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विविध

बदले विचार पर स्टीफन हॉकिंग को एक भारतीय वैदिक विद्वान का पत्र

आदरणीय श्रीमान् स्टीफन हॉकिंग

डीएएमटीपी

सेन्टर फॉर मैथमेटिकल सायंस

विलबेरफोर्स रोड

कैम्ब्रीज सीबीएस ओडब्ल्यूए

(यू.के.)

विषय- ब्लैक हॉल पर आपके परिवर्तित विचार।

महोदय!

उपर्युक्त विषयार्न्तगत निवेदन है कि विभिन्न माध्यमों से आपके ब्लैक होल विषय में परिवर्तित विचार जाने। नेचर न्यूज में 24 जनवरी 2014 को ‘स्टीफन हॉकिंग: देयर आर नो ब्लैक होल्स’ लेख पढ़ा। सर्वप्रथम सत्य को स्वीकार करने पर आपको हार्दिक बधाई।

आदरणीय श्रीमान् स्टीफन हॉकिंग

डीएएमटीपी

सेन्टर फॉर मैथमेटिकल सायंस

विलबेरफोर्स रोड

कैम्ब्रीज सीबीएस ओडब्ल्यूए

(यू.के.)

विषय- ब्लैक हॉल पर आपके परिवर्तित विचार।

महोदय!

उपर्युक्त विषयार्न्तगत निवेदन है कि विभिन्न माध्यमों से आपके ब्लैक होल विषय में परिवर्तित विचार जाने। नेचर न्यूज में 24 जनवरी 2014 को ‘स्टीफन हॉकिंग: देयर आर नो ब्लैक होल्स’ लेख पढ़ा। सर्वप्रथम सत्य को स्वीकार करने पर आपको हार्दिक बधाई।

क्या आपको स्मरण है कि मैंने 29.8.2013 को एक ई-मेल करके ब्लैक होल तथा बिग बैंग मॉडल पर आपसे एवं संसार के अन्य वैज्ञानिकों से 12 प्रश्न पूछे थे। ब्लैक होल तथा इवेन्ट होराइजन विषयक मेरा प्रश्न इस प्रकार था-

‘‘यह माना जाता है कि ब्लैक होल के निकट टाइम रुक जाता है। इस कारण यह मानना होगा कि ब्लैक होल के बाहरी भाग और उसके अन्दर कोई क्रिया नहीं होगी, क्योंकि बिना समय के कोई क्रिया वा हलचल नहीं हो सकती, परन्तु यह माना जाता है कि ब्लैक होल में गुरुत्वाकर्षण बल अत्यधिक होता है, इससे गुरुत्वीय तरंगें तो उत्पन्न होंगी ही। तब ब्लैक होल पर क्रिया व हलचल सिद्ध हो ही गयी। ब्लैक होल पर रेडियेषन विद्यमान होते ही हैं, भले ही वे बाहर उत्सर्जित नहीं हो सके। स्टीफन हॉकिंग स्वयं रेडियेशन का उत्सर्जन मानते हैं, जिन्हें हॉकिंग रेडियेशन नाम दिया जाता है। तब क्रिया व गति स्वयं ही सिद्ध हो जाती है। तब, कैसे कहा जाता है कि ब्लैक होल पर समय और गति रुक जाती है।’’

महोदय! मैं जानना चाहता हूँ कि क्या आपने अपना विचार परिवर्तित करते समय इस पत्र पर भी ध्यान दिया था, उसी दिन 29.8.2013 को आपके टेक्निकल असिस्टेंट मि. जोनाथन वर्ड ने मुझे पत्र लिखा था, जिसमें मेरे पत्र का उत्तर देने में आपकी असमर्थता दर्शायी थी। आपने नवीनतम लेख में ब्लैक होल के स्थान पर जिस फायर वाल की चर्चा की है तथा इवेन्ट होराजन के स्थान पर एपरन्ट होराइजन की चर्चा की है, वह वस्तुतः भारतीय खगोलशास्त्री प्रो. ए.के. मित्रा (बी.ए.आर.सी.) के विचार हैं।

उन्होंने ये विचार आपसे पूर्व अनेक प्रकाशित पत्रों में विस्तार से व्यक्त किये हैं तथा उनके लेख आपकी अपेक्षा काफी विस्तृत एवं स्पष्ट हैं परन्तु आपके विचार अति संक्षिप्त व अस्पष्ट हैं। उनके ब्लैक होल पर कई लेख मेरे पास हैं। अतः आपके नवीनतम विचारों पर उनका दावा उचित है। आश्चर्य है कि आपने अपने लेख में उनके नाम का उल्लेख तक नहीं किया। मैंने तो ब्लैक होल तथा इवेन्ट होराजन पर गम्भीर प्रश्न ही खड़े किये थे, तब मेरी चर्चा करना तो आवश्यक नहीं था परन्तु डॉ. मित्रा ने तो ब्लैक होल के विकल्प के रूप में विस्तृत थ्यौरी प्रस्तुत की है, तब उनके नाम का उल्लेख होना चाहिए था।

आपने अपने पूर्व मत को क्यों परिवर्तित किया, इसके लिए आपके लेख में कोई तर्क नहीं है तथा फायर वाल वाला सिद्धान्त की सिद्धि भी आपने नहीं की है, केवल मान लिया है। इस कारण आपका लेख वैज्ञानिक दृष्टि से विशेष उपयोगी प्रतीत नहीं होता। आपकी पुस्तक ‘ग्राण्ड डिजायन’ की भी यही स्थिति है। कृपया इस कथन के लिए क्षमा करें। अस्तु।

महोदय! मैंने 19.4.2006 को अपने पत्रांक 798 के द्वारा आपको अपनी पुस्तक ‘बेसिक मैटेरियल कोज ऑफ दी क्रियेशन’ जिसकी फॉरवर्ड डॉ. ए.के. मित्रा ने ही लिखी थी, आपको भेजी थी। इस पुस्तक में ब्लैक होल एण्ड बिग बैंग मॉडल के शून्य आयतन में अनन्त द्रव्यमान एवं अनन्त ऊर्जा के होने का विस्तार से खण्डन किया था। इससे पूर्व अगस्त 2004 में डॉ. मित्रा ने अपने ब्लैक होल विषयक लेख में भी इसी प्रकार का विचार व्यक्त किया था। उस समय आपने अपनी पुस्तक 'ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम' में बिग बैंग की चर्चा में शून्य आयतन में अनन्त द्रव्यमान की बात कही है। 16.12.2004 में येरूशलम विष्वविद्यालय में आपके व्याख्यान में बिग बैंग के समय आयतन शून्य नहीं माना है बल्कि एक पॉइन्ट लिखा है। उस पॉइन्ट के आयतन की बात नहीं की है। जुलाई 2010 में डिस्कवरी टी.वी. चैनल पर इस पॉइन्ट का आयतन ऐटम के बराबर माना है।

महोदय! मैं जानना चाहता हूँ कि आपके इन विचारों में परिवर्तन के पीछे डॉ. मित्रा के लेख अथवा मेरी पुस्तक का कुछ योगदान है वा नहीं?

महोदय! आपने अपनी पुस्तक ‘ग्राण्ड डिजायन’ में ईश्वर के अस्तित्व का खण्डन करके भौतिकी के नियमों से सृष्टि उत्पत्ति की बात की है। इसका खण्डन हमारी वेबसाइट पर उपलब्ध है परन्तु यह वीडियो अभी हिन्दी भाषा में उपलब्ध है।

महोदय! ईश्वर के नियम ही भौतिकी के नियम हैं जैसा कि रिचर्ड पी. फाइनमैन ने स्वीकार किया है। ईश्वर की सत्ता वर्तमान भौतिकी के नियमों से ही सिद्ध हो जाती है। ईश्वर बिना नियम सृष्टि की उत्पत्ति व संचालन नहीं कर सकता।

  • मेरा निवेदन है कि आप अपनी बिग बैंग थ्यौरी पर भी पुनर्विचार करें। आषा है आप कभी न कभी इसकी असत्यता को भी स्वीकार करेंगे। जिस ईष्वर को आप नकारते हैं, वही ईष्वर आपको दीर्घायु प्रदान करे, जिससे आप अपने बिग बैंग मॉडल की भूलों को भी स्वीकार कर मेरे शोध कार्य के पूर्ण होने पर उस पर भी विचार कर सकें। मुझे इस समय विष्वास है कि मैं निम्न विषयों पर संसार के विज्ञान को कुछ विषेष दिषा दे सकूंगा-
  • बल की अवधारणा जो आज अत्यन्त अस्पष्ट व अपूर्ण है। जिस पर प्रख्यात अमरीकी वैज्ञानिक रिचर्ड पी. फाइनमैन के डायग्राम्स को विष्वभर में अत्यन्त प्रामाणिक माना जाता है। मैं इस विषय पर फाइनमैन से बहुत आगे जाकर लेख लिख सकूंगा।
  • जिन्हें संसार आज मूल कण मानता है, उनके मूल कण न होने तथा इनके निर्माण की पूर्ण प्रक्रिया को बहुत विस्तार से स्पष्ट कर सकूंगा। वर्तमान विज्ञान इस विषय में विचार भी नहीं कर पा रहा है अथवा कर रहा है।
  • ब्लैक होल के स्थान पर डॉ. मित्रा साहब के इ.सी.ओ. मॉडल से मेरा ऐतरेय विज्ञान भी सहमत है। मैं इस विषय में विचार लिख सकूंगा।
  • सृष्टि निर्माण की प्रक्रिया को वर्तमान किसी भी सिद्धान्त से आगे ले जाकर विस्तार से अनादि मूल पदार्थ से लेकर तारों के निर्माण के विषय में भी विस्तार से लिख सकूंगा।
  • डार्क इनर्जी जिसे बिग बैंग के लिए उत्तरदायी माना जाता है, के दूसरे स्वरूप जिसमें बिग बैंग नहीं बल्कि अनेक विस्फोट सदैव होते रहते हैं, सृष्टि की हर क्रिया में उसकी भूमिका को दर्शा सकूंगा। मेरी डार्क इनर्जी वर्तमान विज्ञान द्वारा कल्पित डार्क इनर्जी से भिन्न होगी।
  • वर्तमान विज्ञान में कल्पित वैक्यूम इनर्जी के रूप में एक अन्य लगभग सर्वव्यापक ऊर्जा के स्वरूप को बतला सकूंगा।
  • सृष्टि विज्ञान, खगोल विज्ञान एवं कण भौतिकी के अनेक रहस्यमय बिन्दुओं पर प्रकाश डाल सकूंगा।
  • इन सब कार्यों के लिए ईश्वर नामक चेतन सर्वव्यापक व सर्वज्ञ, निराकार व सर्वषक्तिमती सत्ता को भी सिद्ध कर सकूंगा।
  • वेद मंत्र ईश्वरीय रचना है, ये मंत्र कुरान, बाइबिल आदि किसी भी अन्य ग्रन्थ के समान नहीं है। इसे भी सिद्ध कर सकूंगा। 

आशा है आप व संसार के वैज्ञानिक इन बिन्दुओं पर भी अभी से विचार करना प्रारम्भ करेंगे। इसी आशा के साथ… विशेष आदर के साथ…

आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक

अध्यक्ष, श्री वैदिक स्वस्ति पन्था न्यास

आचार्य, वेद विज्ञान मन्दिर

(वैदिक एवं आधुनिक भौतिक विज्ञान शोध संस्थान)

भागलभीम, भीनमाल, जिला-जालोर

(राजस्थान) 

भारत 

पिन- 343029

E-mail- [email protected]               

Website- www.vaidicscience.com


इस पत्र को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें:

A letter of the vaidic scholar to Prof. Stephen Hawking

 

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