लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार प्रद्युम्न तिवारी ने अमर उजाला से अपना कई दशकों का नाता तोड़ लिया है. उन्होंने नई पारी की शुरुआत लखनऊ में हिंदी दैनिक जनसंदेश टाइम्स से की है. वे यहां स्पेशल करेस्पांडेंट बनाए गए हैं. प्रद्युम्न तिवारी अमर उजाला, लखनऊ के ब्यूरो चीफ भी रहे हैं. इन दिनों वे अमर उजाला, कानपुर में कार्यरत थे. लखनऊ के निवासी प्रद्युम्न ने करियर की शुरुआत अमृत प्रभात अखबार के साथ की थी. वर्ष १९९२ में उन्होंने कानपुर में अमर उजाला ज्वाइन किया. उस समय कानपुर में अमर उजाला की लांचिंग होनी थी.
तीन साल तक वे कानपुर में अमर उजाला के डाक प्रभारी रहे. उसके बाद उन्हें लखनऊ भेज दिया गया जहां विभिन्न पदों पर होते हुए ब्यूरो चीफ बने. खरी-खरी बात बोलने कहने के कारण प्रद्युम्न तिवारी का कुछ एक बार संपादकों से विवाद भी हुआ और इसका खामियाजा भी उन्हें तबादले के रूप में उठाना पड़ा. कभी उनका तबादला बरेली किया गया तो कभी कानपुर.
जबसे अमर उजाला, लखनऊ में संपादक के रूप में इंदुशेखर पंचोली आए, तबसे पुराने लोगों ने अमर उजाला को छोड़ना शुरू कर दिया क्योंकि पंचोली का अपने अधीनस्थों से घटिया व्यवहार किसी स्वाभिमानी पत्रकार को रास नहीं आया. पंचोली से पंगा लेने के कारण ही प्रद्युम्न का तबादला कानपुर कर दिया गया. अमर उजाला समूह को अपना इस्तीफा सौंपकर प्रद्युम्न ने फिर संकेत दे दिया कि अमर उजाला प्रबंधन घटिया व्यवहार करने वालों को संपादक बनाकर अपने ब्रांड और स्टाफ रूपी पूंजी के साथ खिलवाड़ कर रहा है.





