भी संकेत है कि अखबार का प्रबंधन भी बदल रहा है. ५ साल पहले इसे विनय छजलानी ने अपने हाथ में लिया था. पर वो इसे संभाल नहीं सके. इसका कारण उनके साथ के लोग हैं जो इस काबिल नहीं थे. इंदौर, दिल्ली, जबलपुर, बिलासपुर संस्करण सबसे ज्यादा घाटे का कारण बने. 'नईदुनिया' के इंदौर संस्करण को सबसे सफल माना जाता था, पर ये भी भास्कर और पत्रिका से पिछड़ गया. नए प्रबंधन के बाद विनय छजलानी के सलाहकारों की छुट्टी होना तय माना जा रहा है. इस वित्तीय वर्ष के अंत तक कोई बड़ी खबर आ सकती है.

सबसे दुर्भाग्यपूर्ण है संडे नई दुनिया का बंद होना. लखनऊ, दिल्ली, पटना, मुंबई, चंडीगढ़, रांची समेत कई शहरों से प्रकाशित हो रहे संडे नई दुनिया का प्रकाशन बंद करने के फैसले से सैकड़ों मीडियाकर्मी सड़क पर आ गए हैं. १५ जनवरी को आखिरी बार यह अखबार छपेगा. कुछ वर्ष पूर्व यह अखबार जोरशोर से शुरू किया गया था. हर शहर में अच्छे जर्नलिस्टों की नियुक्ति की गई. सरकुलेशन समेत सभी विभागों में नए लोगों को रखा गया. अब अचानक बंदी के फैसले से सभी लोग बेरोजगार हो गए हैं. भड़ास4मीडिया के पास संडे नई दुनिया की बंदी से संबंधित एक आंतरिक मेल है, जिससे स्पष्ट है कि संडे नई दुनिया की पारी खत्म और सैकड़ों मीडियाकर्मियों की बेरोजगारी की पारी शुरू. इस मेल में कहा गया है कि १५ जनवरी को संडे नई दुनिया के अंतिम अंक के बाद भोपाल शहर में २२ जनवरी संडे को संडे नईदुनिया की जगह मास्टहेड नवदुनिया जाएगा और संडे नईदुनिया की जगह संडे को तरंग अखबार के साथ दिया जाएगा. इसी तरह दिल्ली-एनसीआर में २२ जनवरी संडे के दिन संडेनईदुनिया मैग्जीन की जगह चार पेज का संडेनई दुनिया सप्लीमेंट दिया जाएगा… मेल इस प्रकार है….

As is decided Sunday naidunia will be having its last issue dated 15th Jan 2012. Following are the the plan in lieu of its closure.

1. In Bhopal city the mast head of Sunday edition will be changed to Navdunia effective issue dated 22nd Jan and Tarang will be given on Sundays in place of SND,

2. In Delhi+ NCR effective issue date 22nd jan we will be having 4 page supplement named Sunday Naidunia on every Sunday in place of magazine SND.
 
Regards

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